नई दिल्ली: वैश्विक स्वास्थ्य और पारंपरिक चिकित्सा (Traditional Medicine) के इतिहास में 1st July 2026 का दिन एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के वाणिज्य विभाग ने आयुष (AYUSH) मंत्रालय और आयुष निर्यात संवर्धन परिषद (AYUSHEXCIL) के साथ मिलकर नई दिल्ली के वाणिज्य भवन में एक अत्यंत महत्वपूर्ण ‘सरकार-उद्योग विचार-मंथन सत्र’ (Government–Industry Brainstorming Session) का आयोजन किया।
इस ऐतिहासिक सत्र का मुख्य विषय था:’पारंपरिक कल्याण में भारत के वैश्विक नेतृत्व को मजबूत करना: आयुष क्षेत्र में नवाचार, गुणवत्ता, निर्यात और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग’ (Strengthening India’s Global Leadership in Traditional Wellness: Innovation, Quality, Exports and International Collaboration in the AYUSH Sector)।
इस महामंथन में देश-विदेश के 150 से अधिक वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों, निर्यातकों, निर्माताओं, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs), उभरते हुए स्टार्टअप्स, शोधकर्ताओं, औद्योगिक संघों के प्रतिनिधियों और राज्य लाइसेंसिंग प्राधिकरणों (State Licensing Authorities) ने हिस्सा लिया। सभी का एकमात्र साझा उद्देश्य था-भारतीय आयुष क्षेत्र को वैश्विक मंच पर शीर्ष पर ले जाने के लिए एक ठोस और व्यावहारिक रोडमैप तैयार करना।
व्यापक विचार-विमर्श और रणनीतिक दृष्टिकोण
इस सत्र के दौरान उन तमाम अवसरों पर विस्तार से चर्चा की गई जो भारत के मुक्त व्यापार समझौतों (Free Trade Agreements – FTAs) के माध्यम से उभर रहे हैं। इसके साथ ही आयुष की वैश्विक ब्रांडिंग, निर्यात सुगमता के उपाय, सख्त गुणवत्ता मानक, डब्ल्यूएचओ-जीएमपी (WHO-GMP) अनुपालन, आयुष क्वालिटी मार्क (Ayush Quality Mark), और वैज्ञानिक सत्यापन (Scientific Validation) जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर गंभीरता से विचार किया गया।
सत्र में केवल उत्पादों के निर्यात पर ही नहीं, बल्कि ‘मेडिकल वैल्यू ट्रैवल’ (Medical Value Travel) और वैश्विक कल्याण सेवाओं पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। सरकार, उद्योग, अनुसंधान संस्थानों और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने खुले मन से विचारों का आदान-प्रदान किया। उन्होंने भारतीय आयुष उत्पादों और सेवाओं की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के लिए अपने व्यावहारिक सुझाव और सिफारिशें साझा कीं, ताकि नियामक (Regulatory) और बाजार पहुंच (Market Access) संबंधी चुनौतियों का डटकर सामना किया जा सके।
नेतृत्व का संदेश: मुख्य संबोधन
डॉ. अनुराग शर्मा (सांसद और अध्यक्ष, AYUSHEXCIL)
अपने विशेष संबोधन में डॉ. अनुराग शर्मा ने पारंपरिक चिकित्सा की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता पर प्रकाश डाला। उन्होंने दृढ़ता से कहा कि भारत आज पूरी दुनिया के लिए समग्र स्वास्थ्य सेवा (Holistic Healthcare) का एक विश्वसनीय वैश्विक केंद्र बनने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यदि हमें वैश्विक स्तर पर अपनी साख मजबूत करनी है, तो सरकार, उद्योग और अनुसंधान संस्थानों को मिलकर काम करना होगा।
‘वैज्ञानिक सत्यापन, गुणवत्ता आश्वासन, नवाचार और वैश्विक ब्रांडिंग को मजबूत करने के लिए त्रिपक्षीय सहयोग अनिवार्य है। AYUSHEXCIL बाजार विकास, क्षमता निर्माण और अंतर्राष्ट्रीय आउटरीच कार्यक्रमों के माध्यम से हमारे निर्यातकों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।’ – डॉ. अनुराग शर्मा
