बिहार में भी एनडीए की ढाल बनेंगी शिलान्यास व योजनाएं?

महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव का अनुभव बताता है कि डाइरेक्ट बेनिफिट वाली योजनाएं चुनाव में फायदा जरूर पहुंचाती हैं। बिहार में भी लगातार योजनाओं को पहुंचाने के साथ ही डबल इंजन सरकार लोगों की भावनाओं को भी खुद से जोड़ने की कोशिश में लगी है। वरिष्ठ पत्रकार उपेन्द्र नाथ राय की रिपोर्ट-

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पटना: अभी पिछले साल की ही बात है। महाराष्ट्र का चुनाव था, जो राजनीतिक उठापटक के बीच हो रहा था। सभी अनुमान लगा रहे थे कि एनडीए की सरकार नहीं बनेगी। उद्धव ठाकरे और कांग्रेस जश्न मना रहे थे। हरियाणा में भी उलटा हुआ। इसका कारण था चुनाव से छह माह पूर्व की धनवर्षा, जिसका अनुमान राजनीतिक पंडित नहीं लगा पाए और सत्ता में बैठे लोगों ने लागू कर दिया।

महाराष्ट्र में महिलाओं से लेकर युवाओं तक डायरेक्ट लाभ पहुंचाए गए। कुछ ऐसी ही स्थिति अब बिहार में है, जहां प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री लगातार छह माह से योजनाओं की बारिश करने में व्यस्त हैं। विपक्ष चिल्ला रहा है, लेकिन सत्ता पक्ष धन और भावनाओं पर सीधा प्रभाव डाल रहा है। इसे कहा जा सकता है कि हर व्यक्ति के दिल में भावनात्मक रूप से जुड़ने के साथ ही उन्हें यह आभास भी हो रहा है कि केवल बातें नहीं, बल्कि काम में लगातार प्रगति हो रही है।

प्रधानमंत्री लगातार दौरे कर दे रहे सौगात

नीतीश कुमार की सरकार ने पिछले छह महीनों में मुफ्त बिजली, बेरोजगार युवाओं को भत्ता, महिलाओं और मजदूरों को नकद सहायता सहित तमाम लोकलुभावनी योजनाओं की घोषणा की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस दौरान लगातार दौरे किए। 15 सितंबर को प्रधानमंत्री ने 40,000 करोड़ रुपये से होने वाले विकास कार्यों का पूर्णिया में शिलान्यास किया।

18 जुलाई को मोतिहारी में 7,000 करोड़ रुपये से विकास कार्यों का लोकार्पण और शिलान्यास हुआ। 22 अगस्त को गया में 12,000 करोड़ रुपये की सौगात दी गई। 20 जून को सीवान में 5,700 करोड़ रुपये की लागत वाली विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया।

मई में पटना के कार्यक्रम में 50,000 करोड़ रुपये की सौगात दी गई। 24 अप्रैल को प्रधानमंत्री ने मधुबनी में राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस के अवसर पर 13,480 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया। साथ ही बिहार में अमृत भारत एक्सप्रेस और नमो भारत रैपिड रेल को हरी झंडी दिखाई। इससे पूर्व 24 फरवरी को पीएम भागलपुर गए और वहां पीएम किसान सम्मान निधि योजना की किस्त जारी की। इस अवसर पर मखाना बोर्ड के गठन का एलान हुआ और चार नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट बनाने की घोषणा भी की गई।

मजदूर, महिला व बेरोजगार, सबको लुभाया

नीतीश कुमार द्वारा शुरू की गई मुफ्त योजनाओं में शामिल हैं:-

  • हर घर को 125 यूनिट मुफ्त बिजली
  • बेरोजगार स्नातकों को 1,000 रुपये प्रतिमाह भत्ता
  • मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना
  • निर्माण मजदूरों को 5,000 रुपये वस्त्र-भत्ता
  • आंगनबाड़ी-आशा कार्यकर्ताओं का भत्ता बढ़ाना

