पटना: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को बिहार में युवाओं के कौशल विकास को नई दिशा देने के उद्देश्य से राज्य के पहले कौशल विश्वविद्यालय जननायक कर्पूरी ठाकुर कौशल विश्वविद्यालय की स्थापना का ऐलान किया। इसके लिए सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं और इसके लिए बिहार सरकार ने अधिसूचना पहले ही जारी कर दी है। राज्य सरकार ने संसाधन विभाग, बिहार के सचिव दीपक आनंद को विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया गया है, जबकि श्रमायुक्त राजेश भारती को रजिस्ट्रार की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
फिलहाल दशरथ मांझी श्रम एवं नियोजन अध्ययन संस्थान से होगा संचालन
अधिनियम- 2025 की धारा-11 के प्रावधानों के तहत श्रम संसाधन विभाग के सचिव दीपक आनंद को इस विश्वविद्यालय का पहला कुलपति नियुक्त किया गया है। वहीं, राज्य के श्रम आयुक्त राजेश भारती को जननायक कर्पूरी ठाकुर कौशल विश्वविद्यालय का का रजिस्ट्रार नियुक्त करने की अधिसूचना भी पहले ही जारी कर दी गई है। प्रारंभिक स्तर पर इसका संचालन दशरथ मांझी श्रम एवं नियोजन अध्ययन संस्थान से किया जाएगा।
बिहार विधानमंडल ने सर्वसम्मति से “जननायक कर्पूरी ठाकुर कौशल विश्वविद्यालय विधेयक-2025” को स्वीकृति दी गई थी। यह विश्वविद्यालय राज्य में चल रहे सात निश्चय पार्ट-1 और पार्ट-2 के कौशल विकास कार्यक्रमों का विस्तार करते हुए युवाओं को बेहतर अवसर प्रदान करेगा। बदलते वैश्विक बाजार और तेजी से बदलते रोजगार क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए, अब उन्नत और प्रासंगिक पाठ्यक्रमों की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। जिसके लिए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में श्रम संसाधन विभाग के द्वारा इस विवि की स्थापना की गई है।
यह विश्वविद्यालय उद्यमशीलता, व्यावसायिक शिक्षा को देगा बढ़ावा
यह विश्वविद्यालय युवाओं को न केवल कौशल प्रशिक्षण प्रदान करेगा, बल्कि उद्यमशीलता, व्यावसायिक शिक्षा, शोध और नवाचार से जुड़े कार्यक्रमों को भी बढ़ावा देगा। साथ ही, पूरे राज्य में कौशल विकास से जुड़े संस्थानों को संबद्धता भी इस विश्वविद्यालय द्वारा प्रदान की जाएगी। राज्य सरकार का मानना है कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना से बिहार के युवाओं की रोजगार क्षमता में वृद्धि होगी और वैश्विक बाजार की जरूरतों के अनुरूप प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार किया जा सकेगा।



