नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली स्थित प्रसिद्ध सुंदर नर्सरी में सरस आजीविका फूड फेस्टिवल 2025 का कल यानी 1 दिसंबर से आगाज होने जा रहा है। फेस्टिवल का उद्घाटन केंद्रीय ग्रामीण विकास और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे। इस अवसर पर केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी विशिष्ट अतिथि के तौर पर शामिल होंगी, जबकि मंत्री चन्द्र शेखर पेम्मासानी और कमलेश पासवान सम्मानित अतिथि होंगे।
फेस्टिवल में होगा पारंपरिक खान-पान का अद्वितीय संगम
दिल्लीवासियों के लिए यह फेस्टिवल एक बार फिर भारतीय संस्कृति, विविधता और पारंपरिक खान-पान का अद्वितीय अनुभव लेकर आ रहा है। सुंदर नर्सरी में लगने वाला यह फूड फेस्टिवल राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी देशभर की 300 से अधिक “लखपति दीदी” और स्वयं सहायता समूहों की महिला उद्यमियों की भागीदारी का प्रतीक है। कुल 62 स्टॉलों में 50 लाइव फूड स्टॉल और 12 प्राकृतिक खाद्य पदार्थों के स्टॉल लगाए जाएंगे, जहां आगंतुक सुबह 11:30 बजे से रात 9:30 बजे तक स्वाद का आनंद ले सकेंगे।
महिला सशक्तिकरण का मजबूत उदाहरण है सरस फूड फेस्टिवल
सरस फूड फेस्टिवल महिला सशक्तिकरण का मजबूत उदाहरण है, जहां देशभर की ग्रामीण महिलाएं न केवल अपने पाक कौशल का प्रदर्शन कर रही हैं, बल्कि पारंपरिक व्यंजनों के माध्यम से स्थानीय संस्कृति को नई पहचान भी दे रही हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं विभिन्न राज्यों के परंपरागत पकवान बनाने में दक्ष हैं और फेस्टिवल के माध्यम से वे अपनी क्षमताओं को बड़े मंच पर प्रस्तुत कर रही हैं।
फेस्टिवल में आने वाले लोग भारत के 25 राज्यों के स्वाद, परंपराओं और संस्कृति से रूबरू हो सकेंगे। यहां उपलब्ध 500 से अधिक पारंपरिक व्यंजनों में हिमाचल का सीडडू, उत्तराखंड की तंदूरी चाय, जम्मू-कश्मीर की मशहूर कलारी कुल्चा, हैदराबादी दम बिरयानी, पूर्वोत्तर के मोमो, बंगाली फ्राइड फिश समेत राजस्थान की गट्टे की सब्जी, कैर सागरी, बाजरे की रोटी, तेलंगाना का चिकन, केरल की मालाबार बिरयानी, बिहार की लिट्टी-चोखा, पंजाब के सरसों का साग और मक्के की रोटी जैसे कई प्रसिद्ध व्यंजन शामिल हैं।
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इसके अलावा हरियाणा, अरुणाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, असम, गोवा, गुजरात, उत्तर प्रदेश और कई अन्य राज्यों के व्यंजन भी फूड प्रेमियों को आकर्षित करेंगे। सरस आजीविका फूड फेस्टिवल 2025 न सिर्फ भोजन का उत्सव है, बल्कि यह भारत की विविधता, संस्कृति और ग्रामीण उद्यमिता का जीवंत संगम भी है।



