ब्रह्मांड के रहस्यमय ‘फास्ट एक्स-रे ट्रांजिएंट्स’: क्या हमने छिपे हुए विस्फोटों का सुराग ढूंढ लिया है?

भारतीय खगोलविदों की एक नई खोज ने ब्रह्मांड में होने वाले अचानक और रहस्यमय एक्स-रे विस्फोटों—'फास्ट एक्स-रे ट्रांजिएंट्स' (FXTs)—के पीछे के कारणों पर से पर्दा उठाया है।

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हनले, लद्दाख / बेंगलुरु: ब्रह्मांड एक ऐसी प्रयोगशाला है जहाँ हर पल कुछ न कुछ अद्भुत घटित होता रहता है। लेकिन कभी-कभी, आसमान में अचानक ऐसी घटनाएँ होती हैं जो वैज्ञानिकों को भी हैरान कर देती हैं। ऐसी ही एक पहेली है ‘फास्ट एक्स-रे ट्रांजिएंट्स’ (FXTs)। ये अंतरिक्ष में होने वाले एक्स-रे के ऐसे अचानक और शक्तिशाली झटके हैं, जो बिना किसी चेतावनी के आते हैं और कुछ ही मिनटों या घंटों में गायब हो जाते हैं।

हाल ही में, भारतीय खगोल विज्ञान संस्थान (IIA) के वैज्ञानिकों, दीपक इप्पाचेन और अरविंद बालासुब्रमण्यन के नेतृत्व में एक अंतरराष्ट्रीय टीम ने 7 नवंबर, 2024 को दर्ज किए गए एक विशेष FXT, जिसे ‘EP241107a’ नाम दिया गया है, का गहन अध्ययन किया है। इस अध्ययन ने यह समझने में मदद की है कि ये रहस्यमय विस्फोट आखिर पैदा कहाँ से होते हैं।

FXTs क्या हैं और ये इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं?

FXTs की खोज लगभग एक दशक पहले हुई थी। ये ‘ट्रांजिएंट’ स्रोत होते हैं, जिसका अर्थ है कि वे स्थायी नहीं होते। ये एक बार चमकते हैं और फिर लुप्त हो जाते हैं। इनकी संक्षिप्त अवधि के कारण इन्हें पकड़ना और इनका विस्तृत अध्ययन करना बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि ये घटनाएँ ब्रह्मांड में होने वाली अत्यधिक हिंसक प्रक्रियाओं का परिणाम हैं। अब तक के सिद्धांतों के अनुसार, इनके संभावित कारणों में शामिल हैं:

  • सुपरनोवा शॉक ब्रेकआउट: जब एक विशाल तारा अपने जीवन के अंत में फटता है।
  • न्यूट्रॉन स्टार विलय: दो न्यूट्रॉन तारों का आपस में टकराना।
  • टाइडल डिसरप्शन इवेंट्स: जब कोई सफेद बौना तारा किसी विशाल ब्लैक होल के बहुत करीब आ जाता है।

EP241107a: एक अनसुलझी पहेली का समाधान

चीनी अंतरिक्ष मिशन ‘आइंस्टीन प्रोब’ (Einstein Probe) द्वारा खोजा गया EP241107a, खगोलविदों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हुआ। इस घटना को समझने के लिए भारतीय वैज्ञानिकों ने ‘मल्टी-वेवलेंथ’ दृष्टिकोण अपनाया। इसका मतलब है कि उन्होंने इसे न केवल एक्स-रे में, बल्कि रेडियो तरंगों और दृश्य प्रकाश (visible light) में भी देखने की कोशिश की।

इस अध्ययन के लिए भारत की कई शक्तिशाली दूरबीनों का उपयोग किया गया:

  1. हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप (HCT), हनले: लद्दाख की निर्मल और ऊंची चोटियों पर स्थित इस दूरबीन ने दृश्य प्रकाश में इस घटना को मॉनिटर किया।
  2. GROWTH इंडिया टेलीस्कोप (GIT): IIA और IIT बॉम्बे द्वारा संचालित यह दूरबीन भी इस खोज में शामिल रही।
  3. अपग्रेडेड जाइंट मीटरवेव रेडियो टेलीस्कोप (uGMRT): इसने घटना के रेडियो संकेतों को पकड़ने में मदद की।

इसके अतिरिक्त, अमेरिका स्थित कार्ल जी. जान्स्की वेरी लार्ज एरे (VLA) और हवाई की 10-मीटर केक वेधशाला जैसी वैश्विक सुविधाओं ने भी इसमें सहयोग दिया।

एक विशाल विस्फोट के प्रमाण

अध्ययन से पता चला कि यह एक्स-रे फ्लैश एक ‘गामा-रे बर्स्ट’ (GRB) जैसा था, लेकिन यह सामान्य GRB से थोड़ा अलग था। इसे वैज्ञानिक “ऑर्फन आफ्टरग्लो” (Orphan Afterglow) कह रहे हैं। इसका मतलब यह है कि विस्फोट तो गामा-रे बर्स्ट जैसा था, लेकिन हमें उसकी गामा-रे किरणें सीधे तौर पर नहीं दिखीं।

मॉडलिंग से पता चला कि इस विस्फोट के दौरान जो ऊर्जा निकली, वह इतनी अधिक थी कि यदि इसे सभी दिशाओं में समान रूप से उत्सर्जित माना जाए, तो यह मिल्की वे (हमारी आकाशगंगा) के सभी तारों द्वारा कई महीनों में उत्सर्जित कुल ऊर्जा के बराबर है। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि EP241107a संभवतः एक विशाल तारे के ढहने (core-collapse) या दो न्यूट्रॉन तारों के विलय का परिणाम था।

निष्कर्ष: विज्ञान की एक बड़ी उपलब्धि

यह शोध ‘मंथली नोटिस ऑफ द रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी’ में प्रकाशित हुआ है। यह उपलब्धि न केवल भारतीय खगोल विज्ञान की क्षमता को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि कैसे अंतरराष्ट्रीय सहयोग से ब्रह्मांड के सबसे गहरे रहस्यों को सुलझाया जा सकता है। EP241107a का अध्ययन हमें उन चरम घटनाओं को समझने के करीब ले गया है जो हमारे ब्रह्मांड के विकास को आकार देती हैं।

Basant Kumar

kumarbasantjha87@gmail.com

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