नई दिल्ली: 27 साल के बनवास के बाद दिल्ली की सत्ता में लौटी बीजेपी की सरकार लगातार एक्टिव है। एक के बाद एक फैसले लिए जा रहे हैं। न सिर्फ मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता बल्कि उनकी कैबिनेट के मंत्री भी लगातार सड़कों पर नजर आ रहे हैं। लेकिन इन प्रयासों का कब असर दिखेगा ? सरकार दिल्ली वालों के लिए क्या करने जा रही है ? इन सभी सवालों पर न्यू जी इंडिया के एडिटर इन चीफ नवनीत शरण ने बात की दिल्ली के संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा से। पेश हैं, उसी बातचीत के कुछ अंश
सवाल : अपने राजनीतिक सफर के बारे में कुछ बताइए? अगर राजनीति में नहीं होते तो क्या कर रहे होते ?
जवाब : मेरा राजनीतिक सफर तो सार्वजनिक है। लेकिन उससे पहले एक्टिविज्म का एक बहुत बड़ा दौर रहा है। डीयू से मैंने मास्टर्स इन सोशल वर्क दिल्ली स्कूल ऑफ सोशल वर्क से मैंने पढ़ाई की है। उसी वक्त जेसिका लाल हत्याकांड पर जो फैसला आया था नो वन किल्ड जेसिका। इस मामले में आंदोलन की शुरुआत की। ऐसा कह सकते हैं कि एक्टविज्म की दिशा में मेरा पहला कदम था। मेरा पहला अनुभव भी था और तब से लेके आज तक मैं राजनेता कम और एक्टिविस्ट ही ज्यादा हूं। अगर मैं औपचारिक राजनीति में नहीं भी होता तो पर्यावरण, नदी, जंगल या किसी अन्य सामाजिक विषय पर काम कर रहा होता।
सवाल : और वह कौन से ऐसे राजनेता रहे, जिन्हें देखकर आपको लगा कि राजनीति में आना चाहिए ?
जवाब : नहीं देखिए हम लोग हम लोग गवाह हैं राजनीति के परिवर्तन के। देश ने एक 3014 से पहले और दूसरी 2014 के बाद की राजनीति देखी है। पहले की पारंपरिक राजनीति थी, जिसमें कांग्रेस को महारत हासिल थी। उसनें कई अच्छे नेता भी निकले। लेकिन वो एक खास तरह की राजनीति थी। लेकिन 2014 के बाद की जो राजनीति है, वह टारगेट आधारिति है। रोजाना क्या करना है, किन लोगों से मिलना है, किन वर्गों तक जाना है और किन विषयों पर काम करना है? आम आदमी की आवाज भी सुनी जाए और ग्राउंड लेवल पर डिलीवर भी किया जाए। दरअसल, पीएम मोदी ने देश के सामने एक नया मॉडल रखा है, जिसमें आराम नहीं है। नतीजा महत्वपू्र्ण हो चुका है। सिर्फ बोलना ही काफी नहीं है बल्कि परिणाम भी देने होंगे।
सवाल : आप एक्टिविस्ट थे तो उस वक्त करप्शन के खिलाफ आंदोलन भी चला और फिर आंदोलन करने वालों ने पार्टी बनाई। चुनाव जीतकर सरकार भी बनाई। उस पर भी करप्शन का आरोप लगा ? आप भी उसी पार्टी में थे। वहां आपने क्या देखा ?
जवाब : दिल्ली के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों के खिलाफ सीधे मेरी करप्शन के मुद्दे पर लड़ाई हुई है। इनमें एक शीला दीक्षित थीं और दूसरे अरविंद केजरीवाल। जब यमुना रिवर बेड में ही कॉमनवेल्थ गेम्स विलेज बना गया तो उसके खिलाफ मैनें आंदोलन किया। फिर गेम्स में भ्रष्टाचार हुआ और इंडिया अगेंस्ट करप्शन की स्थापना हुई। उस आंदोलन से भी मैं जुड़ा। इस आंदोलन के बाद आम आदमी पार्टी बनी, चुनाव लड़ी और सरकार बनी। लेकिन बाद में देखा कि ये पार्टी भी करप्शन और भाई भतीजवाबाद के रास्ते पर चल पड़ी। तो अरविंद केजरीवाल के करप्शन के खिलाफ भी मैनें आवाज उठाई।
सवाल : पहले आप आंदोलन करते थे लेकिन अब तो आप खुद सरकार का हिस्सा हैं। ऐसे में अब आप पर्यावरण व अन्य मुद्दों को किस रूप में देखते हैं ?
