नई दिल्ली: बिहार चुनाव में NDA और महागठबंधन ने अपने -अपने कोर वोटर्स का ख्याल रखते हुए टिकट का बंटवारा किया है। एनडीए ने खुलकर ‘अगड़ा कार्ड’ खेला है। ब्राह्मण, राजपूत, भूमिहार और कायस्थ- इन चार जातियों पर सीधा फोकस करते हुए राजग ने कुल 36% टिकट इन्हीं जातियों को थमा दिए हैं। भाजपा ने 49, जदयू ने 22, लोजपा ने 10 और आरएलएम और हम ने 2-2 सीटों पर इस वर्ग से जुड़े उम्मीदवार उतारे हैं।
राजपूत-भूमिहार पर ख़ास ध्यान
NDA खेमे से सबसे अधिक सीटें राजपूत समुदाय को मिली है। NDA ने 37 राजपूत, 34 भूमिहार, 14 ब्राह्मण और 2 कायस्थ को टिकट दिया है। बिहार में राजपूत की आबादी 3.45 फीसदी तो भूमिहारों की 2.86 फीसदी है लेकिन इन्हें इतनी सीटें इसलिए दी गई क्योंकि करीब 80 सीटों पर इन लोगों का प्रभाव है।
कांग्रेस ने भूमिहार को साधा
महागठबंधन खेमे में झांककर देखें तो कांग्रेस ने 19 सवर्णों को टिकट दिया है, इसमें 8 भूमिहार जाति से हैं। पार्टी ने 6 ब्राह्मण और 5 राजपूतों पर भरोसा जताया है। इसके अलावा कांग्रेस ने 10 सीटें ओबीसी में बांटी है, अति पिछड़े वर्ग के हिस्से में 6 सीटें आई है और दलितों को 9 सीटों पर उतारा है। कांग्रेस की लिस्ट में 5 मुस्लिम प्रत्याशी भी हैं।
राजद का यादव पर भरोसा
कांग्रेस के सहयोगी दल RJD ने अपने आधे से ज्यादा उम्मीदवार यादव उतारे हैं। राजद ने 51 सीटों में से 28 पर यादवों को उम्मीदवार बनाया है। 6 मुस्लिमों को टिकट दिया है। भूमिहार और ब्राह्मण समुदाय से 3-3 उम्मीदवारों को उतारा है। साफ़ दिख रहा है कि राजद का जातीय समीकरण MY यानी मुस्लिम और यादव पर आधारित है।
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अन्य पार्टियों का हाल
महागठबंधन के अन्य दल यानी CPI(ML), CPI और CPM ने अब तक 29 सीटों पर प्रत्याशी उतारे हैं। इसमें 15 सीटें ओबीसी समुदाय को मिले हैं। दो भूमिहार, 2 मुस्लिम और 8 दलितों को उम्मीदवार बनाया है। लेफ्ट दलों ने अपनी छवि के अनुरूप सामाजिक न्याय और वर्गीय संतुलन की विविधता को बनाये रखा है।



