नई दिल्ली।बिहार के नालंदा लोकसभा क्षेत्र से सांसद कौशलेंद्र कुमार ने उत्तर रेलवे के सतर्कता विभाग में कथित भ्रष्टाचार के मुद्दे को उठाया है। साथ ही विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल भी खड़े किए हैं। सांसद ने उन्हें प्राप्त एक शिकायत पत्र के आधार पर उत्तर रेलवे के संबंधित अधिकारियों को पत्र लिखकर मामले की जांच की मांग की है। साथ ही उन्होंने संकेत दिया है कि आवश्यकता पड़ने पर इस मुद्दे को संसद सत्र में भी उठाया जाएगा।
प्रिंस सेठी पर गंभीर आरोपों का उल्लेख
सांसद के लिखे पत्र में उत्तर रेलवे के सतर्कता विभाग में तैनात सतर्कता निरीक्षक प्रिंस सेठी पर गंभीर आरोपों का उल्लेख है। न्यूजी को मिले पत्र में कहा गया है कि शिकायतकर्ता मुकेश सिंह ने आरोप लगाया है कि संबंधित अधिकारी ने अपने कार्यकाल के दौरान पद का दुरुपयोग किया और भ्रष्ट आचरण में संलिप्त रहे। शिकायत के अनुसार, सतर्कता निरीक्षक ने कथित रूप से रेलवे कर्मचारियों को सतर्कता जांच, निरीक्षण अथवा मामलों में फंसाने की धमकी देकर धन उगाही की। आरोप सही पाए जाते हैं, तो इसे सतर्कता अधिकार का गंभीर दुरुपयोग माना जाएगा।
शिकायत पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि संबंधित अधिकारी ने अपने ज्ञात आय स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित की। शिकायत में जिन संपत्तियों का उल्लेख किया गया है, उनमें हरियाणा के पंचकुला (सेक्टर-05, जीएच-6/415) और पंजाब के जीरकपुर स्थित पीर मुच्छल्ला क्षेत्र के चिनार होम्स में आवासीय संपत्तियां शामिल हैं। आरोप है कि ये संपत्तियां अधिकारी की पत्नी सुमन बाला और उनके पुत्र के नाम पर खरीदी गईं। शिकायतकर्ता का कहना है कि उनकी पत्नी गृहिणी हैं और उनके पास इतनी महंगी संपत्तियां खरीदने के अनुरूप कोई स्वतंत्र आय स्रोत ज्ञात नहीं है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
लंबित मामलों का उल्लेख
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि संबंधित अधिकारी से जुड़े कुछ आपराधिक प्रकरणों की जांच सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) नई दिल्ली में (मामला संख्या जीडी/0069/27.08.2025) तथा पंजाब के पठानकोट में लंबित बताई गई है। इन मामलों की वर्तमान स्थिति को लेकर आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं हो सकी है।
रेलवे स्टैंडिंग कमेटी के सदस्य सांसद का यह भी कहना है कि इस प्रकार के भ्रष्ट अधिकारियों को संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर भी कारवाई होनी चाहिए। कर्मचारी हो या अधिकारी जो भी भ्रष्टाचार में लिप्त है उसपर ठोस कारवाई होनी चाहिए।
कार्यकाल विस्तार पर सांसद ने भी उठाया सवाल
कार्यकाल विस्तार पर सांसद ने भी उठाया सवालशिकायतकर्ता ने यह भी प्रश्न उठाया है कि गंभीर आरोपों के बावजूद सतर्कता विभाग में संबंधित अधिकारी के कार्यकाल को एक वर्ष के लिए बढ़ाया गया। शिकायत में आशंका जताई गई है कि संवेदनशील पद पर बने रहने से संभावित जांच प्रभावित हो सकती है या साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़ की आशंका उत्पन्न हो सकती है। सांसद को संबोधित शिकायत में मांग की गई है कि मामले की उच्चस्तरीय एवं स्वतंत्र जांच कराई जाए। साथ ही, संबंधित संपत्तियों के स्रोतों की पड़ताल, अधिकारी को सतर्कता विभाग से हटाकर गैर-संवेदनशील पद पर तैनाती, तथा कार्यकाल विस्तार के निर्णय की समीक्षा की मांग भी की गई है। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो में रेलवे सेक्शन अधिकारी पद के लिए उनके नामांकन को जांच पूरी होने तक स्थगित रखने की भी मांग की गई है।

सांसद का रुख, लोकसभा में उठाएंगे सवाल
सांसद कौशलेंद्र कुमार ने पत्र के माध्यम से मामले की गंभीरता पर ध्यान आकर्षित करते हुए निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर बल दिया है। उन्होंने संकेत दिया है कि यदि संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती है, तो वे इस विषय को संसद में उठाएंगे। आरोपों की पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं हो पाई है।
यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल एक अधिकारी विशेष बल्कि सतर्कता तंत्र की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर सकता है। वहीं, यदि आरोप निराधार साबित होते हैं, तो यह भी स्पष्ट होगा कि शिकायतों की जांच में संतुलन और निष्पक्षता कितनी महत्वपूर्ण है। फिलहाल मामला आरोप और प्रत्यारोप के चरण में है। अंतिम निष्कर्ष संबंधित जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आ सकेगा।



