नई दिल्ली। राष्ट्रपति पुतिन ने राजघाट में महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इससे पहले पुतिन का राष्ट्रपति भवन में भव्य स्वागत किया गया। पुतिन को 21 तोपों की सलामी दी गई और उसके बाद उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन फोरकोर्ट में उनका स्वागत किया। पुतिन के साथ उनकी सरकार के 7 मंत्रियों का उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है।
दो दिवसीय राजकीय दौरे पर भारत आए रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का राष्ट्रपति भवन में 21 तोपों की सलामी के साथ किया गया भव्य स्वागत#Druzhbadosti #RussiaIndia🇮🇳🇷🇺 #PutinInIndia @narendramodi @RusEmbIndia @MEAIndia pic.twitter.com/yhxMU9N4LX
— डीडी न्यूज़ (@DDNewsHindi) December 5, 2025
राजघाट पहुंचकर करेंगे महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि
औपचारिक स्वागत समारोह के बाद पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी कुछ ही देर में राजघाट पहुंचेंगे, जहां वे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगे। राजघाट के बाद पुतिन का काफिला सीधे हैदराबाद हाउस के लिए रवाना होगा, जहां भारत-रूस शिखर सम्मेलन आयोजित होगा।
मोदी-पुतिन की आज दो महत्वपूर्ण बैठकें
दिन भर के कार्यक्रमों में मोदी और पुतिन की दो अहम बैठकें तय हैं। इनमें से एक बैठक बंद कमरे में होगी, जिसमें रणनीतिक, सुरक्षा और ऊर्जा संबंधी मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। द्विपक्षीय वार्ता के दौरान भारत और रूस के बीच 25 से अधिक समझौतों पर हस्ताक्षर हो सकते हैं। इनमें रक्षा सहयोग, व्यापार बढ़ोतरी, ऊर्जा, परमाणु तकनीक, अंतरिक्ष अनुसंधान और शिक्षा-सांस्कृतिक आदान-प्रदान से जुड़े समझौते शामिल हो सकते हैं।
राष्ट्रपति भवन में बना ऐतिहासिक क्षण
सुबह पुतिन जब राष्ट्रपति भवन के प्रांगण में पहुंचे तो वहां पूरा माहौल राजकीय सम्मान से गूंज उठा। पहले 21 तोपों की सलामी दी गई, फिर तीनों सेनाओं के दस्तों ने उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया। राष्ट्रपति भवन परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए। पुतिन का काफिला सुबह निर्धारित समय के अनुसार पहुंचा और पूरा मार्ग पहले से ‘रूट क्लियर’ कर दिया गया था। 21 तोपों की सलामी के दौरान भारतीय सेना की आर्टिलरी यूनिट ने पारंपरिक सम्मान देते हुए रूस-भारत की मित्रता का मजबूत संदेश दिया।
आज भारत-रूस संबंधों को मिल सकती है नई दिशा
पुतिन का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब वैश्विक भू-राजनीति में तेज़ बदलाव दिखाई दे रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा भारत-रूस संबंधों को नई गति और नई दिशा दे सकती है। रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और तकनीकी सहयोग को और मजबूत बनाने के लिए दोनों पक्ष कई बड़े कदम उठा सकते हैं। उम्मीद है कि यह शिखर बैठक दोनों देशों की दीर्घकालिक साझेदारी में नया मील का पत्थर साबित होगी।



