नई दिल्ली: ऑस्कर विजेता संगीतकार ए.आर. रहमान पिछले कुछ दिनों से अपने एक बयान को लेकर चर्चा में थे, जिसमें उन्होंने बॉलीवुड में काम मिलने के पीछे ‘सांप्रदायिक’ (Communal) कोण होने की बात कही थी। रविवार को रहमान ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट कर इस विवाद पर अपनी ईमानदारी पेश की और कहा कि उनके शब्दों का गलत अर्थ निकाला गया।
भारत मेरी प्रेरणा और मेरा घर है
59 वर्षीय संगीतकार ने अपने वीडियो में भारत की बहुसांस्कृतिक विरासत के प्रति अपना प्रेम व्यक्त किया। उन्होंने कहा:
“संगीत हमेशा से भारत की संस्कृति को जोड़ने और उसका सम्मान करने का जरिया रहा है। भारत मेरी प्रेरणा, मेरा शिक्षक और मेरा घर है। मैं समझता हूं कि कभी-कभी इरादों को गलत समझा जा सकता है। लेकिन मेरा उद्देश्य हमेशा संगीत के माध्यम से सेवा करना रहा है। मेरी मंशा कभी किसी को पीड़ा पहुँचाने की नहीं थी, और मुझे उम्मीद है कि लोग मेरी ईमानदारी को महसूस करेंगे।”
क्या था पूरा विवाद?
यह विवाद तब शुरू हुआ जब ‘बीबीसी एशियन नेटवर्क’ को दिए एक इंटरव्यू में रहमान से पूछा गया कि पिछले कुछ वर्षों में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में उनके पास काम कम क्यों आ रहा है। इसके जवाब में रहमान ने कहा था कि इंडस्ट्री के भीतर सत्ता परिवर्तन हुआ है और अब फैसले वे लोग लेते हैं जो रचनात्मक नहीं हैं। उन्होंने कहा था, “हो सकता है कि यह सांप्रदायिक मामला भी हो, लेकिन मेरे सामने नहीं। मुझे दूसरों से सुनने को मिलता है कि उन्होंने आपको बुक किया था, लेकिन म्यूजिक कंपनी ने अपने पांच संगीतकारों को रख लिया।”
विविधता का जश्न मनाते रहमान
अपनी सफाई देते हुए रहमान ने उन प्रोजेक्ट्स का जिक्र किया जो भारत की विविधता को दर्शाते हैं। उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री के सामने पेश किए गए ‘झाला’ (Jhalaa) और ‘रूह-ए-नूर’ से लेकर नगा संगीतकारों के साथ सहयोग और हंस जिमर के साथ ‘रामायण’ के संगीत तक का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक भारतीय होने के नाते वह खुद को भाग्यशाली मानते हैं जहाँ उन्हें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता मिलती है।



