पटना: बिहार की धरती पर सियासी तापमान अचानक चढ़ गया है। जहां एक तरफ NDA और महागठबंधन सीट बंटवारे की जद्दोजहद में उलझे हैं, वहीं असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने शनिवार को 32 प्रत्याशियों की पहली सूची जारी कर दी। पार्टी ने सीमांचल के मुस्लिम बहुल इलाकों पर अपने उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा है। जिसमें किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया जैसे संवेदनशील क्षेत्र प्रमुख हैं।
पार्टी के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने पटना में संवाददाता सम्मेलन में इस लिस्ट को ‘न्याय यात्रा का पहला कदम’ बताया। उन्होंने कहा “हम न NDA के भ्रष्टाचार के ढेर पर चढ़ेंगे, न महागठबंधन के झूठे वादों के जाल में फंसेंगे। AIMIM बिहार के वंचितों, खासकर मुस्लिम और पिछड़े वर्गों की आवाज बनेगी।
2020 में AIMIM सीटों पर जीत दर्ज की थीप
2020 में हमने 5 सीटें जीतीं, इस बार 100 सीटों पर चुनाव लडेंगे। अब वोट काटने का ठप्पा लगाने वाले सोच लें हम तीसरा विकल्प हैं। इमान ने कहा। याद रहे, 2020 में AIMIM की एंट्री ने महागठबंधन के वोटों को बांट दिया था, जिससे कई सीटों पर NDA को फायदा हुआ। लेकिन अब, 2022 में चार विधायकों के RJD में चले जाने के बाद, पार्टी अकेले दम पर मैदान में उतर रही है। इस लिस्ट में कई चेहरे ऐसे हैं जो स्थानीय मुद्दों से जुड़े हैं।
उदाहरण के लिए, किशनगंज जिले की कोचाधामन सीट से मौजूदा विधायक मुहम्मद इजहार आसफी को फिर से मैदान में उतारा गया है, जिन्होंने 2020 में JD(U) के मुजाहिद आलम को 36,143 वोटों से हराया था। इसी तरह, अमौर से अब्दुल जलील, ठाकुरगंज से मोहम्मद नजामुल हक जैसे दिग्गजों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। पूर्णिया के धमदाहा से नई उम्मीद रानी जहां स्थानीय बाढ़ प्रभावितों के मुद्दे उठाएंगी, वहीं कटिहार के प्राणनगर से युवा चेहरा फैसल हुसैन को मौका मिला है, जो बेरोजगारी और प्रवासन पर फोकस करेंगे। ये नाम न सिर्फ पार्टी की जड़ें मजबूत करते हैं, बल्कि महिलाओं और युवाओं को आगे लाने की कोशिश भी दिखाते हैं।
लिस्ट में 8 महिलाओं और 12 युवाओं को मौका
AIMIM बिहार प्रदेश अध्यक्ष जनाब @Akhtaruliman5 ने प्रेस वार्ता के ज़रिए पहली सूची जारी की, जिसमें यह बताया गया कि पार्टी किन विधानसभा क्षेत्रों से चुनाव लड़ेगी।
— AIMIM (@aimim_national) October 11, 2025
पहली सूची इस प्रकार है:
जिला किशनगंज: बहादुरगंज, ठाकुरगंज, कोचाधामन और किशनगंज विधानसभा
जिला पूर्णिया: अमौर, बायसी और… pic.twitter.com/eHd7AJiaug
सूची में 8 महिलाएं और 12 युवा प्रत्याशी शामिल हैं।लेकिन सवाल यह है कि क्या AIMIM वाकई ‘तीसरा फ्रंट’ खड़ा कर पाएगी? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी का फोकस सीमांचल पर है, जहां 2020 में 40% से ज्यादा वोट शेयर मिला था। सियासी जानकारों का कहना है कि ओवैसी का हाइपरनेशन खत्म हो गया है। वे अब बिहार को महाराष्ट्र या तेलंगाना की तरह मुस्लिम-केंद्रित राजनीति का हॉटस्पॉट बनाना चाहते हैं। लेकिन वोट ट्रांसफर का खेल उल्टा पड़ सकता है। अगर मुस्लिम वोट एकजुट हो गए, तो महागठबंधन को फायदा। दूसरी ओर, RJD के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, यह फिर वही पुरानी चाल है। ओवैसी साहब को हमारी जरूरत नहीं, लेकिन उनकी मौजूदगी हमें महंगी पड़ेगी। चुनाव आयोग के अनुसार, बिहार में दो चरणों में मतदान 6 और 11 नवंबर को होगा, जबकि 14 नवंबर को नतीजे आएंगे। AIMIM की यह चाल न सिर्फ गठबंधनों के समीकरण बिगाड़ सकती है, बल्कि बेरोजगारी, बाढ़ और अल्पसंख्यक अधिकार जैसे मुद्दों को नई ऊंचाई दे सकती है। ओवैसी ने एक्स पर कहा बिहार के भाइयों-बहनों, न्याय की लड़ाई में साथ दो। अब देखना यह है कि यह लिस्ट चुनावी अखाड़े में कितना धमाल मचाती है। क्या बिहार की सियासत अब त्रिकोणीय हो जाएगी? वक्त ही बताएगा।



