अब भारत में बनेगी दुनिया की ‘दिमाग’ वाली चिप

सेमीकंडक्टर मिशन को मिलेगी महा-रफ्तार: ₹7,500 करोड़ के निवेश से तैयार साणंद प्लांट से हर साल बनेंगे 5 अरब चिप्, वैश्विक बाजार में मजबूत होगी भारत की धाक।

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अहमदाबाद/साणंद: भारत की तकनीकी और औद्योगिक प्रगति के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शनिवार, 4 जुलाई को गुजरात के अहमदाबाद जिले के साणंद में सीजी सेमी आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली और टेस्ट (ओएसएटी – OSAT) सुविधा का उद्घाटन करेंगे। यह उद्घाटन सिर्फ एक फैक्ट्री की शुरुआत नहीं है, बल्कि भारत को दुनिया का ‘चिप मेकर’ (सेमीकंडक्टर बनाने वाला देश) बनाने की दिशा में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक कदम है।

इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) के तहत मंजूर की गई शुरुआती चार बड़ी परियोजनाओं में से यह पहली ऐसी परियोजना है, जहां अब व्यावसायिक उत्पादन यानी कमर्शियल प्रोडक्शन की औपचारिक शुरुआत होने जा रही है। इसका सीधा मतलब यह है कि अब भारत में बनी चिप्स जल्द ही दुनिया भर के गैजेट्स और गाड़ियों में दौड़ती नजर आएंगी।

क्या है यह साणंद प्लांट और क्यों है इतना खास?

इस प्लांट को करीब 7,500 करोड़ रुपए से अधिक के भारी-भरकम निवेश के साथ तैयार किया गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार, पीएम मोदी राजस्थान के अपने तय कार्यक्रमों को पूरा करने के बाद शाम करीब 4:30 बजे साणंद पहुंचेंगे, जहां वह इस अत्याधुनिक सुविधा का उद्घाटन करेंगे और वहां मौजूद लोगों तथा देश को संबोधित भी करेंगे।

यह प्लांट एक “एंड-टू-एंड असेंबली और टेस्टिंग” सुविधा है। सरल शब्दों में कहें तो, यहाँ कच्चे सेमीकंडक्टर वेफर्स को लाया जाएगा और उन्हें पूरी तरह से काम करने वाली तैयार चिप्स में बदला जाएगा। इस प्लांट में निम्नलिखित उन्नत तकनीकी काम किए जाएंगे:

  • वेफर सॉर्टिंग (Wafer Sorting): सिलिकॉन की परतों की जांच करना।
  • असेंबली (Assembly): चिप के छोटे-छोटे पुर्जों को एक साथ जोड़ना।
  • पैकेज डिजाइन और टेस्टिंग (Package Design & Testing): चिप को सुरक्षित कवर देना और उसकी कार्यक्षमता को जांचना।
  • फेल्योर एनालिसिस (Failure Analysis): किसी भी खराबी का पता लगाना ताकि चिप हमेशा परफेक्ट रहे।

हर साल 5 अरब चिप्स बनाने की ताकत

जब यह प्लांट अपनी पूरी क्षमता (Full Capacity) के साथ काम करना शुरू कर देगा, तब यहाँ से हर साल 5 अरब (5 बिलियन) सेमीकंडक्टर चिप्स का उत्पादन किया जा सकेगा। यह संख्या इतनी बड़ी है कि इससे भारत की विदेशी निर्भरता बहुत हद तक कम हो जाएगी।

यह प्लांट किन-किन क्षेत्रों की जरूरतें पूरी करेगा?

