नई दिल्ली: इलेक्ट्रिक कारों की दुनिया में अग्रणी टेस्ला एक बार फिर सुरक्षा विवादों के घेरे में आ गई है। अमेरिका की नेशनल हाईवे ट्रैफिक सेफ्टी एडमिनिस्ट्रेशन (NHTSA) ने कंपनी की फुल सेल्फ-ड्राइविंग (FSD) सिस्टम पर प्रारंभिक जांच का ऐलान किया है। यह कदम 58 से ज्यादा घटनाओं के बाद उठाया गया, जहां कारों ने ट्रैफिक नियमों का पालन न करने की वजह से हादसे किए। प्रभावित वाहनों की संख्या करीब 29 लाख है, जिसमें मॉडल 3, Y, S और X जैसी पॉपुलर कारें शामिल हैं। इन घटनाओं में 14 क्रैश, 23 चोटें और कुछ मामलों में आग लगने की पुष्टि हुई है, जो टेस्ला की ‘सुपरवाइज्ड’ ड्राइविंग तकनीक पर सवाल खड़े कर रही हैं।
रिपोर्ट्स में सामने आईं गंभीर कमियां
NHTSA की रिपोर्ट्स से पता चलता है कि FSD सिस्टम अक्सर चेतावनी के बिना ही असुरक्षित कदम उठाता है। कई ड्राइवरों ने बताया कि कार ने अचानक लाल सिग्नल पर ब्रेक नहीं लगाया या गलत लेन में घुस गई, जिससे टक्कर हो गई। ज्यादातर केस इंटरसेक्शन या रेल क्रॉसिंग के पास दर्ज हुए हैं। एजेंसी अब जांच रही है कि क्या यह सॉफ्टवेयर बग की वजह से है या सेंसर की खराबी। उदाहरण के लिए, मैरीलैंड के जोपा इंटरसेक्शन पर कई बार एक ही समस्या दोहराई गई, जिसके बाद टेस्ला ने लोकल स्तर पर फिक्स किया। लेकिन व्यापक स्तर पर यह समस्या बनी हुई है और ड्राइवरों को पर्याप्त समय नहीं मिलता हस्तक्षेप करने का।
रेलवे ट्रैक और लेन चेंज: खतरे की घंटी
खास तौर पर रेलवे क्रॉसिंग पर FSD की नाकामी ने चिंता बढ़ाई है। NBC न्यूज की रिपोर्ट्स के अनुसार, कारें बंद गेट और लाल बत्ती के बावजूद ट्रैक पार करने की कोशिश करती हैं, जो जानलेवा साबित हो सकता है। इसी तरह, लेन चेंज के दौरान विपरीत दिशा में मुड़ना या डबल येलो लाइन क्रॉस करना आम शिकायत है। NHTSA ने 18 से ज्यादा ऐसी घटनाओं की पहचान की, जहां गलत-वे साइनबोर्ड्स को नजरअंदाज किया गया। इसके अलावा, ‘समन’ फीचर, जो कार को ड्राइवर के पास बुलाता है, पार्किंग लॉट में छोटी टक्करों का कारण बन रहा है। इस साल की शुरुआत में इसकी अलग जांच हुई थी।
रिपोर्टिंग में देरी और कानूनी झटके
जांच का एक बड़ा पहलू हादसों की रिपोर्टिंग है। अगस्त 2025 में NHTSA ने टेस्ला पर महीनों की देरी का आरोप लगाया, जिससे डेटा छुपाने के संदेह में नई प्रोब शुरू हुई। फ्लोरिडा कोर्ट ने 2019 के एक घातक क्रैश में कंपनी को 240 मिलियन डॉलर का जुर्माना लगाया, दावा करते हुए कि FSD की सीमाओं को ग्राहकों से छुपाया गया। टेस्ला का पक्ष है कि यह लेवल-2 असिस्टेंस है, जहां ड्राइवर को हमेशा अलर्ट रहना पड़ता है। लेकिन कई यूजर्स इसे फुल ऑटोनॉमस समझकर लापरवाही बरतते हैं, जो हादसों को बढ़ावा दे रहा है।
FSD क्या है और क्यों विवादास्पद?
टेस्ला का FSD सॉफ्टवेयर कार को लेन चेंज, सिग्नल रिकग्निशन, ऑटो-पार्किंग और क्रूज कंट्रोल जैसी सुविधाएं देता है। लेकिन यह पूरी तरह स्वायत्त नहीं है और ड्राइवर को स्टीयरिंग पर हाथ रखना जरूरी है। समस्या तब आती है जब सिस्टम अप्रत्याशित व्यवहार करता है, जैसे लो-विजिबिलिटी में क्रैश या रेड लाइट इग्नोर। NHTSA की पिछली जांचों में ऑटोपायलट से जुड़े 13 फेटल क्रैश पाए गए थे। कंपनी का शेयर प्राइस भी इस खबर पर 2% लुढ़का।
सुरक्षा पहले, इनोवेशन बाद में
यह जांच अगर रिकॉल की ओर ले जाती है, तो टेस्ला की सेल्फ-ड्राइविंग महत्वाकांक्षा पर ब्रेक लग सकता है। लेकिन यह भी एक मौका है कि कंपनी सॉफ्टवेयर को और मजबूत बनाए। सड़क सुरक्षा में तकनीक की भूमिका बढ़ रही है, पर बिना विश्वास के यह जोखिम भरी साबित हो सकती है। क्या टेस्ला इस चुनौती से उबर पाएगी?



