लखनऊ: सेनापति का पता नहीं, लेकिन बाहर से सैनिक पहुंच चुके हैं। सभी अपने-अपने दल के होने वाले सेनापतियों के लिए जमीन तैयार कर रहे हैं, लेकिन सबसे बड़ा पहलु यह है कि अभी तक तो यह भी तय नहीं है कि कौन सीट दोनों राष्ट्रीय दलों के पास रहेगा, कौन नहीं रहेगा। हम बात कर रहे हैं बिहार चुनाव में उत्तर प्रदेश से भेजे जाने वाले नेताओं की। यहां से कांग्रेस और भाजपा दोनों ने बड़े नेताओं की ड्यूटी लगा दी है। वहां जाकर सभी लोग चुनाव की जमीन तैयार करने में जुट गये हैं।
उत्तर प्रदेश से बड़ी संख्या में और इतना पहले नेताओं को बिहार चुनाव के लिए लगाये जाने का कारण उसके बार्डर प्रदेश का होना है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों की तो तमाम रिश्तेदारियां बिहार में ही है और वे एक-दूसरे को प्रभावित करने में पीछे नहीं रहते। इस जुड़ाव और भाषण की आक्रामक शैली के कारण उप्र के नेता बिहार में जाकर डेरा डाल दिये हैं।
उप्र भाजपा के चालीस से ज्यादा नेता लगे बिहार चुनाव प्रचार में
पहले हम बात करें भाजपा की। भाजपा ने उप्र से चालीस से ज्यादा नेताओं की ड्यूटी बिहार में अभी से लगा दी है। कुछ को जिला दिया गया है तो कुछ को विधानसभा, किसी को मंडल का प्रभारी बनाकर भेजा गया है। भाजपा ने बिहार के विधान सभा चुनाव में उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य को प्रदेश चुनाव सह प्रभारी बनाया है। इसके बाद से ही उपमुख्यमंत्री ने वहां डेरा डाल दिया है। वे लगातार चुनावी रणनीति बनाने, बैठक करने, संगठन की गतिविधियों को और ज्यादा सक्रिय करने में जुट गये हैं।
उपेन्द्र तिवारी भी डटे हैं बिहार चुनाव में
संगठन के पदाधिकारियों के साथ ही प्रदेश के कई मंत्रियों को भी काम सौंपा गया है। इसमें प्रदेश सरकार के परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह, जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह, गन्ना विकास राज्य मंत्री संजय सिंह गंगवार, खाद्य एवं रसद राज्य मंत्री सतीश चंद्र शर्मा और पार्टी के सांसद व विधायक भी शामिल हैं। मंत्री दया शंकर सिंह को बिहार चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान के साथ लगाया गया है। इन दोनों को 48 विधान सभा सीटों के समन्वय का काम सौंपा गया है। संजय सिंह गंगवार व सतीश चंद्र शर्मा व पूर्व मंत्री उपेन्द्र तिवारी भी बिहार के रण में डटे रहेंगे।
उपेन्द्र तिवारी ने कहा, बिहार में फिर बनेगी भाजपा गठबंधन की ही सरकार
पूर्व मंत्री उपेन्द्र तिवारी ने कहा कि बिहार में फिर एनडीए की सरकार बनने जा रही है। यहां की जनता की आवाज सुनकर यह स्पष्ट हो गया है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से जनता का लगाव है। अधिकांश जनता सिर्फ वोट तक सीमित नहीं है, वह सपोर्ट में स्वयं ही उतर चुकी है।
एक या दो लोक सभा क्षेत्रों की सौंपी गयी है जिम्मेदारी
सभी को एक या दो लोक सभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन लोक सभा क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले विधान सभा क्षेत्रों को ये देखेंगे। पूर्व मंत्री महेन्द्र सिंह को तिरहुत क्षेत्र व मिथिला की जिम्मेदारी दी गई है। मंत्री स्वतंत्र देव सिंह आरा क्षेत्र को संभालेंगे। अलीगढ़ के सांसद सतीश गौतम बक्सर, एमएलसी मोहित बेनीवाल किशनगंज में मोर्चा संभाल रहे हैं। गौतमबुद्धनगर के सांसद डा. महेश शर्मा, बुलंदशहर के सांसद भोला सिंह, फतेहपुर सीकरी के सांसद राजकुमार चाहर और सहारनपुर के पूर्व सांसद राघव लखनपाल व कन्नौज के पूर्व सांसद सुब्रत पाठक को बिहार में प्रचार का जिम्मा सौंपा गया है।
इन धुरंधरों की आवाज गुंजेगी बिहार में
सतीश चंद्र द्विवेदी, विनोद सोनकर, पूर्व मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह, भाजपा की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रेखा वर्मा और विधायक शलभ मणि त्रिपाठी को भी चुनावी मोर्चे पर उतारा गया है। प्रदेश के इन नेताओं की आक्रामक शैली, तेजतर्रार भाषण और जनता से जुड़ाव बिहार की सियासत में नया समीकरण बना सकते हैं। भाजपा का मानना है कि इन धुरंधरों की गूंज से विपक्ष की रणनीति धरी रह जाएगी और बिहार में चुनाव में पार्टी नई ऊंचाइयों को छूने में कामयाब होगी।
अजय राय के नेतृत्व में उप्र कांग्रेस की टीम संभालेगी प्रचार व रणनीति का जिम्मा
वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी अपनी ताकत झोंक दी है। पार्टी ने चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश से छह नेताओं को जिम्मेदारी दी है। कांग्रेस ने बिहार के लिए 41 पर्यवेक्षकों की सूची जारी की है जिसमें यूपी से अजय राय अविनाश पांडेय अजय कुमार लल्लू तनुज पुनिया प्रदीप जैन और संजय कपूर शामिल हैं। वहीं अजय राय के नेतृत्व में यह टीम बिहार में चुनाव प्रचार और रणनीति का समन्वय करेगी। इस बारे में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने बताया कि उनकी टीम बिहार में सभी विधानसभा सीटों और जिलों में कांग्रेस नेताओं के साथ समन्वय बनाकर चुनाव जीतने की रणनीति तय करेगी।



