नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की नई सरकार ने जनवरी में सत्ता संभालते ही इमिग्रेशन (US Immigration Policy) को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया था। अब खुलासा हुआ है कि बीते 10 महीनों में करीब 80,000 गैर-प्रवासी वीजा रद्द किए जा चुके हैं। यह कदम ट्रंप प्रशासन की “जीरो टॉलरेंस पॉलिसी” का हिस्सा है, जिसके तहत छोटे अपराधों पर भी वीजा रद्दीकरण (Visa Cancellation) किया जा रहा है। एक वरिष्ठ स्टेट डिपार्टमेंट अधिकारी ने बताया कि इन वीजा को शराब पीकर गाड़ी चलाने, हमला, चोरी और कानून तोड़ने जैसे मामलों में रद्द किया गया है।
अमेरिका में प्रवेश अब ‘हक’ नहीं, ‘विशेषाधिकार’
स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट (Thomas Pigott) ने कहा, “अमेरिका में प्रवेश कोई अधिकार नहीं, बल्कि एक विशेषाधिकार है। हम उन विदेशियों के वीजा रद्द करने में हिचकिचाएंगे नहीं जो हमारे कानूनों को कमजोर करते हैं या सुरक्षा के लिए खतरा बनते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि ट्रंप प्रशासन की पहली प्राथमिकता अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा और हितों की रक्षा है।
अपराधों की वजह से सबसे ज्यादा वीजा रद
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 16,000 वीजा शराब पीकर वाहन चलाने (DUI) के मामलों में रद्द किए गए। वहीं 12,000 वीजा हमले (असॉल्ट) और 8,000 वीजा चोरी (थेफ्ट) के कारण रद्द हुए। इन तीन अपराधों ने ही वीजा कैंसिलेशन का लगभग आधा हिस्सा बनाया। अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई न केवल सार्वजनिक सुरक्षा के लिए जरूरी है, बल्कि वीजा धारकों की जिम्मेदारी तय करने के लिए भी आवश्यक है।
स्टूडेंट वीजा पर भी शिकंजा
स्टेट डिपार्टमेंट ने बताया कि अगस्त तक 6,000 से अधिक स्टूडेंट वीजा रद्द किए जा चुके थे, जिनमें ओवरस्टे, कानून उल्लंघन और कुछ मामलों में ‘आतंकवाद का समर्थन’ शामिल था। कुल मिलाकर, अब तक 8,000 से ज्यादा स्टूडेंट वीजा रद्द हो चुके हैं। ये आंकड़े बताते हैं कि ट्रंप प्रशासन केवल गंभीर अपराधों पर ही नहीं, बल्कि छोटी गलतियों पर भी सख्त है।
सोशल मीडिया और राजनीतिक गतिविधियों पर नजर
ट्रंप प्रशासन ने वीजा जांच प्रक्रिया में सोशल मीडिया की निगरानी को और कड़ा कर दिया है। हाल में कम से कम 6 विदेशी नागरिकों के वीजा सोशल मीडिया पोस्ट के कारण रद किए गए, जिनमें अमेरिकी नीतियों के खिलाफ टिप्पणियां की गई थीं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा था कि सैकड़ों लोगों के वीजा इस आधार पर रद किए गए हैं कि उनकी गतिविधियां अमेरिका की विदेश नीति के खिलाफ थीं।
फलस्तीन समर्थन पर डिपोर्टेशन की चेतावनी
ट्रंप प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्टूडेंट वीजा या ग्रीन कार्ड धारक यदि फलस्तीन समर्थक बयान देते हैं या इजरायल की आलोचना करते हैं, तो उन्हें डिपोर्ट किया जा सकता है। हालांकि, एक फेडरल जज ने प्रो-पैलेस्टाइनी एक्टिविस्ट्स के वीजा रद्द करने को ‘फर्स्ट अमेंडमेंट’ का उल्लंघन बताते हुए रोक लगा दी है। फिर भी, प्रशासन ने बताया कि 55 मिलियन वीजा धारकों के रिकॉर्ड्स की समीक्षा की जा रही है ताकि किसी भी संभावित उल्लंघन की पहचान कर आगे की कार्रवाई की जा सके।
ट्रंप की “क्रैकडाउन पॉलिसी” का असर
इन सभी कदमों से साफ है कि ट्रंप प्रशासन का मकसद अमेरिका में इमिग्रेशन सिस्टम को सख्त और नियंत्रित बनाना है। वैध वीजा धारकों पर भी नजर रखी जा रही है, ताकि कोई भी व्यक्ति जो कानून या सुरक्षा नियमों का उल्लंघन करे, उसे तुरंत कार्रवाई का सामना करना पड़े। यह ट्रंप की व्यापक “इमिग्रेशन क्रैकडाउन” नीति का हिस्सा है, जिसने दुनियाभर के वीजा आवेदकों में डर और सतर्कता दोनों बढ़ा दिए हैं।



