पातेपुर सीट पर RJD-BJP में मुकाबला! जानिए क्यों खास है यह विधानसभा क्षेत्र

पातेपुर विधानसभा सीट बिहार की राजनीति में 1951 से अहम भूमिका निभाती आई है, जहां अब तक लगभग सभी प्रमुख दलों ने जीत का स्वाद चखा है। इस बार यहां राजद और भाजपा के बीच कांटे की टक्कर की संभावना है, जिसमें मतदाता आंकड़े और जातीय समीकरण निर्णायक रहेंगे।

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वैशाली: बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान हो चुका है, जिसमें पहला चरण 6 नवंबर और दूसरा चरण 11 नवंबर को होगा, जबकि मतगणना 14 नवंबर को होगी। इस बीच, वैशाली जिले का पातेपुर विधानसभा क्षेत्र, जो अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है, एक बार फिर सियासी चर्चा का केंद्र बन रहा है। अपने समृद्ध राजनीतिक इतिहास और जटिल जातीय समीकरणों के कारण यह सीट बिहार की सियासत में खास महत्व रखती है।

पातेपुर विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास

वैशाली जिले का पातेपुर विधानसभा क्षेत्र एक सामुदायिक विकास खंड है, जो 1951 से ही भारत के निर्वाचन मानचित्र पर एक विधानसभा क्षेत्र के रूप में मौजूद है। इसका राजनीतिक इतिहास कुछ विशेषताओं के कारण काफी दिलचस्प रहा है। साल 1952 से 1977 तक यह मुजफ्फरपुर दक्षिण लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा था। इसके बाद 1977 से 2009 तक यह हाजीपुर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत रहा। वर्ष 2009 से यह समस्तीपुर जिले की उजियारपुर लोकसभा सीट के छह विधानसभा क्षेत्रों में से एक बन चुका है, जो केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय के संसदीय क्षेत्र में आता है।

अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित

पातेपुर, वैशाली जिला मुख्यालय हाजीपुर से 40 किलोमीटर, समस्तीपुर से 45 किलोमीटर, मुजफ्फरपुर से 50 किलोमीटर और बिहार की राजधानी पटना से लगभग 60 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। पातेपुर विधानसभा क्षेत्र शुरू से ही अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित रहा है। वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में यहां कुल 2,90,677 पंजीकृत मतदाता थे, जिनमें से 67,321 (23.16%) अनुसूचित जाति और 45,927 (15.80%) मुस्लिम समुदाय के थे। यह एक पूर्णतः ग्रामीण क्षेत्र है, जहां शहरी मतदाताओं की संख्या शून्य है। 2024 के लोकसभा चुनावों में यहां के मतदाताओं की संख्या बढ़कर 3,05,375 हो गई है।

पातेपुर ने 19 बार चुनावों में भाग लिया

अब तक पातेपुर ने 19 बार चुनावों में भाग लिया है, जिनमें 1952 और 1991 के दो उपचुनाव भी शामिल हैं। इस सीट ने बिहार की लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक पार्टियों को मौका दिया है, जो राज्य की राजनीतिक यात्रा को दर्शाता है। कांग्रेस, राजद (RJD) और जनता दल ने यहां से तीन-तीन बार जीत दर्ज की है। जनता पार्टी, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और संयुक्त समाजवादी पार्टी को दो-दो बार सफलता मिली है, जबकि सोशलिस्ट पार्टी, प्रजा सोशलिस्ट पार्टी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) और लोक जनशक्ति पार्टी (LJP) ने एक-एक बार यह सीट जीती है।

साल 2020 में भाजपा के लखनेंद्र कुमार रौशन ने राजद के शिवचरण राम को 25,839 वोटों से हराकर यह सीट जीती थी। यदि पातेपुर की ऐतिहासिक परंपरा कायम रहती है, तो 2025 में यह सीट फिर से राजद की झोली में जा सकती है। हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनावों में पातेपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा ने 12,721 वोटों की बढ़त बनाई, जो इस क्षेत्र में भाजपा के सुदृढ़ हो रहे जनाधार की ओर संकेत करता है।

2015 का रोमांचक मुकाबला

2015 के विधानसभा चुनाव में राजद की प्रेमा चौधरी ने भाजपा के महेंद्र बैठा को मात्र 12 वोटों से हराया था। पिछले छह चुनाव इन्हीं दोनों प्रत्याशियों के बीच हुए हैं, और दोनों को तीन-तीन बार सफलता मिली है। भाजपा यहां से अब तक सिर्फ एक बार जीती थी, लेकिन 2020 में उसने तीसरी बार जीत दर्ज की। 2015 के विधानसभा चुनाव में 56.2 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था, जिसमें 50.5 प्रतिशत पुरुष और 60.2 प्रतिशत महिलाएं शामिल थीं।

जातीय समीकरण और क्षेत्र

जातीय समीकरण की बात करें तो इस सीट पर रविदास, पासवान, कुर्मी और कोइरी मतदाताओं का प्रभाव अधिक है। इनमें रविदास, पासवान और कुर्मी वोटर बहुसंख्यक हैं, जबकि कोइरी मतदाता भी अच्छी संख्या में मौजूद हैं। संसदीय और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन आदेश 2008 के अनुसार, पातेपुर निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत पातेपुर सामुदायिक विकास खंड, मानसिंहपुर बिजरौली, कुमार बाजितपुर, राघोपुर नरसंडा, अदलपुर, नारी खुर्द और जंदाहा विकास खंड के क्षेत्र आते हैं।

पातेपुर विधानसभा क्षेत्र में मतदाता

SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) प्रक्रिया के बाद जारी मतदाता सूची के अनुसार, पातेपुर विधानसभा क्षेत्र में पुरुष मतदाताओं की संख्या 1,57,175, महिलाओं की संख्या 1,41,935 और थर्ड जेंडर मतदाता 0 हैं। कुल मतदाताओं की संख्या 2,99,110 है।

बीजेपी और राजद में मुकाबला

ऐतिहासिक रुझानों को देखते हुए 2025 में पातेपुर में कांटे की टक्कर की उम्मीद है। संभावना है कि मौजूदा भाजपा विधायक लखनेंद्र रौशन और राजद की प्रेमा चौधरी के बीच फिर से मुकाबला होगा। हालांकि, भाजपा का हालिया प्रदर्शन और लोकसभा चुनाव में बढ़त इसे आत्मविश्वास दे रही है, वहीं राजद अपने पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश में है।

Sandeep Kumar

sandeepx4a@gmail.com

संदीप कुमार एक अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें समाचार जगत में 14 साल से ज्यादा काम किया है। इन्हें गहन शोध, सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए जाना जाता है। उन्होंने ETV Bharat, Hyderabad में साढ़े पाँच वर्षों तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और राष्ट्रीय से लेकर क्षेत्रीय स्तर तक कई अहम खबरों को प्रभावशाली अंदाज में प्रस्तुत किया। इसके साथ ही उन्होंने Network 10, TOTAL News, MH1 समेत कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी अपनी पत्रकारिता का कौशल साबित किया। राजनीति, राष्ट्रीय सुरक्षा, समाज और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर पकड़ मजबूत है। इस समय newG india में कार्यरत हैं।

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