नई दिल्ली | जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने मध्य पूर्व की वर्तमान विस्फोटक स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
उन्होंने कहा है कि अमेरिका और इजरायल की आक्रामक सैन्य कार्रवाइयों ने न केवल क्षेत्रीय शांति को भंग किया है, बल्कि पूरी दुनिया को एक बड़े युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर दिया है।
ईरान के नेतृत्व पर हमले की निंदा
मौलाना मदनी ने ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई और उनके सहयोगियों के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया। उन्होंने इसे अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों का उल्लंघन बताते हुए कहा:
- बर्बरता की ओर बढ़ती दुनिया: किसी देश की नेतृत्व व्यवस्था को निशाना बनाना दुनिया को अराजकता और बर्बरता की ओर धकेलने जैसा है।
- ईरान के साथ संवेदना: जमीयत उलेमा-ए-हिंद इस दुख की घड़ी में ईरान की जनता के साथ खड़ी है।
हालांकि, उन्होंने ईरान द्वारा क्षेत्र के अन्य देशों में की जा रही सैन्य कार्रवाइयों पर भी चिंता जताई और सभी पक्षों से शांति व समन्वय की अपील की।
“रक्तपात समाधान नहीं, कूटनीति ही रास्ता”
मौलाना मदनी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शक्ति के प्रदर्शन से कभी अंतरराष्ट्रीय विवादों का स्थायी समाधान नहीं हो सकता।
- त्रासदी का जन्म: सैन्य हमले केवल घृणा, प्रतिशोध और मानवीय संकट को जन्म देते हैं।
- संयुक्त राष्ट्र की भूमिका: उन्होंने संयुक्त राष्ट्र और विश्व शक्तियों से मांग की कि वे केवल दर्शक न बनें, बल्कि तत्काल युद्धविराम : और सार्थक वार्ता के लिए प्रभावी कदम उठाएँ।
वैश्विक परिणामों की चेतावनी
जमीयत अध्यक्ष ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि विश्व शक्तियों ने समय रहते बुद्धिमत्ता और न्यायपूर्ण संतुलन का परिचय नहीं दिया, तो इस युद्ध के दुष्परिणाम केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि पूरी दुनिया को इसकी भारी कीमत चुकानी होगी। उन्होंने दोहराया कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद हर उस कदम के खिलाफ है जो मानवता को अस्थिरता की ओर ले जाता हो।



