नई दिल्ली। आवारा कुत्तों के बढ़ते हमलों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को बेहद सख्त रुख अपनाया। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि किसी आवारा कुत्ते के हमले में किसी व्यक्ति को गंभीर चोट आती है या उसकी मौत होती है तो केवल नगर निकाय ही नहीं, बल्कि डॉग फीडर्स की जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है। कोर्ट ने चेतावनी दी कि इस मामले में जिम्मेदारी तय करने से वह पीछे नहीं हटेगा।
हल्के में मत लेना
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि पिछली सुनवाई के दौरान की गई टिप्पणियों को हल्के में लेना या मजाक समझना गलत होगा। अदालत ने कहा कि मौजूदा व्यवस्था में स्थानीय प्रशासन की गंभीर विफलता सामने आई है और इसी कारण आवारा कुत्तों से जुड़े मामले लगातार बढ़ रहे हैं। कोर्ट ने साफ किया कि वह जवाबदेही तय करने में किसी तरह की नरमी नहीं बरतेगा।
निजी पक्षों की दलीलें पूरी करने की मंशा
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि वह निजी पक्षों और गैर-सरकारी संगठनों की दलीलें पूरी कर इस चरण की सुनवाई समाप्त करना चाहती है। इसके बाद राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपना पक्ष रखने के लिए एक दिन का समय दिया जाएगा, ताकि वे इस समस्या के समाधान को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकें।
28 जनवरी को अगली अहम सुनवाई
व्यक्तियों और गैर-सरकारी संगठनों की ओर से दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने निर्देश दिया कि मामले को 28 जनवरी को दोपहर 2 बजे सूचीबद्ध किया जाए। उस दिन अदालत एमिकस क्यूरी, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के वकील तथा सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की दलीलें सुनेगी।



