नई दिल्ली: केंद्र सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (DBT) और उसकी संस्था BIRAC ने महामारी तैयारी नवाचार गठबंधन (CEPI) के साथ वैक्सीन व संबंधित तकनीकों के लिए नई ‘सहभागिता रणनीति’ पर 18 सितंबर 2025 को हस्ताक्षर किए। यह 2019 वाली पुरानी रणनीति का नवीनीकरण है।
पुरानी साझेदारी की बड़ी सफलताएं 2019 से चले इस सहयोग में भारत ने चिकनगुनिया, कोरोना और मंकीपॉक्स जैसे खतरनाक वायरस के लिए शुरुआती वैक्सीन तैयार किए। फरीदाबाद में DBT-BRICK-THSTI बायोसे लैब और पशु प्रयोगशाला बनी, जिन्हें CEPI ने अपने वैश्विक नेटवर्क में शामिल किया। ये लैब अब भारतीय और विदेशी वैक्सीन के प्री-क्लीनिकल से लेकर फेज-3 ट्रायल तक का काम कर रही हैं। कई वैज्ञानिकों-शोधकर्ताओं को विशेष प्रशिक्षण भी दिया गया।नई रणनीति में क्या अलग है?नई सहभागिता में अब सिर्फ वैक्सीन ही नहीं, मोनोक्लोनल एंटीबॉडी जैसी दूसरी तकनीकें भी शामिल होंगी। जिन बीमारियों पर काम होगा, उनमें WHO की प्राथमिकता वाली ‘ब्लूप्रिंट सूची’ के सारे खतरनाक वायरस शामिल हैं। इसका मकसद है कि अगली महामारी आने से पहले ही भारत के पास वैक्सीन और इलाज तैयार हो।भारत के लिए क्यों जरूरी है यह कदमकोरोना के बाद दुनिया समझ गई है कि महामारी कभी भी आ सकती है। CEPI के पास पैसा, तकनीकी ज्ञान और वैश्विक नेटवर्क है, जबकि भारत के पास बड़े स्तर पर वैक्सीन बनाने की क्षमता और कुशल वैज्ञानिक हैं। दोनों की ताकत मिलाकर भारत अब सिर्फ वैक्सीन आयात करने वाला देश नहीं, बल्कि वैक्सीन बनाने और दुनिया को देने वाला मजबूत केंद्र बनेगा।आगे की राहइस नई रणनीति से देश में नई लैब, ज्यादा प्रशिक्षित वैज्ञानिक और तेज रिसर्च की उम्मीद है। सरकार का लक्ष्य है कि अगली महामारी आए तो भारत 100 दिन के अंदर वैक्सीन या इलाज तैयार कर सके। यह कदम न सिर्फ भारत की स्वास्थ्य सुरक्षा बढ़ाएगा, बल्कि ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत’ के सपने को भी मजबूती देगा।



