वोटर लिस्ट में ‘खेला’: दरभंगा में मिले 655 डुप्लीकेट वोटर

दरभंगा विधानसभा सीट पर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भाजपा ने मतदाता सूची में 655 डुप्लीकेट वोटरों की मौजूदगी का दावा किया है, जिसके बाद चुनाव आयोग ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है।

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दरभंगा: बिहार में चल रहे मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बीच दरभंगा विधानसभा क्षेत्र में 655 डुप्लीकेट वोटरों का मामला सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बूथ लेवल एजेंट (बीएलए) लक्ष्मण कुमार ने इस संबंध में चुनाव आयोग से शिकायत की है। हालांकि, आयोग ने कहा है कि फिलहाल इस मामले की विस्तृत जांच की जा रही है, और अगर कोई गड़बड़ी पाई गई तो कार्रवाई की जाएगी।

क्या है पूरा मामला

भाजपा के बीएलए लक्ष्मण कुमार ने दावा किया है कि उन्हें दरभंगा विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में बड़ी संख्या में ऐसे नाम मिले हैं जो एक से ज्यादा जगहों पर दर्ज हैं। उन्होंने ऐसे 655 मतदाताओं की एक सूची जिला निर्वाचन पदाधिकारी को सौंपी है। लक्ष्मण कुमार ने मीडिया से बातचीत में यह भी दावा किया कि इन डुप्लीकेट वोटरों में से अधिकांश अल्पसंख्यक समुदाय से हैं।

चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया

इस शिकायत के बाद, चुनाव आयोग ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। दरभंगा के डीएम और जिला निर्वाचन पदाधिकारी कौशल कुमार ने एक बयान जारी कर कहा कि लक्ष्मण कुमार द्वारा दी गई आपत्ति निर्धारित प्रारूप ‘प्रारूप-7’ (Form-7) में नहीं थी। इसलिए इसे एक सामान्य शिकायत मानते हुए इस पर संज्ञान लिया गया है। आयोग के अनुसार, निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी ने अपनी शुरुआती जांच में पाया है कि बीएलए द्वारा दी गई सूची के क्रमांक 1 अगस्त, 2025 को जारी एसआईआर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में सही नहीं पाए गए हैं। हालांकि, आयोग ने यह भी साफ किया है कि इस मामले की विस्तृत जांच जारी है। अगर जांच में किसी भी मतदाता की दोहरी प्रविष्टि (डबल एंट्री) मिलती है, तो नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

दरभंगा सीट का सियासी महत्व

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि दरभंगा विधानसभा सीट को भाजपा का गढ़ माना जाता है। इस सीट से भाजपा नेता और नीतीश सरकार में मंत्री संजय सरावगी विधायक हैं, जो लगातार चार बार चुनाव जीत चुके हैं। हालांकि, उन्हें पिछले कुछ चुनावों में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा है। इस सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की संख्या भी अच्छी खासी है, जो इसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील बनाती है।

मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण (SIR)

  • चुनाव आयोग का अभियान: यह घटना तब हुई जब भारत निर्वाचन आयोग देश भर में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) का काम कर रहा है। इस अभियान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता।
  • सूची सही और त्रुटि-रहित हो। दावा-आपत्ति का मौका: इस प्रक्रिया के तहत, नागरिकों और राजनीतिक दलों को वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने, हटाने या सुधार करने का मौका दिया जाता है। भाजपा के बीएलए (बूथ लेवल एजेंट) ने इसी प्रक्रिया का लाभ उठाते हुए डुप्लीकेट वोटरों पर आपत्ति जताई है।

कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया

  • प्रक्रिया में कमी: चुनाव आयोग ने तुरंत इस पर स्पष्टीकरण दिया कि शिकायत निर्धारित फॉर्मेट (प्रारूप-7) में नहीं थी। यह दिखाता है कि इस तरह की शिकायतों को निपटाने के लिए एक तय प्रक्रिया होती है, जिसका पालन करना जरूरी है।
  • पारदर्शिता बनाए रखना: आयोग ने कहा है कि वह जांच करेगा और अगर गड़बड़ी मिली तो कार्रवाई की जाएगी। यह पारदर्शिता बनाए रखने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है ताकि किसी भी राजनीतिक दल को यह आरोप लगाने का मौका न मिले कि आयोग निष्पक्ष नहीं है।

Sakshi Pal

sakshipal8700@gmail.com

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