बिहार चुनाव: अमरपुर के गुड़ की मिठास हुई गुम

बिहार के बांका जिले का अमरपुर गुड़ उद्योग कभी अपनी खास पहचान रखता था। लेकिन अब सियासत के जातिय समीकरण में उलझा है।

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बांका: बिहार के बांका जिले का अमरपुर विधानसभा क्षेत्र, जो कभी गन्ना और गुड़ उद्योग के लिए अपनी मिठास के कारण जाना जाता था। पिछले तीन दशकों से समाजवादी खेमों की सियासी जंग का अखाड़ा बन चुका है। जिसके चलते यहां की फिजा में घुली गुड़ की खूशबू अब धीरे-धीरे गायब होने लगी है। पहले यहां से तैयार गुड़ को बंगाल, झारखंड सहित अन्य राज्यों में सप्लाई किया जाता था।

गुड़ की मिलें खंडहर में तब्दील

एक दौर था जब बांका जिले में सौ से अधिक गुड़ की मिलें थी। इसमें अकेले अमरपुर में आधा दर्जन से अधिक गुड़ की मील थी। अमरपुर का पूरा इलाका गुड़ के लिए प्रसिद्ध था, लेकिन सरकार और स्थानीय प्रशासन की उदासीनता के चलते एक-एक कर सारी मिलें खंडहर में तब्दील होती चली गई और अब यह समाजवादी दलों के बीच वर्चस्व की लड़ाई का केंद्र बन गया है।

सियासी समीकरण चर्चा का मुद्दा

वर्ष 1985 से 2020 तक हुए छह चुनावों में जदयू, राजद और जनता दल ने इस सीट पर कब्जा जमाया, जबकि कांग्रेस का प्रभाव 1985 के बाद कमजोर पड़ गया। वर्तमान में जदयू के जयंत राज के नेतृत्व में यह क्षेत्र विकास की राह पर है, लेकिन आगामी चुनावों में सियासी समीकरण फिर से चर्चा का विषय बने हुए हैं।

बीजेपी, जेडीयू, इंडिया गठबंधन के बीच मुकाबला

बांका जिले की इस अहम सीट पर बीजेपी, जेडीयू और इंडिया गठबंधन के बीच जबरदस्त मुकाबले के आसार हैं। लेकिन सारी नजरें जदयू के कद्दावर नेता व भवन निर्माण मंत्री जयंत राज और संभावित राजद प्रत्याशी संजय चौहान पर टिकी हुई हैं।

सियासी हलचल तेज

आगामी चुनावों को लेकर अमरपुर में सियासी हलचल तेज हो गई है। जदयू सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों के भरोसे मैदान में है, जबकि महागठबंधन की ओर से राजद सक्रियता दिखा रहा है। पिछले चुनाव में महागठबंधन की ओर से कांग्रेस ने प्रत्याशी उतारा था, लेकिन इस बार गठबंधन का रुख क्या होगा, यह देखना बाकी है। इसके अलावा, जनसुराज पार्टी भी जनसंवाद के जरिए मतदाताओं को लुभाने में जुटी है।

कुर्मी और कुशवाहा बाहुल्य क्षेत्र

अमरपुर में कुर्मी और कुशवाहा वोटों की संख्या अधिक है, लेकिन राजपूत वोटर भी निर्णायक भूमिका निभाते हैं। सियासी दलों की नजर इन समुदायों पर टिकी है, जो इस क्षेत्र के चुनावी समीकरण को तय करेंगे। जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आ रहा है। अमरपुर की सियासत में गर्माहट बढ़ती जा रही है। अब सवाल यह है  क्या यह क्षेत्र अपनी खोई हुई मिठास को फिर से हासिल कर पाएगा, या सियासत की जंग में और उलझेगा। यह सवाल हर किसी के जेहन में है।

गुड़ उद्योग को बचाने की नहीं बनी नीति

अमरपुर में गुड़ उद्योग का अस्तित्व लगभग समाप्ति की ओर है। इसे बचाने के लिए अब तक कोई ठोस नीति नहीं बन सकी है। इससे हजारों परिवारों की आजीविका पर संकट बना हुआ है। पर्यटन की तमाम संभावनाओं के बावजूद यह क्षेत्र अब तक उपेक्षित रहा है। खासकर भदरिया जैसे स्थल को बौद्ध सर्किट से जोड़ने की मांग वर्षों से लंबित है। भदरिया के विकास के लिए काफी खर्च भी हुआ, लेकिन स्थिति जस की तस रह गई है। यहां जेठौरनाथ पौराणिक मंदिर और तेलडीहा मंदिर का भी खास महत्व है।

इस चुनाव में मुद्दे

अमरपुर को अनुमंडल का दर्जा। औद्योगिक इकाइयों की स्थापना। पर्यटन क्षेत्र का विकास।

वादे जो पूरे नहीं हुए

प्रसिद्ध जेठौर नाथ मंदिर का संपूर्ण विकास। क्षेत्र की कई ग्रामीण सड़कों का पक्कीकरण। कई गांव में पुलिया की मांग पूरी नहीं हुई। अमरपुर को रेल से जोड़ने की मांग।

कुल मतदाता: 316993 है जिनमें पुरुष 166837, महिला 1501532 और पहली बार मतदान करने वाले युवा 5864 हैं।

Sanjay Rai

sanjayrai.dj@gmail.com

संजय राय ने बीते 25 साल के प्रोफेशनल कैरियर में स्वास्थ्य, अपराध, शिक्षा, विकास समेत सभी बीट की कवरेज की है। दिल्ली सरकार, विधानसभा की कार्यवाही, भाजपा, कांग्रेस, आप सरीखे राजनीतिक दलों के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक व आंदोलनात्मक गतिविधियों को भी कवर किया है। कई सत्रों में संसद की कार्यवाही पर भी कलम चलाई है। फिलवक्त NewG India में बतौर सीनियर स्पेशल काॅरेस्पोंडेंट अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

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