जवाब : पहले और अब में अंतर आ गया है। पहले सामाजिक कार्य करते थे। मुद्दों को उठाते थे, मांग करते थे। आंदोलन भी करते थे। लेकिन अब राजनीति और खासतौर पर सरकार में आने के बाद ऐसे मुद्दों को उनके अंजाम तक पहुंचा सकते हैं। अब रिजल्ट की भी जिम्मेदारी है। दिल्ली के बेसिक इंफ्रॉस्ट्रक्चर को ठीक करना है। अब हमें दिल्ली को ऐसे नतीजे देने हैं, जिसकी उम्मीद दिल्ली वाले वर्षों से कर रहे ळैं।
सवाल : तो क्या इस बार दिल्ली वालों को प्रदूषण से कुछ राहत मिलेगी ?
जवाब : निश्चित तौर पर मिलेगी। प्रधानमंत्री गृहमंत्री दोनों ही दिल्ली के लिए मिशन बनाकर कार्य कर रहे हैं और सरकार का लगभग हर महीने रिव्यू करते हैं। खुद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी मेहनत कर रही हैं।
सवाल : जब अरविंद केजरीवाल मुख्यमंत्री थे, तब उनके साथ भी तो काम किया है?
जवाब : जी, मैनें केजरीवाल के साथ भी काम किया है और मौजूदा मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ भी कर रहा हूं। लेकिन दोनों की कार्यशैली, उर्जा और समर्पण में जमीन आसमान का अंतर है। केजरीवाल की समझ एक दो विषयों तक ही सीमित थी और उन्हें लगता था कि फ्रीबीज देकर ही वोट मिल जाएंगे। वे करप्ट लोगों से घिरे थे और अपने एमएलए तक से दूरी बनाकर चलते थे।
वहीं मौजूदा मुख्यमंत्री है, जो पूरी कैबिनेट को प्रतिदिन साथ लेके चल रही हैं। संगठन में सभी लोगों से लगातार उनका संपर्क दिखता है। केजरीवाल ने अपना शीशमहल बनाया तो अंदर अपने एमएलए तक को जाने नहीं दिया लेकिन मौजूदा सीएम ने एक साधारण सरकारी घर लिया तो वहां किसी पर रोक नहीं लगाई। मीडिया खुद अंदर जाता है, कहीं किसी पर रोक टोक नहीं। पूरी सरकार एक समयबद्ध तरीके से काम कर रही है ताकि लोगों की उम्मीदों को पूरा किया जा सके। हम चाहते हैं कि यमुना भी साफ हो और दिल्ली का बुनियादी ढांचा भी मजबूत बने।
सवाल : आपकी माता जी भी तो पॉलिटिशियन रह चुकी हैं ? उनसे भी कुछ गाइडेंस लेते हैं ?
जवाब : हर दिन गाइड ना भी करें तो मैं उनको देखकर ही बहुत कुछ सीखता हूं। देखिए मैं आपको बताता हूं। मेरी जो राजनीतिक यात्रा है उसमें मेरी माताजी का बहुत बड़ा हाथ है। मेरी माताजी भारतीय जनता पार्टी से पूर्वी दिल्ली नगर निगम की पहली मेयर रही हैं। लेकिन आज भी जनता समाज के लोग उनसे उन उन तक ज्यादा जाते हैं। मेरे तक कम आते हैं। ऐसे हजारों लोग हैं जो हर बार महीने में उनसे मिल रहे हैं। लगातार जनसपर्क में हैं। क्षेत्र की समस्याएं और दिल्ली के मुद्दे जब मैं शाम को घर जाता हूं तो मुझसे ज्यादा जानकारी उनके पास होती है कि कहां क्या आवश्यकता है।
सवाल : जैसे कि आप धार्मिक भी हैं। ईश्वर को किस तरीके से डिफाइन करते हैं आप?
जवाब : ये परम शक्ति है जो कण-कण में विद्यमान है और मुझे लगता है कि देखिए हमारे धर्म में दो-तीन चीजें हैं जिसको घूम फिर कर सभी को मानना ही पड़ता है। ईश्वर की परम सत्ता कण-कण में उनका अस्तित्व और मुझे ऐसा मैंने अपने जीवन में साक्षात भी यह चीज महसूस किया है कि अंत में आपको ईश्वर ही चलाता है।
सवाल : बिल्कुल जैसे कि दिल्ली जो है दिल्ली की सांस्कृतिक रवायतें जो हैं काफी गहरी हैं तो बतौर जो है सांस्कृतिक मंत्री किस तरीके से दिल्ली की समृद्धि
जवाब : मेरा यह मानना है कि दिल्ली केवल राजनीतिक राजधानी नहीं …होनी चाहिए। सांस्कृतिक राजधानी भी दिल्ली ही है और होनी ही चाहिए। दिल्ली में अब छठ पूजा से लेकर जगन्नाथ की यात्रा उसी भव्य तरीके से होती है, जैसी बिहार या ओडिसा में होती है। यानी प्रतीकात्मक नहीं बल्कि पूरे भव्य तरीके से आयोजन होते हैं।
सवाल : इस बार या अगले साल दिल्ली की जनता और पूरे पूर्वांचल के जनता ये छठ पूजा जो है वो यमुना में कर पाएंगे?
