नई दिल्ली: अब स्कूली छात्र यह जानेंगे कि कैसे किसानों की एकजुटता और मिलकर काम करने की भावना ने देश में ‘अमूल’ जैसी एक बड़ी दूध कंपनी को स्थापित किया और उसे भारत की पहचान बनाया। शिक्षा मंत्रालय के तहत काम कर रहे राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) और सहकारिता मंत्रालय ने मिलकर एक नया मॉड्यूल तैयार किया है, जिसके तहत बिहार सहित देशभर के स्कूलों में 9वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों को सहकारिता आंदोलन के बारे में पढ़ाया जाएगा।
इस पहल का उद्देश्य छात्रों को यह समझाना है कि कैसे मिल-जुलकर काम करने से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं। इस विशेष मॉड्यूल के माध्यम से, छात्रों को भारत के सफल सहकारिता आंदोलनों और उनके पीछे के प्रमुख चेहरों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
क्या पढ़ाया जाएगा इस मॉड्यूल में
इस मॉड्यूल में छात्रों को सहकारिता से जुड़ी कई अहम बातें पढ़ाई जाएंगी।
1. को-ऑपरेटिव बैंक
किसानों और छोटे व्यवसायियों की मदद के लिए काम करने वाले सहकारी बैंकों के बारे में जानकारी दी जाएगी।
2. मत्स्य पालन को-ऑपरेटिव
यह सिखाया जाएगा कि कैसे मछुआरे मिलकर काम करके कम लागत में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।
3. उपज बेचना
किसानों को अपनी उपज मिलकर बेचने से होने वाले आर्थिक फायदों के बारे में बताया जाएगा।
इस पाठ्यक्रम का मुख्य लक्ष्य छात्रों को यह सिखाना है कि कैसे एकजुटता से न केवल व्यक्तिगत आर्थिक स्थिति सुधारी जा सकती है, बल्कि व्यवसाय को भी नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।
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इन महान नायकों से प्रेरित होंगे छात्र
इस मॉड्यूल में उन महान हस्तियों के बारे में भी पढ़ाया जाएगा, जिन्होंने भारत में सहकारिता आंदोलन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन प्रमुख चेहरों में शामिल हैं।
त्रिभुवनदास पटेल: इन्हें डेयरी उद्योग में भारत के सहकारिता आंदोलन का जनक माना जाता है। उन्होंने ही अमूल की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
डॉ. वर्गीज कुरियन: ‘श्वेत क्रांति के जनक’ के रूप में प्रसिद्ध डॉ. कुरियन ने अमूल को एक छोटे संगठन से विशाल डेयरी ब्रांड बनाने में अहम भूमिका निभाई, जिसने भारत को दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश बनाया।
इसके अलावा, छात्र राव बहादुर श्रीपाद सुब्रमण्यम तलमाकी, महात्मा गांधी, सरदार वल्लभ भाई पटेल और विट्ठलराव विखे पाटिल जैसे अन्य प्रमुख चेहरों के बारे में भी जानेंगे, जिन्होंने अलग-अलग क्षेत्रों में सहकारिता को बढ़ावा दिया।
इस पहल को देशभर के स्कूलों में लागू करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि आने वाली पीढ़ी सहकारिता के महत्व को समझ सके और मिलकर काम करने की भावना से प्रेरित हो सके।



