190 करोड़ का चावल अटका: बिहार में धान खरीद में बड़ा संकट

बिहार में 190 करोड़ रुपये मूल्य का 58 हजार मीट्रिक टन चावल जमा नहीं हो पाया।

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पटना: बिहार में वर्ष 2024-25 में खरीदे गए धान से बने चावल को राज्य खाद्य निगम के गोदामों में जमा करने की अंतिम तिथि रविवार (10 अगस्त) को समाप्त हो रही है। बावजूद, अभी तक करीब 58 हजार मीट्रिक टन चावल जमा नहीं हो पाया है, जिसका मूल्य लगभग 190 करोड़ रुपये है।

चुनौतीपूर्ण है लक्ष्य

राज्य में इस वर्ष 39.23 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हुई थी, जिसके एवज में 26.62 लाख मीट्रिक टन चावल जमा करना था। शनिवार शाम तक 26.04 लाख मीट्रिक टन चावल ही जमा हो पाया था, यानी अंतिम दिन 58 हजार मीट्रिक टन चावल जमा करना सहकारिता विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती है।

कम जमा वाले जिले

चावल जमा करने की रफ्तार कई जिलों में काफी धीमी रही है। इनमें अररिया (93%), सारण (93.8%), मुजफ्फरपुर (96.6%), अरवल (96.5%), औरंगाबाद (96.7%) और गया (97.7%) शामिल हैं। वहीं, पटना (99.6%) और बेगूसराय (करीब 100%) जैसे कुछ जिलों में यह रफ्तार अच्छी रही है।

कार्रवाई की तैयारी

सहकारिता विभाग ने सभी जिलों को अंतिम दिन ज्यादा से ज्यादा मात्रा में चावल जमा करने का निर्देश दिया है। साथ ही, लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने का मन भी बना लिया है। अगर चावल जमा करने की तिथि नहीं बढ़ाई जाती है, तो 190 करोड़ रुपये मूल्य का धान पैक्सों और गोदामों में ही फंसा रह जाएगा।

धान खरीद और चावल जमा करने की प्रक्रिया

बिहार सरकार किसानों से धान खरीदती है। यह खरीद प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) और व्यापार मंडलों के माध्यम से होती है। खरीदे गए धान को फिर मिल मालिकों (राइस मिलर्स) को सौंपा जाता है। मिल मालिक इस धान को चावल में बदलते हैं और फिर यह चावल राज्य खाद्य निगम (SFC) के गोदामों में जमा किया जाता है। इसके बाद, इस चावल को सरकारी योजनाओं, जैसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS), के तहत लोगों तक पहुँचाया जाता है।

लक्ष्य पूरा न होना

बिहार में 2024-25 के लिए 26.62 लाख मीट्रिक टन चावल जमा करने का लक्ष्य था, लेकिन अंतिम तिथि (10 अगस्त) तक 58 हजार मीट्रिक टन चावल जमा नहीं हो पाया। इसका मूल्य करीब 190 करोड़ रुपये है।

समय सीमा का दबाव

चावल जमा करने की अंतिम तारीख 10 अगस्त थी। इस तारीख तक चावल जमा नहीं होने पर यह 190 करोड़ रुपये मूल्य का धान पैक्सों और मिलों में ही फंसा रह जाएगा, जिससे किसानों और मिल मालिकों को नुकसान हो सकता है।

जिम्मेदार कौन

खबर के मुताबिक, कुछ जिलों में चावल जमा करने की रफ्तार बहुत धीमी है। इस देरी के लिए सहकारिता विभाग ने लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है। गौरतलब है कि यह पूरा मामला सरकारी खरीद प्रक्रिया के सुचारू संचालन से जुड़ा है, जिसमें समय पर धान से चावल बनाकर उसे गोदामों में पहुंचाने में दिक्कत आ रही है। अगर समय पर चावल जमा नहीं होता है, तो इससे किसानों के भुगतान और सरकारी योजनाओं के लिए चावल की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है।

Sakshi Pal

sakshipal8700@gmail.com

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