नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) ने बुधवार को कहा कि बिहार मतदाता सूची का मसौदा एक अगस्त को प्रकाशित होने के बाद से किसी भी राजनीतिक दल ने उसमें नाम शामिल करने या हटाने के लिए उससे संपर्क नहीं किया है। जबकि ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 65 लाख लोगों के नाम हटाए गए हैं। चुनाव आयोग ने स्पष्ट कहा है कि सभी दावे और आपत्तियां 7 दिन में निपटाई जानी चाहिए। 1 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची से कोई भी नाम बिना जांच और सुनवाई के नहीं हटाया जाएगा।
बिहार में चल रहे स्पेशल समरी रिवीजन यानी SIR 2025 के तहत चुनाव आयोग के मुताबिक, 1 अगस्त दोपहर 3 बजे से 6 अगस्त सुबह 9 बजे तक यानी 6 दिन की अवधि में किसी भी राजनीतिक दल के बूथ लेवल एजेंट (BLA) की ओर से एक भी आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई। हालांकि, आयोग के निर्देश के बाद राज्य में सभी 12 मायता प्रात राजनीतिक दलों के 1 लाख 60 हजार 813 बूथ लेवल एजेंटस (बीएलए) नियुक्त हैं। जिसमें राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के 47,506 बूथ-लेवल एजेंट हैं। कांग्रेस के 17,549 और वाम दलों के 2,000 से ज्यादा बीएलए हैं। कुल मिलाकर 67,000 से या ज्यादा एजेंट हैं।
इस दौरान 3659 मतदाताओं ने सीधे तौर पर शिकायत की कि उनका नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से गलत तरीके से हटा दिया गया है। इसके अलावा 19186 नए फॉर्म-6 आवेदन मिले हैं, जो ऐसे युवाओं के हैं जिन्होंने हाल ही में 18 वर्ष की आयु पूरी की है या जल्द पूरी करने वाले हैं और पहली बार मतदाता सूची में शामिल होना चाहते हैं।
चुनाव आयोग ने साफ तौर पर कहा है कि सभी दावे और आपत्तियां 7 दिन में निपटाई जानी चाहिए। 1 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची से कोई भी नाम बिना जांच और सुनवाई के नहीं हटाया जाएगा। चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे अपने BLA के माध्यम से सक्रियता दिखाएं और वास्तविक मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित करें।
इससे पहले बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जहां एक ओर राजनीतिक दलों के बीच तीखी बयानबाजी जारी है। महागठबंधन के दल खास तौर पर आरजेडी और कांग्रेस चुनाव आयोग और केंद्र सरकार पर समर्थक मतदाताओं के नाम सूची से हटाने और एनडीए (भाजपा गठबंधन) के पक्ष में चुनावी फायदा पहुंचाने का आरोप लगा रही है। वहीं भारत निर्वाचन आयोग मतदाताओं को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराया है। आयोग ने बिहार में जारी की गई प्रारूप मतदाता सूची को लेकर स्पष्ट किया है कि किसी भी योग्य मतदाता को सूची से बाहर नहीं रखा जाएगा और न ही किसी अयोग्य व्यक्ति को शामिल किया जाएगा।
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चुनाव आयोग राज्य के मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीण (एसआईआर) को लेकर पहले चरण की प्रक्रिया पूरी कर चुका है। अब, दूसरे चरण में प्रारूप मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद दावा एवं आपत्ति प्राप्त कर उसके निपटारे की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। एक सितंबर तक यह प्रक्रिया जारी रहेगी। इसके बाद अगले 30 दिनों में मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन की तैयारी की जाएगी और 30 सितंबर को मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन कर दिया जाएगा। आयोग सूत्रों के अनुसार, ईपिक वितरण को लेकर अब तक कोई कार्यक्रम तय नहीं किया गया है लेकिन इतना तय है कि सभी मतदाता को नया ईपिक प्रदान किया जाएगा।