श्री राजेश अग्रवाल (सचिव, वाणिज्य विभाग)
अपने मुख्य भाषण में वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल ने आयुष क्षेत्र को एक उच्च क्षमता वाले ‘सनराइज निर्यात क्षेत्र’ (Sunrise Export Sector) के रूप में मान्यता दी और सरकार के पूर्ण समर्थन को दोहराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि हमारा लक्ष्य केवल निर्यात के आंकड़ों को बढ़ाना नहीं है, बल्कि दुनिया भर में प्रतिस्पर्धी और विश्वसनीय भारतीय आयुष ब्रांडों का निर्माण करना है।
वाणिज्य सचिव ने उद्योग जगत को प्रेरित करते हुए कहा कि भारत के विस्तारित हो रहे मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) के नेटवर्क का पूरा लाभ उठाया जाना चाहिए। उन्होंने नवाचार, ब्रांडिंग, मूल्य संवर्धन (Value Addition) और गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करने की सलाह दी। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि मध्यस्थ, व्यापार सुगमकर्ता और अन्य पारिस्थितिकी तंत्र भागीदार (Ecosystem Partners) भारतीय आयुष उत्पादों को वैश्विक बाजारों से जोड़ने में रीढ़ की हड्डी की तरह हैं। उन्होंने उद्यमियों और निर्यातकों से अपनी सफलता की कहानियों को साझा करने का आग्रह किया ताकि नए लोगों को प्रेरणा मिले।
वैद्य राजेश कोटेचा (सचिव, आयुष मंत्रालय)
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने गुणवत्ता आश्वासन को सर्वोपरि बताया। उन्होंने ‘आयुष मार्क’ (Ayush Mark) और ‘आयुर्वेद आहार’ (Ayurveda Aahar) जैसी प्रमुख पहलों के कार्यान्वयन में तेजी लाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इन कदमों से भारतीय आयुष उत्पादों की ब्रांडिंग और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को अभूतपूर्व मजबूती मिलेगी।
उन्होंने उद्योग जगत के हितधारकों से अपील की कि वे आयुर्वेद और अन्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में बढ़ती वैश्विक रुचि का लाभ उठाएं। इसके लिए उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग और अंतर्राष्ट्रीय बाजार के अनुरूप तैयारी (Market Readiness) को सुधारना होगा। उन्होंने राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मानक-निर्धारण निकायों (Standard-Setting Bodies) के साथ मिलकर भारतीय मानकों को वैश्विक बेंचमार्क के अनुरूप बनाने के चल रहे प्रयासों की भी जानकारी दी।
ओपन-हाउस चर्चा और भविष्य की राह
सत्र के अंतिम चरण में एक इंटरैक्टिव ओपन-हाउस चर्चा (Open-House Discussion) का आयोजन किया गया। इसमें एमएसएमई, स्टार्टअप्स, बड़े निर्माताओं और निर्यातकों ने सीधे अपनी बात रखी। उन्होंने बाजार पहुंच में सुधार, नियामक सरलीकरण, व्यापार करने में आसानी (Ease of Doing Business), नवाचार और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने के लिए अपने व्यावहारिक सुझाव दिए।
इस विचार-मंथन सत्र से निकले निष्कर्ष और सिफारिशें भविष्य की नीतिगत पहलों और निर्यात संवर्धन रणनीतियों के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करेंगी। वाणिज्य विभाग, आयुष मंत्रालय और AYUSHEXCIL मिलकर ‘ब्रांड इंडिया आयुष’ को मजबूत करेंगे और वैश्विक पारंपरिक कल्याण पारिस्थितिकी तंत्र में भारत के नेतृत्व को एक नई ऊंचाई पर ले जाएंगे।



