नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) के वार्षिक समारोह में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपने छात्र जीवन की यादों को भावुक अंदाज़ में साझा किया। सीएम ने कहा कि दोस्तों के साथ कैंटीन की चर्चाएं, क्लासरूम की नोक-झोंक, लेक्चर से बचने के बहाने, इम्तहान से पहले रात-भर पढ़ाई करना और कमला नगर की सड़कों पर दोस्तों के साथ घूमना, ये सभी पल आज भी उनकी यादों का अभिन्न हिस्सा हैं। कॉलेज के वे दिन आज भी उनके जीवन की सबसे सुनहरी स्मृतियों के रूप में उनके साथ जीवित हैं और उन्हें आज भी प्रेरणा देते हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि जब भी वह विश्वविद्यालय परिसर में लौटती हैं, तो उम्र और पद का फासला मिट जाता है और वही पुराना विद्यार्थी जीवन फिर से जीवंत हो उठता है।
छात्र राजनीति के दिनों को याद कर भावुक हुई
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने छात्र राजनीति के दिनों की एक मार्मिक घटना भी साझा की। उन्होंने बताया कि जब वह दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) की अध्यक्ष थीं, उस समय एक प्रदर्शन के दौरान हुए हादसे में उनका चेहरा बुरी तरह झुलस गया था। लगभग डेढ़ महीने तक उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा, उस समय दर्द तो था, कठिनाइयां भी थीं, परंतु मैंने हार नहीं मानी। कॉलेज जीवन ने मुझे यही सिखाया कि कठिनाइयां हमें रोक नहीं सकतीं। हमें हर हाल में आगे बढ़ना चाहिए। कठिनाइयां चाहे कितनी भी हों, हमें रुकना नहीं चाहिए।
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जीवन के अनुभवों से भविष्य का मार्ग तय करें
मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि कॉलेज जीवन ही वह दौर होता है, जब दोस्ती, संबंध और यादें ता-उम्र साथ रहती हैं। कॉलेज की वो लाइब्रेरी, कैंटीन की चर्चाएं, प्रोफेसरों से संवाद और सहपाठियों के साथ बिताए पल, यही मेरी ज़िंदगी की असली पूंजी हैं। यही अनुभव मुझे नेतृत्व की ओर ले गए और आज मुझे देश व समाज की सेवा करने की प्रेरणा देते हैं। समारोह में उपस्थित विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि कॉलेज जीवन को केवल बीती यादों के रूप में न देखें, बल्कि इन्हीं अनुभवों से भविष्य का मार्ग तय करें। उन्होंने कहा कि आपके जीवन का हर अनुभव, चाहे वह छोटा हो या बड़ा, आपकी आगे की यात्रा को आकार देता है। छात्र जीवन में सीखी गई बातें ही आपको नेतृत्व, संवेदनशीलता और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का साहस देती हैं।
मुख्यमंत्री ने हंसते हुए याद किया कि साल 1993 में वह एसआरसीसी में प्रवेश लेना चाहती थीं, लेकिन कम प्रतिशत आने के वजह से कॉलेज में दाख़िला नहीं मिल सका। इसलिए शायद मुझे यहां आने के लिए मुख्यमंत्री बनना पड़ा।



