नई दिल्ली: पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर की Nuclear Threat पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नेता राम माधव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने साफ कहा है कि कोई भी देश भारत को ऐसी धमकियों से डरा नहीं सकता, क्योंकि भारत इसका माकूल जवाब देने में पूरी तरह से सक्षम है। इसके अलावा, राम माधव ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख पर भी बात की। उन्होंने कहा कि भारत को ट्रंप के प्रति भावुक होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि वे एक लेन-देन वाले व्यक्ति हैं और उनका एकमात्र लक्ष्य अमेरिका की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
परमाणु ब्लैकमेल से भारत नहीं डरेगा
हाल ही में, पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने अमेरिका दौरे के दौरान परमाणु हमले की धमकी दी थी, जिस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने भी कड़ा विरोध जताया था। एएनआई से बात करते हुए राम माधव ने मुनीर की धमकी को ‘परमाणु ब्लैकमेल’ करार दिया। उन्होंने कहा, “मुनीर की इस धमकी से कोई भी डरने वाला नहीं है। हमारे प्रधानमंत्री ने भी इसका उचित जवाब दिया है। भारत को परमाणु ब्लैकमेल से डराया नहीं जा सकता। और अगर ऐसी स्थिति आती है, तो भारत को पता है कि इसका क्या जवाब देना है।”
डोनाल्ड ट्रंप पर भारत को भावुक होने की जरूरत नहीं
जब राम माधव से पूछा गया कि क्या अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पाकिस्तान को ऐसी धमकियों के लिए अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन दे रहे हैं, तो उन्होंने कहा कि भारत को ट्रंप के प्रति भावुक होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा, “ट्रंप उतने सीधे-सादे नेता नहीं हैं जितना हम सोचते थे। हमें उनके साथ संबंधों को उनके अपने हिसाब से ही समझना और सुलझाना होगा। वे एक लेन-देन वाले व्यक्ति हैं और उनका एकमात्र लक्ष्य अमेरिका की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना है।”
माधव ने आगे कहा कि ट्रंप का मानना है कि वे ‘बुरे लोगों’ के साथ काम करके उन्हें सुधार सकते हैं, जैसा कि उन्होंने उत्तर कोरिया के तानाशाह के साथ किया। उन्होंने कहा कि भारत को ट्रंप के इस रवैये को समझना चाहिए और उनके बयानों को भावनात्मक रूप से नहीं लेना चाहिए।
ट्रंप का लक्ष्य अमेरिका की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना
राम माधव ने इस बात पर जोर दिया कि ट्रंप जो भी कदम उठाते हैं, चाहे वह टैरिफ को लेकर हो या अन्य नीतियों को लेकर, उनका अंतिम लक्ष्य अमेरिका की अर्थव्यवस्था को मजबूत करना होता है। उन्होंने कहा कि ट्रंप एक बड़े लेन-देन वाले व्यक्ति हैं और उनके मन में जो बात होती है, वह साफ होती है। भारत को उनके इस व्यवहार को समझना होगा और उसी के अनुसार अपनी रणनीति बनानी होगी। आइए जानते हैं इससे पहले का मामला क्या है।
पाकिस्तान की परमाणु धमकी
पाकिस्तान लंबे समय से भारत के साथ अपने संबंधों में तनाव के दौरान परमाणु हथियारों की धमकी देता रहा है। आसिम मुनीर ने अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान कुछ इसी तरह की धमकी दी थी, जिसका उद्देश्य भारत को किसी भी सैन्य कार्रवाई से रोकना और अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करना था। पाकिस्तान अपनी पारंपरिक सैन्य क्षमता में भारत से काफी पीछे है, इसलिए वह अक्सर परमाणु धमकी को एक तरह के “ब्लैकमेल” के रूप में इस्तेमाल करता है ताकि भारत उस पर दबाव न बना सके।
भारत का कड़ा जवाब
भारत का विदेश मंत्रालय पहले ही पाकिस्तान की इस धमकी का कड़ा विरोध कर चुका था और चेतावनी दी थी कि इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। आरएसएस नेता राम माधव का बयान उसी कड़ी में एक और प्रतिक्रिया है, जो दिखाता है कि भारत ऐसी धमकियों से डरने वाला नहीं है। यह बयान पाकिस्तान को स्पष्ट संदेश देता है कि भारत ऐसी धमकियों को गंभीरता से नहीं लेता और जरूरत पड़ने पर माकूल जवाब देने में सक्षम है।
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अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप का संदर्भ
डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान अमेरिका की विदेश नीति में कई बदलाव आए थे। ट्रंप ने पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर एक अलग रुख अपनाया था। जब राम माधव से ट्रंप के रुख के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को ट्रंप के व्यवहार को लेकर भावुक नहीं होना चाहिए। माधव ने यह भी समझाया कि ट्रंप एक “लेन-देन वाले” नेता हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य अमेरिका के आर्थिक हितों को बढ़ाना है। इसलिए, भारत को उनके बयानों को केवल इसी संदर्भ में देखना चाहिए, न कि भावनात्मक रूप से। यह संदर्भ यह भी बताता है कि पाकिस्तान अमेरिका में अपनी पैठ बनाने की कोशिश कर रहा है, और इस धमकी का एक मकसद अमेरिका का ध्यान खींचना भी हो सकता है।



