पटना: बिहार में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है और इसके साथ ही महापर्व छठ का रंग भी राजनीतिक प्रचार में घुल गया है। विभिन्न राजनीतिक दल छठ के पावन अवसर को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। भाजपा और जदयू ने छठ गीतों और एआई वीडियो के जरिए अपने नेताओं की उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाया, तो महागठबंधन के दलों ने प्रवासी बिहारियों के दर्द को उजागर कर भावनात्मक रणनीति अपनाई।
छठ गीतों में पीएम मोदी, सीएम नीतीश का जिक्र
चुनावी माहौल में छठ पर्व का उत्साह बिहार की राजनीति में अनोखा रंग घोल रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने फेसबुक पेज पर छठ गीत गाती महिलाओं का एक वीडियो साझा किया, जिसमें महिलाएं गाते हुए कहती हैं, “हमरो जे मोदी चाचा स कवन अइसन नेता हो उनके लागी… हमरो जे नीतीश चाचा स कवन अईसन नेता हो उनके लागी… हम करली छठ वरतिया हो उनके लागी।” यह गीत भाजपा और जदयू गठबंधन की एकता और नेतृत्व की प्रशंसा करता है। वहीं, जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने छठ के मौके पर एआई तकनीक का सहारा लिया। उनके फेसबुक पेज पर साझा एक एआई वीडियो में महिलाएं ठेकुआ बनाते हुए नीतीश कुमार की महिला रोजगार योजना की तारीफ करती हैं। वीडियो में एक महिला कहती है, “नीतीश की योजना से मिली पूंजी से ही हमने पूजा का सारा सामान जुटाया।” एक अन्य एआई वीडियो में मां-बेटी की भावुक बातचीत दिखाई गई, जहां बेटी छठ पर भाई की कमी महसूस करती है। तभी बेटा घर पहुंचता है और कहता है, “नीतीश की त्योहार स्पेशल बस सेवा ने घर लौटना आसान कर दिया।” महिला जवाब देती है कि इस बार वह हर छठ व्रती के साथ नीतीश के लिए प्रार्थना करेगी।
कांग्रेस ने हाउसफुल ट्रेनों को बताया मजदूर एक्सप्रेस
दूसरी ओर, महागठबंधन के दल प्रवासी बिहारियों की तकलीफों को उजागर कर जनता का ध्यान खींच रहे हैं। कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर “मजदूर एक्सप्रेस” के नाम से भीड़भाड़ वाली ट्रेनों की तस्वीरें साझा कीं, जिसमें राजस्थान, जम्मू जैसे दूरदराज क्षेत्रों से छठ के लिए लौट रहे प्रवासियों का दर्द बयां किया गया। एक प्रवासी ने बताया, “24 घंटे से शौचालय भी नहीं जा पाए हैं।” वीआईपी ने भी इसी तरह के वीडियो साझा कर प्रवासियों की व्यथा को रेखांकित किया। निष्कर्ष:
बिहार में छठ का पर्व और चुनावी माहौल एक-दूसरे में इस तरह घुलमिल गए हैं कि हर दल अपनी रणनीति को सांस्कृतिक और भावनात्मक रंग देने में जुटा है। जहां सत्तारूढ़ गठबंधन अपनी योजनाओं और नेतृत्व को छठ के प्रतीकों के साथ जोड़ रहा है, वहीं विपक्ष प्रवासियों की समस्याओं को उठाकर जनता से जुड़ने की कोशिश कर रहा है। इस रंगारंग प्रचार ने बिहार के चुनावी माहौल को और रोचक बना दिया है।



