पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महागठबंधन की करारी हार के बाद आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य के बड़े फैसले ने बिहार की राजनीति में भूचाल ला दिया है। रोहिणी ने अचानक राजनीति छोड़ने और अपने ही परिवार से नाता तोड़ने की घोषणा कर दी। रोहिणी का यह फैसला तात्कालिक जरूर लगता है लेकिन परिवार के भीतर लंबे समय से पनप रहा था।
रोहिणी आचार्य का लालू परिवार पर बड़ा बयान!
— NewG (@newGindia) November 15, 2025
🔹"मुझे चप्पल से मारने का काम किया जा रहा है।" उन्होंने कहा, "मेरा कोई परिवार नहीं है। संजय, रमीज और तेजस्वी यादव से पूछिए, उन लोगों ने मुझे परिवार से निकाला है।"
🔹उन्होंने कहा, "उन लोगों को हार की जिम्मेदारी नहीं लेना है।" उन्होंने… pic.twitter.com/Mgvp29pGN0
तेज प्रताप की अनदेखी से नाराज थीं रोहिणी
रोहिणी आचार्य अपने बड़े भाई तेज प्रताप यादव के राजनीतिक अपमान से काफी समय से आहत थीं। तेजस्वी यादव ने इस चुनाव में अपने ही भाई तेज प्रताप के खिलाफ उम्मीदवार खड़ा किया था, जिससे रोहिणी विशेष रूप से नाराज थीं। चुनाव प्रचार के दौरान रोहिणी ने तेज प्रताप के समर्थन में वोट भी मांगे थे और संजय यादव के बढ़ते हस्तक्षेप का खुलकर विरोध किया था।
कल एक बेटी, एक बहन , एक शादीशुदा महिला , एक माँ को जलील किया गया , गंदी गालियाँ दी गयीं , मारने के लिए चप्पल उठाया गया , मैंने अपने आत्मसम्मान से समझौता नहीं किया, सच का समर्पण नहीं किया , सिर्फ और सिर्फ इस वजह से मुझे बेइज्जती झेलनी पडी ..
— Rohini Acharya (@RohiniAcharya2) November 16, 2025
कल एक बेटी मजबूरी में अपने रोते हुए…
तेज प्रताप, जो पूरे चुनावी अभियान में RJD नेता संजय यादव के खिलाफ हमलावर रहे, परिवार के भीतर इस खिंचाव की प्रमुख वजह माने जा रहे हैं। रोहिणी का आरोप है कि तेजस्वी यादव, संजय यादव और रमीज के इशारे पर फैसले ले रहे हैं, जिससे परिवार और पार्टी दोनों में असंतोष पैदा हुआ।
परिवार से ‘निकाले जाने’ का लगाया गंभीर आरोप
शनिवार को रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा मैं राजनीति छोड़ रही हूं और अपने परिवार से नाता तोड़ रही हूं। संजय यादव और रमीज ने मुझसे यही करने को कहा था। मैं सारा दोष अपने ऊपर ले रही हूं।
मेरा कोई परिवार नहीं…
पटना एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने और भी गंभीर आरोप लगाए। रोहिणी ने कहा, ‘मेरा कोई परिवार नहीं है। संजय यादव, रमीज और तेजस्वी यादव ने ही मुझे परिवार से निकाल दिया। जब आप इनके नाम लेते हैं, तो आपको बेइज्जत किया जाता है, गालियां दी जाती हैं, यहां तक कि मारा भी जाता है। पार्टी क्यों हारी, इसकी जिम्मेदारी कोई नहीं लेना चाहता।’ उनके इस बयान ने एक बार फिर सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या लालू प्रसाद के बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य समस्याओं के चलते परिवार में नेतृत्व की लड़ाई चरम पर पहुंच चुकी है।
कौन हैं रोहिणी आचार्य?
रोहिणी आचार्य दिसंबर 2022 में तब सुर्खियों में आई थीं जब उन्होंने अपने पिता लालू प्रसाद यादव को किडनी दान की थी। सिंगापुर में रहने वाली रोहिणी ने 2024 लोकसभा चुनाव में सारण सीट से चुनाव लड़ा था। यह सीट कभी लालू यादव का राजनीतिक गढ़ माना जाता था। हालांकि, वे भाजपा नेता और पांच बार के सांसद राजीव प्रताप रूडी से हार गईं, लेकिन ‘किडनी देने वाली बेटी’ के नाम से वह लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय रहीं।
लालू परिवार में खींचतान चरम पर?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लालू परिवार में यह विवाद अचानक नहीं हुआ है। पार्टी में तेजस्वी के बढ़ते प्रभाव और संजय यादव जैसे करीबी सलाहकारों की भूमिका को लेकर परिवार के भीतर मतभेद कई वर्षों से उभरते रहे हैं। विशेषकर तेज प्रताप और रोहिणी, दोनों ही तेजस्वी के निर्णयों से असहमत रहे हैं।
बिहार चुनाव 2025 की करारी हार ने इस टूट को और तेज कर दिया है। अब रोहिणी आचार्य का राजनीति और परिवार से अलग होने का फैसला लालू परिवार की एकता और आरजेडी के भविष्य पर बड़े सवाल छोड़ गया है।



