लखनऊ। उत्तर प्रदेश में औद्योगिक विकास को लेकर बीते नौ वर्षों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। प्रदेश में योगी सरकार के शासनकाल में अप्रैल 2017 से अब तक 17,841 नई फैक्ट्रियों का पंजीकरण हुआ है, जो इससे पहले के लगभग 70 वर्षों में दर्ज 14,178 फैक्ट्रियों से भी अधिक है। वर्तमान में प्रदेश में कुल पंजीकृत फैक्ट्रियों की संख्या 32,019 हो गई है।
नौ वर्षों में तेजी से हुआ विस्तार
उत्तर प्रदेश सरकार के अनुसार पारदर्शी नीतियों, बेहतर कानून व्यवस्था और निवेशकों के अनुकूल वातावरण के कारण प्रदेश में औद्योगिक विस्तार तेजी से हुआ है। यह देखा जा रहा है कि 17,841 फैक्ट्रियों में से 10,194 फैक्ट्रियों का पंजीकरण सितंबर 2023 के बाद हुआ है, जो प्रदेश में औद्योगिक विस्तार में हालिया तेजी को दर्शाता है।
16 लाख से अधिक लोगों को मिला रोजगार
इन फैक्ट्रियों के माध्यम से 16,53,179 लोगों को रोजगार मिला है। इनमें 1,23,272 महिलाएं शामिल हैं, जो राज्य में सामाजिक-आर्थिक बदलाव और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का संकेत है। पंजीकृत फैक्ट्रियों में अधिकांश छोटे व मध्यम स्तर की इकाईयां हैं। आंकड़ों के अनुसार, 14,412 फैक्ट्रियों में 100 के आसपास श्रमिक काम कर रहे हैं, जबकि 3,213 फैक्ट्रियों में 101 से 1,000 श्रमिक काम कर रहे हैं। इसके अलावा, 118 फैक्ट्रियों में 1,000 से अधिक लोगों को रोजगार मिल चुका है।
निवेश के लिए बेहतर वातावरण श्रम व रोजगार विभाग के प्रधान सचिव डॉ. एम.के. शनमुगम सुंदरम के अनुसार राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है कि उत्तर प्रदेश को देश की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनाया जाए। इसके लिए ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा देना, सिंगल विंडो सिस्टम, ऑनलाइन स्वीकृतियां, लैंड बैंक, कानून व्यवस्था, बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर आदि विकसित किया गया है।
इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं से रफ्तार
एक्सप्रेस-वे, एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक्स हब और उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर जैसी बड़ी परियोजनाओं ने औद्योगिक विकास को गति दी है। इन प्रयासों से राज्य में निवेश बढ़ा है और रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं। सरकार का दावा है कि इन पहलों के चलते प्रदेश अब केवल कृषि आधारित राज्य न रहकर एक उभरते औद्योगिक केंद्र के रूप में पहचान बना रहा है। इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था मजबूत हुई है और लाखों परिवारों की आजीविका में सुधार आया है।