राजकोषीय घाटा, पर नहीं है चिंता

हालांकि इन योजनाओं का राज्य के विकास पर असर पड़ सकता है। 2024-25 में घाटा अचानक 9 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गया था। मुफ्त बिजली और नकद भत्तों जैसी घोषणाओं से इस साल कम से कम 9 से 12 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च अनुमानित है। बावजूद इसके सरकार केवल वोट पर ध्यान दे रही है।

बिजली मुफ्त, 4000 हजार करोड़ का अतिरिक्त बोझ

सरकार आंकड़ों के मुताबिक मुफ्त बिजली योजना से सरकार पर सालाना 3,000 से 4,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। पहले ही बिहार सरकार बिजली कंपनियों को सब्सिडी के तौर पर 15,000 करोड़ रुपये से ज्यादा देती है।

10 हजार देकर महिलाओं को लाभ

सरकार ने 1.5 करोड़ महिलाओं के खाते में राज्य सरकार ने पहली किस्त के तौर पर 10-10 हजार रुपये उनके खाते में भेज दिया। पहले चरण में ही 15,000 करोड़ रुपये का खर्च हुआ है। आगे चलकर कुछ चयनित महिलाओं को 2 लाख रुपये तक की सहायता भी दी जा सकती है। यानी इस योजना का बोझ भविष्य में और बढ़ सकता है। इसको लेकर विपक्ष काफी हमलावर है और इसे घूस देने की दृष्टि से विपक्ष देख रहा है।

1000 रुपये देकर बेरोजगारों को लुभाने की कोशिश

नीतिश कुमार ने स्नातक बेरोजगार युवाओं के लिए भी दो साल तक हर माह एक हजार रुपये दिये जाने की घोषणा की है। यह युवाओं को लुभाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। यदि 10 लाख युवाओं ने आवेदन किया तो सालाना खर्च लगभग 1,200 करोड़ रुपये होगा और अगर संख्या दोगुनी हुई तो यह बोझ 2,400 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

इसके अलावा नीतिश कुमार की निर्माण मजदूरों को 5,000 रुपये का वस्त्र-भत्ता देने की योजना है। इस योजना के तहत पहले ही 802 करोड़ रुपये डीबीटी के रूप में ट्रांसफर किए जा चुके हैं। वहीं, सरकार ने आंगनबाड़ी, आशा और स्वास्थ्यकर्मियों के लिए भत्ता और इंसेंटिव बढ़ाने की घोषणा की है। विकास मित्रों और शिक्षा सेवकों को स्मार्टफोन, टैबलेट और भत्ता – इसका बोझ भी राजस्व खर्च में शामिल होगा।

समाजशास्त्री की राय

समाजशास्त्री डा. विकास कुमार का कहना है कि लोकलुभावन योजनाओं का असर पड़ना स्वाभाविक है। हर व्यक्ति समाज के कम, स्वयं के स्वहित को अधिक देखता है। बिहार में सरकार की ये योजनाएं जनता के दिलों में असर डाल सकती हैं। अब विपक्ष कितना इसका असर कम कर पाएगा, यही जीत-हार का निर्धारण करेगी।

Sandeep Kumar

sandeepx4a@gmail.com

संदीप कुमार एक अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें समाचार जगत में 14 साल से ज्यादा काम किया है। इन्हें गहन शोध, सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए जाना जाता है। उन्होंने ETV Bharat, Hyderabad में साढ़े पाँच वर्षों तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और राष्ट्रीय से लेकर क्षेत्रीय स्तर तक कई अहम खबरों को प्रभावशाली अंदाज में प्रस्तुत किया। इसके साथ ही उन्होंने Network 10, TOTAL News, MH1 समेत कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी अपनी पत्रकारिता का कौशल साबित किया। राजनीति, राष्ट्रीय सुरक्षा, समाज और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर पकड़ मजबूत है। इस समय newG india में कार्यरत हैं।

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