पटना: बिहार के शहरी विकास के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिपरिषद की बैठक में ‘बिहार शहरी आयोजना स्कीम नियमावली 2025‘ को मंजूरी दे दी गई है, जिससे राज्य के प्रमुख शहरों के बाहरी इलाकों में Satellite Township (ग्रीनफील्ड) विकसित करने का रास्ता खुल गया है। यह फैसला शहरों पर बढ़ते आबादी के दबाव को कम करने, ट्रैफिक जाम जैसी समस्याओं से निजात दिलाने और सुनियोजित शहरीकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से लिया गया है। इस नई नीति के तहत, विकास के लिए किसानों की सहमति से ज़मीन ली जाएगी, जिसे विकसित कर उन्हें वापस लौटाया जाएगा। यह पहल बिहार के शहरी क्षेत्रों को एक आधुनिक और व्यवस्थित रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
किसानों की सहमति से ली जाएगी जमीन
कैबिनेट विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. एस. सिद्धार्थ ने बताया कि Satellite Township के लिए जमीन को किसानों की सहमति से अधिग्रहित किया जाएगा। इसके बाद उस जमीन को विकसित करके उसका 55% हिस्सा किसानों या भूस्वामियों को वापस कर दिया जाएगा। यह प्रक्रिया भूमि अधिग्रहण के पारंपरिक तरीकों से अलग है, जहाँ किसानों को उनकी भूमि का मुआवजा देकर उसे पूरी तरह से सरकार ले लेती है।

पहले चरण में 11 शहरों में बनेगी Satellite Township
नगर विकास मंत्री जिवेश कुमार ने बताया कि इस नीति के तहत पहले चरण में प्रमंडलीय शहरों में ग्रीनफील्ड टाउनशिप विकसित की जाएंगी। फिलहाल 11 शहरों में ऐसी टाउनशिप बनाने की योजना है और इसके लिए जमीन चिह्नित करने की प्रक्रिया चल रही है। उन्होंने यह भी बताया कि 43 शहरों में मास्टर प्लान बनाने का काम तेजी से चल रहा है, जिससे शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों का संतुलित विकास हो सके। इन टाउनशिप को विकसित करने के लिए बिल्डरों या डेवलपर्स की मदद ली जाएगी।
Satellite Township से होंगे ये फायदे
शहरी दबाव में कमी: शहरों में बढ़ती आबादी और भीड़भाड़ कम होगी।
ट्रैफिक जाम से निजात: बेहतर योजना के कारण ट्रैफिक जाम की समस्या से छुटकारा मिलेगा।
आर्थिक विकास: निवेश के नए अवसर पैदा होंगे, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
बेहतर सुविधाएं: इन टाउनशिप में ड्रेनेज, पार्क, अस्पताल, बाजार और स्कूल जैसी मूलभूत सुविधाएं बेहतर ढंग से उपलब्ध होंगी।
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भूमि का वितरण कैसे होगा
- भूस्वामी (किसानों को वापसी) – 55%: इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है कि भूस्वामियों को उनकी मूल भूमि के बदले में 55% विकसित जमीन वापस दी जाएगी। यह सुनिश्चित करेगा कि किसान विकास प्रक्रिया में भागीदार बनें और उन्हें उनकी जमीन का उचित मूल्य मिले।
- सड़क और ड्रेनेज – 22%: कुल विकसित भूमि का 22% हिस्सा सड़कों, गलियों और जल निकासी (ड्रेनेज) की व्यवस्था के लिए आरक्षित किया गया है। यह क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा और सुगम आवागमन सुनिश्चित करेगा।
- कमजोर वर्ग के लिए आवास – 3%: 3% जमीन कमजोर वर्ग के लोगों के लिए आवास योजनाओं के लिए समर्पित की गई है। यह कदम सामाजिक समानता को बढ़ावा देगा और सभी वर्गों को रहने के लिए जगह प्रदान करेगा।
- पार्क, स्कूल, अस्पताल आदि – 5%: 5% जमीन सार्वजनिक सुविधाओं जैसे कि पार्क, स्कूल, अस्पताल और अन्य सामुदायिक केंद्रों के लिए आवंटित की गई है। इससे क्षेत्र के निवासियों को बेहतर जीवनशैली और आवश्यक सुविधाएं मिल सकेंगी।
- सरकार के पास बिक्री के लिए – 15%: बाकी 15% जमीन सरकार के पास बिक्री के लिए उपलब्ध होगी। इस बिक्री से प्राप्त राजस्व का उपयोग विकास परियोजनाओं को वित्तपोषित करने और सार्वजनिक कल्याण के लिए किया जाएगा।
- सरकार का यह कदम विकास और सामाजिक न्याय के बीच संतुलन बनाए रखने का प्रयास है। इस वितरण मॉडल से न केवल भूस्वामियों को लाभ होगा, बल्कि यह क्षेत्र के समग्र विकास को भी गति देगा।



