नई दिल्ली: भारत मंडपम में 3-5 नवंबर 2025 को चले ESTIC सम्मेलन में दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने बड़ा रोल निभाया। 5 नवंबर को ‘डिजिटल संचार’ सत्र की अध्यक्षता सचिव डॉ. नीरज मित्तल ने की। उन्होंने कहा कि दूरसंचार अर्थव्यवस्था और हर नई तकनीक का इंजन है। कनेक्टिविटी से असंभव को संभव बनाया जा सकता है।
5G रोलआउट और 6G की तैयारी
भारत ने दुनिया के सबसे तेज 5G रोलआउट में से एक हासिल किया है। देश में 100 5G प्रयोगशालाएं बनाई गई हैं। ये 6G के लिए नए उपयोग और तकनीक विकसित करेंगी। डॉ. मित्तल ने बताया कि 100 से ज्यादा 6G प्रोजेक्ट चल रहे हैं, जो ओपन आरएएन, स्वदेशी चिपसेट, एआई नेटवर्क और नियामक सैंडबॉक्स पर फोकस है।
भारत 6G गठबंधन की ताकत
प्रधानमंत्री के विजन से प्रेरित ‘भारत 6G गठबंधन’ ने 10 वैश्विक साझेदारियां की है, जिसका लक्ष्य 2030 तक दुनिया के 6G पेटेंट में 10% हिस्सा भारत का हो है। यह गठबंधन अनुसंधान, विनिर्माण और शिक्षा-उद्योग सहयोग को बढ़ावा दे रहा है।
विशेषज्ञों के व्याख्यान और पैनल
आईआईटी हैदराबाद के प्रो. किरण कुमार कुची ने “भारत के लिए 6G विजन” पर मुख्य भाषण दिया। लेखा वायरलेस के रामू श्रीनिवासैया ने ओआरएएन की भूमिका और तेजस नेटवर्क्स के डॉ. कुमार शिवराजन ने 2030 तक भारत को दूरसंचार लीडर बनाने पर बात की। सी-डॉट के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने पैनल चलाया, जिसमें आईआईटी मद्रास, आईआईएससी, बीएसएनएल और सांख्य लैब्स के विशेषज्ञ शामिल थे।
विकसित भारत 2047 का रोडमैप
सचिव ने बताया कि नवाचार, शिक्षा-उद्योग सहयोग और रिसर्च से विकसित भारत 2047 बनेगा। पैनल ने 5G पारिस्थितिकी विस्तार, स्वदेशी नेविगेशन (NavIC), डी2एम तकनीक और 6G स्टैक पर चर्चा की।
ईएसटीआईसी 2025 का भव्य आयोजन
प्रधानमंत्री ने 3 नवंबर को सम्मेलन का उद्घाटन किया। 13 मंत्रालयों के सहयोग से चले इस कार्यक्रम में 3000 से ज्यादा विशेषज्ञ, नोबेल विजेता और नीति निर्माता शामिल हुए। 11 क्षेत्रों एआई, क्वांटम, स्वास्थ्य, ऊर्जा आदि पर गहन चर्चा हुई।