जवाब : कोशिश है कि इसी साल क्योंकि देखिए कोर्ट ने एक कोई आदेश निकाला है जो इससे प्रतिबंधित करता है लेकिन हम सरकार के तौर पर मुख्यमंत्री महोदय ने निर्देश दिया है कि हम कोर्ट में इस आदेश को चैलेंज करेंगे और छठ एक ऐसा त्यौहार है जो बहते हुए पानी के किनारे ही करें तो वो वही भक्तों की आस्था है यमुना के तट पर छठी मैया का पूजा की जाए और छठी मैया की पूजा में कोई नदी में कुछ भी प्रदूषण नहीं होता कुछ भी गलत नहीं होता तो यह हम कोर्ट को बताने की इस बार कोशिश करेंगे और दो चीजें मैं आपको बताना चाहता हूं। एक तो 12 किलोमीटर लंबा छठ घाट शायद वह देश का सबसे लंबा छठ घाट होगा। यह हम लोगों ने बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उसका फंड भी आ चुका है और हम इसी छठ पूजा से पहले उस घाट को पूरा करेंगे। ऐसा मुख्यमंत्री जी ने निर्देश दिया है। दूसरा यमुना मैया के किनारे छठ पूजा की तैयारियों में हम लोग लगे हुए हैं और कोर्ट से उसका एक एक्सेप्शन लेकर आए। इसके लिए भी हम लोग प्रयास करने जा रहे हैं।
सवाल : बिल्कुल। अब थोड़ा सा आपके निजी जीवन के बारे में कि फिल्म देखते हैं?
जवाब : हां, फिल्म देखता हूं मैं। जी मौका जब भी मिलता है तो देखता ही हूं।
सवाल : कौन सा फिल्म अभी तक सबसे बेहतर लगा आपको?
जवाब : कई सारी फिल्में देखी हैं। उसमें अब मेरे को नाम याद नहीं आ रहा। विल स्मिथ का एक मूवी है। मेरे को नाम नहीं याद आ रहा लेकिन वो विल स्मिथ और उसके बेटे हीरो है। फिल्म का नाम मेरे को याद आ गया पर्स्यूट ऑफ हैप्पीनेस अच्छा पर्स्यूट ऑफ़ हैप्पीनेस मेरे को अभी मैं कई बार देख चुका हूं और मुझे बहुत शानदार फिल्म लगती है।
सवाल : हीरो कौन से पसंद है?
जवाब : मेरे को ऐसा कोई विशेष तो कोई बहुत अलग से हीरो हो कोई पसंद नहीं है। लेकिन हां फिल्में देश से जुड़ी हो, समाज से जुड़ी हो ऐसी फिल्में भी पसंद है और रोमांटिक फिल्में भी पसंद है और साइंस फिक्शन मेरे को बहुत पसंद है। मार्वल्स की कोई मूवी ऐसी मुश्किल ही होगी जो मैं ना देखता हूं। तो और उसके अलावा मतलब मौका मिलता है तो फिल्में वेब सीरीज सीरीज तो देखते ही हैं और हीरोइन हीरोइन की भी उतनी जानकारी है दो हीरोइनों की फोटो सामने रख दूं मैं शायद पहचान ना पाऊं तो कई बार मेरे घर में मेरा मजाक भी उड़ाया जाता है इस बात का।
सवाल : और खानपान में क्या सबसे ज्यादा पसंद आता है ?
जवाब : दाल चावल अरहर की दाल हो चावल हो भिंडी की सब्जी हो आलू की भुजिया हो और घी डला हुआ हो तो बस अमृत है।
सवाल : उसके अलावा तो फिर और दिनचर्या कैसा रहता है आपका?
जवाब : दिनचर्या अच्छा है। सामाजिक जीवन है। सुबह से लोगों से मिलना। फिर सचिवालय जाना। सचिवालय में मुख्यमंत्री महोदय कोई ना कोई मीटिंग रोज कैबिनेट के साथ या मंत्रालयों के रिव्यु करती ही हैं। और उसके बाद शाम के जो भी हमारे सार्वजनिक कार्यक्रम होते हैं मंत्रालय से संबंधित मेरे करावल नगर विधानसभा से संबंधित तो देर रात तक वो सबभी चलता है और बीच में कुछ स्वाध्याय का समय निकालने की हर दिन कोशिश करता हूं।



