तमिल सुपरस्टार थलपति विजय की बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘जन नायगन’ (Jana Nayagan) की रिलीज को लेकर चल रहा विवाद अब अपने निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। मद्रास उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने फिल्म के सेंसर प्रमाणपत्र से जुड़ी याचिका पर मंगलवार को लंबी सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। विजय की राजनीति में सक्रिय होने से पहले की यह आखिरी फिल्म वर्तमान में कानूनी और तकनीकी पचड़ों में बुरी तरह फंसी नजर आ रही है।

अमेजन का दबाव और प्रोड्यूसर्स की बेबसी
सुनवाई के दौरान केवीएन प्रोडक्शंस के वकील सतीश परासरन ने एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि फिल्म के डिजिटल राइट्स खरीदने वाले अमेजन (Amazon) ने 31 दिसंबर को निर्माताओं को कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी थी। अमेजन का कहना है कि यदि रिलीज की तारीख पर जल्द स्पष्टता नहीं मिली, तो वे उन पर मुकदमा करेंगे। निर्माताओं ने तर्क दिया कि सेंसर बोर्ड (CBFC) की चुप्पी और संवाद की कमी के कारण उन्हें मजबूरन अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा।
सेंसर बोर्ड के अपने तर्क
CBFC की ओर से पेश हुए एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एआरएल सुंदरेशन ने फिल्म के ₹500 करोड़ के निवेश के दावों पर सवाल उठाए। बोर्ड ने दलील दी कि:
- सर्टिफिकेट मिलने से पहले ही 9 जनवरी की रिलीज डेट घोषित करना नियमों के खिलाफ था।
- यदि कानूनी मामला बीच में न आता, तो रिवाइज़िंग कमेटी 26 जनवरी तक अपना निर्णय दे देती।
- बोर्ड ने निर्माताओं द्वारा मामले में दिखाई गई ‘अत्यधिक जल्दबाजी’ पर भी आपत्ति जताई।
मुख्य न्यायाधीश की कड़ी टिप्पणी
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने निर्माताओं को टोकते हुए कहा कि इस मामले में दिखाई गई ‘अर्जेंसी’ एक गलत मिसाल (Precedent) कायम कर सकती है। कोर्ट ने इस बात पर भी हैरानी जताई कि सेंसर बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी द्वारा जारी किया गया आधिकारिक पत्र अब तक अदालत के समक्ष पेश क्यों नहीं किया गया है।
विजय के राजनीतिक करियर के लिए अहम है फिल्म
‘जन नायगन’ को लेकर दर्शकों में जबरदस्त क्रेज है क्योंकि इसके बाद विजय अपनी पार्टी ‘तमिलगा वेट्टरी कझगम’ के साथ तमिलनाडु विधानसभा चुनावों में उतरने की तैयारी कर रहे हैं। अब सबकी निगाहें मद्रास हाईकोर्ट के आने वाले फैसले पर टिकी हैं, जो यह तय करेगा कि फिल्म समय पर पर्दे पर आएगी या नहीं।



