पक्षियों की चेतावनी पुकार: इंसानी भाषा की उत्पत्ति की एक झलक

पक्षियों की एक जैसी चेतावनी पुकार से पता चलता है कि सामाजिक सीख और जन्मजात व्यवहार मिलकर संचार विकसित करते हैं, जो इंसानी भाषा की उत्पत्ति को समझने में मदद करता है। 

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नई दिल्ली: हाल ही में हुए एक रोमांचक शोध ने पक्षियों के संचार के तरीकों पर नई रोशनी डाली है, जो इंसानी भाषा की शुरुआत को समझने में मदद कर सकता है। कॉर्नेल यूनिवर्सिटी और स्पेन के डोनाना बायोलॉजिकल स्टेशन के वैज्ञानिकों ने पाया कि दुनिया भर की अलग-अलग पक्षी प्रजातियां, जो लाखों साल पहले एक-दूसरे से अलग हो चुकी थीं, परजीवी पक्षियों से बचने के लिए एक जैसी चेतावनी भरी आवाज का इस्तेमाल करती हैं। यह शोध नेचर इकोलॉजी एंड एवोलुशन पत्रिका में छपा है।

परजीवी पक्षी और खतरा

कुछ पक्षी, जैसे कोयल अपने अंडे दूसरों के घोंसलों में रखकर चालाकी दिखाते हैं। इससे घोंसले के मालिक पक्षी को अपने बच्चों के साथ-साथ परजीवी के बच्चे को भी पालना पड़ता है, जो अक्सर उनके लिए नुकसानदायक होता है। इस खतरे से बचने के लिए कई पक्षी प्रजातियां एक खास चेतावनी ध्वनि निकालती हैं, जो आस-पास के अन्य पक्षियों को सतर्क करती है।

एक जैसी पुकार का रहस्य

वैज्ञानिकों ने ऑस्ट्रेलिया, अफ्रीका और चीन जैसे दूर-दराज के क्षेत्रों की 20 से अधिक पक्षी प्रजातियों का अध्ययन किया। हैरानी की बात यह है कि ये पक्षी, जो कभी एक-दूसरे के संपर्क में नहीं रहे, परजीवी पक्षियों को देखकर एक जैसी कराहती ध्वनि निकालते हैं। यह समानता उनके अलग-अलग पर्यावरण और विकास पथ के बावजूद मौजूद है। वैज्ञानिक मानते हैं कि यह ध्वनि आंशिक रूप से जन्मजात होती है और आंशिक रूप से सामाजिक सीखने से विकसित होती है। जब एक पक्षी यह ध्वनि सुनता है, तो वह खतरे की जांच करता है और उसी ध्वनि को दोहराना सीख लेता है।

इंसानी भाषा से संबंध

यह खोज चार्ल्स डार्विन के उस विचार को बल देती है कि इंसानी भाषा स्वाभाविक ध्वनियों से शुरू हुई होगी। पक्षियों की यह चेतावनी पुकार एक तरह का सांस्कृतिक विकास दर्शाती है, जहां सामाजिक व्यवहार और अनुभव से संचार के नए तरीके बनते हैं। यह हमें बताता है कि प्राचीन इंसान भी शायद ऐसी ही ध्वनियों से शुरूआत करके धीरे-धीरे भाषा विकसित करते गए।

भविष्य के लिए प्रेरणा

यह शोध न केवल पक्षियों के व्यवहार को समझने में मदद करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि संचार प्रकृति में कितना जटिल और सार्वभौमिक हो सकता है। यह हमें भाषा की उत्पत्ति और उसके विकास के बारे में नए दृष्टिकोण देता है।  

Usha Mehta

ushamehta0013@gmail.com

NewG India का सबसे युवा चेहरा, दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के बाद IGNOU और ABP न्यूज़ नेटवर्क जैसे संस्थानों में इंटर्नशिप की। सोशल और कॉमर्स विषयों की गहरी समझ हैं कलम के साथ आवाज में भी धार हैं। NewG India में बतौर कंटेंट डेवलपर व एंकर अपनी जिम्मेदारी उषा मेहता बखूबी निभा रही हैं ।

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