पटना: बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर संभावित खतरों को देखते हुए राज्य सरकार ने छह प्रमुख नेताओं की सुरक्षा बढ़ा दी है। इस फैसले में उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और सांसद पप्पू यादव समेत कई नेता शामिल हैं।
सम्राट चौधरी को Z+ और तेजस्वी को Z श्रेणी की सुरक्षा
उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की सुरक्षा Z श्रेणी से बढ़ाकर Z+ श्रेणी की कर दी गई है, जिसमें एडवांस्ड सिक्योरिटी लाइजन (ASL) भी शामिल है। अब वे राज्यपाल और मुख्यमंत्री के बाद बिहार में ASL सुरक्षा पाने वाले तीसरे व्यक्ति बन गए हैं।
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव की सुरक्षा को Y+ श्रेणी से बढ़ाकर Z श्रेणी किया गया है।
अन्य नेताओं की भी बढ़ी सुरक्षा
सुरक्षा बढ़ाने का यह निर्णय राज्य सुरक्षा समिति की 1 अगस्त को हुई बैठक की अनुशंसाओं पर लिया गया है। गृह विभाग की विशेष सचिव के. सुहिता अनुपम ने इस बात की पुष्टि की।
इन नेताओं की सुरक्षा बढ़ाई गई है
- राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव (पूर्णिया से निर्दलीय सांसद): इन्हें Y+ श्रेणी की सुरक्षा दी गई है।
- प्रदीप कुमार सिंह (अररिया से भाजपा सांसद): इन्हें भी Y+ श्रेणी की सुरक्षा प्रदान की गई है।
- ज्ञानेंद्र सिंह ज्ञानू (बाढ़ से भाजपा विधायक): इन्हें भी Y+ श्रेणी की सुरक्षा मिलेगी।
- नीरज कुमार (जदयू विधान पार्षद सह सत्तारूढ़ दल के सचेतक): इन्हें Y श्रेणी की सुरक्षा दी गई है।
- यह कदम आगामी चुनावों के दौरान नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है, जिससे किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
सुरक्षा बढ़ाने के प्रमुख कारण
- राजनीतिक खतरे: बिहार में चुनाव का माहौल काफी गरमागरम रहता है। राजनेताओं को उनके राजनीतिक विरोधियों, आपराधिक तत्वों या अन्य समूहों से खतरा हो सकता है। यह कदम ऐसे किसी भी संभावित हमले या अप्रिय घटना को रोकने के लिए उठाया गया है।
- पदों का महत्व: उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव जैसे नेताओं का पद बहुत महत्वपूर्ण है। उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है, खासकर चुनाव से पहले।
- राज्य सुरक्षा समिति की अनुशंसा: यह फैसला किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि राज्य सुरक्षा समिति की विस्तृत बैठक के बाद लिया गया है। समिति ने हर नेता की खतरे की आशंका का आकलन किया होगा और उसके आधार पर सुरक्षा बढ़ाने की सिफारिश की।
- कानून और व्यवस्था: नेताओं की सुरक्षा बढ़ाकर सरकार यह संदेश देना चाहती है कि वह राज्य में कानून और व्यवस्था को लेकर गंभीर है, ताकि चुनाव प्रक्रिया बिना किसी बाधा के संपन्न हो सके।



