नई दिल्ली: दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने आज प्रथम महिला प्रधानमंत्री, भारत रत्न इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें प्रदेश कांग्रेस कार्यालय राजीव भवन में श्रद्धाजंलि अर्पित करते हुए कहा कि इंदिरा के परिपक्व नेतृत्व और प्रखर विचारधारा के कारण ही देश में बैंको का राष्ट्रीयकरण, हरित क्रांति, बंगलादेश को स्वतंत्र राष्ट्र बनाना, परमाणु परीक्षण और सिक्किम का विलय करने जैसे देशहित में कठोर निर्णय लिए गए। इंदिरा के हर निर्णय ने भारत को आत्मनिर्भर, सशक्त और एकजुट बनाने में योगदान दिया। 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रुप में भी मनाया जाता है।
देवेन्द्र यादव शुक्रवार को पहले शक्ति स्थल और सफदरजंग रोड़ स्थित शहीदी स्थल पर जाकर भी उन्हें अपने श्रद्धाजंलि अर्पित की। प्रदेश कार्यालय में इंदिरा को पुष्पाजंलि अर्पित करने वालों में देवेन्द्र यादव के अलावा पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चौपड़ा, कम्युनिकेशन विभाग के चेयरमैन अनिल भारद्वाज, जगजीवन शर्मा, आभा चौधरी सहित भारी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी पुष्पाजंलि अर्पित की।
देवेन्द्र यादव सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती पर उन्हें याद करते हुए कहा कि सरदार पटेल भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। उनकी स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका को भुलाया नहीं जा सकता। सरदार पटेल ने लगभग 562 देशी रियासतों को भारत में मिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे भारत की क्षेत्रीय अखंडता सुनिश्चित करते हुए सरदार पटेल ने भारत के एकीकरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने कूटनीति, दबाव और सैन्य कार्रवाई का उपयोग करके हैदराबाद, जूनागढ़ और कश्मीर जैसी रियासतों को भारत में शामिल कराया, जिसके कारण उन्हें ’लौह पुरुष’ कहा जाता है।
इंदिरा ने हमेशा अंखड भारत के स्वरुप को और मजबूत बनाने के निर्णायक फैसले लिए, जिसकी बदौलत आज भारत का नाम विश्व के सर्वोच्च देशों की श्रेणी में आता है।इंदिरा की बेमिसाल विदेश नीति के फैसलों से ही भारतीयों को विदेशों में व्यापार करने और युवाओं को शिक्षा प्राप्त करने के नऐ रास्ते खुले। इंदिरा ने समाज के गरीब, वंचित और गरीबी से नीची रेखा के नीचे जीने वाले निचले तबके के उत्थान के लिए नीति बनाई और गरीबी हटाओं अभियान चलाकर देश के प्रत्येक नागरिक के रोजी रोटी और रोजगार देने की दिशा में राह बनाने का काम किया था।
कांग्रेस के प्रति देशवासियों में अटूट विश्वास का ही प्रमाण था कि इंदिरा गांधी जी ने 1966-1977 तक और 1980-1984 तक चार बार प्रधानमंत्री के रुप में देश का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा, संस्कार, स्वतंत्रता संग्राम में संघर्ष की परम्परा और देशवासियों से लगाव के कारण ही इंदिरा ने सुदृढ़ और परिपक्व सोच और संगठित विचारधारा से देश को विश्व पटल पर सुदृढ़ बनाने के लिए अभूतपूर्व काम किए थे। इंदिरा अपने फैसले लेने में खुद सक्षम थी, जिसका लोहा पूरी दुनिया ने माना, जिसका उदाहरण पाकिस्तान को विभाजित करके बंग्लादेश बनाना था।



