नई दिल्ली: समुद्री मछली पालन जनगणना (MFC-2025) को आसान बनाने के लिए सरकार ने एक नई पहल की घोषणा की है। सरकार ने ‘व्यास-भारत’ और ‘व्यास-सूत्र’ नाम से दो डिजिटल प्लेटफॉर्म की शुरुआत की है। अनुमान है कि सरकार का यह कदम देश के मत्स्य क्षेत्र को नई दिशा देगा।
इसी के साथ केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्री ने मछुआरों से राष्ट्रीय मत्स्य डेटा पोर्टल (NFDP) पर रजिस्टर होने की अपील की है, और कहा कि सरकार मछुआरों के कल्याण के लिए ट्रांसपोंडर और कछुआ निष्कासन उपकरण (TEDs) जैसे वैज्ञानिक उपकरण निःशुल्क उपलब्ध करा रही है।
2 केंद्रशासित प्रदेशों सहित 13 राज्यों में एमएफसी-2025
एमएफसी-2025 अपने पूर्ववर्ती सर्वेक्षणों (2005, 2010 और 2016) की तुलना में एक महत्वपूर्ण प्रगति है। इसमें अंडमान-निकोबार और लक्षद्वीप सहित 13 तटीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 5,000 गांवों/बस्तियों के करीब 12 लाख मछुआरा परिवारों की पूरी तरह डिजिटल और पेपरलेस गणना की जाएगी। मुख्य घरेलू डेटा संग्रह 3 नवंबर से 18 दिसंबर 2025 तक 45 दिनों की अवधि में किया जाएगा।
व्यास ऐप समूह से आसान होगा डिजिटल डेटा प्रबंधन
यह जनगणना पूरी तरह आईसीएआर–केंद्रीय समुद्री मत्स्य अनुसंधान संस्थान (CMFRI) द्वारा विकसित ‘व्यास’ ऐप समूह के माध्यम से की जाएगी।
इस दौरान व्यास–एनएवी से मछली पकड़ने वाले गांवों और बंदरगाहों का सत्यापन होगा, वही व्यास–भारत से घरेलू और बुनियादी ढांचे की गणना, व्यास–सूत्र के माध्यम से रीयल-टाइम मॉनिटरिंग होगी।
ड्रोन तकनीक से मिलेगी डेटा की सटीकता और पारदर्शिता
मत्स्य विभाग और सीएमएफआरआई इस बार पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ड्रोन तकनीक का भी प्रयोग कर रहे हैं। ड्रोन का उपयोग ट्रॉल प्रतिबंध अवधि में मछली पकड़ने वाले जहाजों की हवाई गणना के लिए किया जाएगा।
इस सर्वेक्षण में पूर्वी तट के विजाग, काकीनाडा, तूतीकोरिन तथा पश्चिमी तट के मंगलुरु, बेपोर और पुथियाप्पा जैसे बंदरगाह शामिल हैं।

सामाजिक-आर्थिक और कल्याणकारी फोकस
इस नई समुद्री मत्स्य पालन जनगणना में तटीय आबादी की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को समझने के लिए कई नए संकेतक भी जोड़े गए हैं; जैसे पारिवारिक आय, गृहस्वामित्व, ऋण, बीमा स्थिति, विकलांगता, कोविड-19 के प्रभाव और सरकारी योजनाओं से लाभ की जानकारी।
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इस नई पहल के बारे में
राष्ट्रीय समुद्री मत्स्य पालन जनगणना 2025, भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग द्वारा पूरी तरह वित्तपोषित एक तटीय-व्यापी परियोजना है। इसमें आईसीएआर–सीएमएफआरआई नोडल एजेंसी और भारतीय मत्स्य सर्वेक्षण (FSI) ऑपरेशनल भागीदार है। देश के 1,200 से अधिक लैंडिंग केंद्रों, 50 मछली बंदरगाहों, घाटों, बाजारों और प्रसंस्करण इकाइयों में घर-घर जाकर डेटा एकत्र किया जाएगा।