  1. ऑटोमोबाइल (गाड़ियाँ): आजकल की कारों और टू-व्हीलर्स में लगने वाले स्मार्ट फीचर्स के लिए।
  2. दूरसंचार और 5G (Telecom & 5G): मोबाइल नेटवर्क को तेज और निर्बाध बनाने के लिए।
  3. इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT): स्मार्ट होम डिवाइसेस (जैसे स्मार्ट टीवी, एसी, फ्रिज) के लिए।
  4. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): एआई और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग में डेटा को प्रोसेस और स्टोर करने के लिए।

इतिहास बनाम वर्तमान: सेमीकंडक्टर की दुनिया में भारत की यात्रा

सेमीकंडक्टर के महत्व को समझने के लिए हमें इसके इतिहास और वर्तमान रुझानों (Current Trends) का एक तुलनात्मक विश्लेषण (Comparative Analysis) देखना होगा:

पैमानाइतिहास (बीते कुछ दशक)वर्तमान रुझान (2026 और भविष्य)
निर्भरताभारत चिप्स की डिजाइनिंग तो करता था, लेकिन मैन्युफैक्चरिंग (निर्माण) और टेस्टिंग के लिए 100% ताइवान, चीन और अमेरिका जैसे देशों पर निर्भर था।भारत अब खुद की ओएसएटी (OSAT) और फैब (FAB) यूनिट्स लगा रहा है, जिससे आत्मनिर्भरता बढ़ रही है।
वैश्विक स्थितिवैश्विक सेमीकंडक्टर वैल्यू चैन (Supply Chain) में भारत की भूमिका सिर्फ एक खरीदार या इंजीनियर सप्लाई करने वाले देश की थी।साणंद जैसे प्लांट के उद्घाटन के बाद भारत अब ग्लोबल वैल्यू चैन में एक प्रमुख ‘उत्पादक’ (Producer) के रूप में स्थापित हो रहा है।
बाजार की मांगपहले चिप्स की जरूरत सिर्फ कंप्यूटर या गिने-चुने इलेक्ट्रॉनिक सामानों में होती थी।आज एआई (AI), 5G, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EVs) और आईओटी (IoT) के आने से चिप्स की मांग में हजार गुना से ज्यादा की बढ़ोतरी हो चुकी है।

आम जनता के लिए इसका क्या मतलब है?

शायद आप सोच रहे होंगे कि एक चिप प्लांट खुलने से आम इंसान की जिंदगी पर क्या असर पड़ेगा? इसे तीन आसान बिंदुओं में समझिए:

  1. सस्ते हो सकते हैं इलेक्ट्रॉनिक सामान: जब भारत में ही चिप्स का बड़े पैमाने पर उत्पादन होगा, तो मोबाइल, कार, लैपटॉप और वाशिंग मशीन जैसी चीजों की निर्माण लागत कम होगी, जिससे आने वाले समय में ये चीजें सस्ती हो सकती हैं।
  2. रोजगार के नए अवसर: ₹7,500 करोड़ के इस प्रोजेक्ट से साणंद और पूरे गुजरात में हजारों कुशल इंजीनियरों, तकनीशियनों और लॉजिस्टिक्स से जुड़े लोगों को सीधे और परोक्ष रूप से नौकरियां मिलेंगी।
  3. वैश्विक संकटों से सुरक्षा: कोरोना काल में जब ताइवान से चिप्स आना बंद हो गई थीं, तो भारत में कारों की डिलीवरी के लिए साल-साल भर का वेटिंग पीरियड आ गया था। घरेलू उत्पादन होने से देश ऐसे संकटों से हमेशा के लिए सुरक्षित हो जाएगा।

पीएम मोदी का व्यस्त दौरा

गुजरात पहुंचने से पहले प्रधानमंत्री मोदी राजस्थान में भी विकास की बड़ी सौगातें देंगे। वह जोधपुर एयरपोर्ट के नए टर्मिनल भवन का उद्घाटन करेंगे और संशोधित उड़ान योजना की शुरुआत करेंगे। इसके अलावा, वह बालोतरा में करीब 1.06 लाख करोड़ रुपए की विभिन्न विशाल विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, लोकार्पण और शिलान्यास भी करेंगे, जो देश के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा।

Basant Kumar

kumarbasantjha87@gmail.com

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