पटना। बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए को डर है कि प्रशांत किशोर की ‘जन सुराज’ उनके वोट बैंक में सेंध लगाएगी। इस आशंका से निपटने के लिए, भाजपा ने 15.52 प्रतिशत जनसंख्या वाली उच्च जातियों को अपने कोटे के 101 उम्मीदवारों में से 49 को टिकट दिया है। इनमें सर्वाधिक 37 उम्मीदवार राजपूत जाति के हैं। पूरे एनडीए ने कुल 84 सीटों पर टिकट उच्च जातियों में बांटे हैं।
अब आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जननायक भारत रत्न कर्पूरी ठाकुर की जन्मस्थली समस्तीपुर के दूधपुरा से चुनाव प्रचार की शुरुआत कर पिछड़ा वर्ग को संदेश देने की कोशिश करेंगे। वे इस मंच से विशेषकर पिछड़ा वर्ग और अति पिछड़ा वर्ग को साधने का प्रयास करेंगे।
पीके का प्रभाव और एनडीए की रणनीति
पीके स्वयं ब्राह्मण हैं और ऐसा माना जा रहा है कि उनका असर युवाओं पर ज्यादा है। शहरी उच्च जाति के लोग उनके आकर्षण में हैं। गृहमंत्री अमित शाह को यह फीडबैक पहले ही मिल चुका था। इसकी काट के लिए भाजपा ने ऊंची जाति के लोगों को टिकट देकर यह बताने की कोशिश की है कि वह ऊंची जाति का सम्मान करने में पीछे नहीं रहती।
इसका असर कहीं उल्टा न पड़ जाए, इस कारण प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को जननायक कर्पूरी ठाकुर की जन्मस्थली से प्रचार की शुरुआत करने के लिए उतारा जा रहा है। इसके माध्यम से भाजपा यह बताने की कोशिश करेगी कि कांग्रेस और राजद ने पिछड़े और अति पिछड़े वर्ग में लोकप्रिय रहे कर्पूरी ठाकुर का कभी सम्मान नहीं किया बल्कि भाजपा ने उनको सम्मान दिया।
पिछड़ों पर केंद्रित रहने की संभावना
यह भी संभावना जताई जा रही है कि प्रधानमंत्री का अधिकांश भाषण पिछड़े और अति पिछड़े वर्ग पर ही केंद्रित रहेगा। उनके साथ मिथिलांचल के 10 उम्मीदवार मंच पर मौजूद रहेंगे। यहां से वे पूरे बिहार के विशेषकर दलित व पिछड़े वर्ग के मतदाताओं को लुभाने की कोशिश करेंगे।
समस्तीपुर में प्रधानमंत्री की यह चौथी सभा होगी। इससे पहले वे दो बार समस्तीपुर के जितवारपुर और एक बार सरायरंजन में सभा को संबोधित कर चुके हैं। वे समस्तीपुर से मिथिलांचल की 30 सीटों पर सामाजिक समीकरण को भी साधेंगे। प्रधानमंत्री के इस दौरे से विपक्षी खेमे में बेचैनी है तो एनडीए इसे अपने लिए संजीवनी मान रहा है। भारत रत्न देने के बाद प्रधानमंत्री पहली बार जननायक की जन्मभूमि पर आ रहे हैं।
मिथिलांचल से जातीय समीकरण बनाएगी भाजपा
केंद्रीय मंत्री और जननायक के पुत्र रामनाथ ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री के आने का सब लोग बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। यहां प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए जनता आतुर है। पीएम कर्पूरीग्राम में उनकी मूर्ति पर माल्यार्पण करेंगे और उनके परिजनों से भी मिलेंगे। मिथिलांचल में अपनी पकड़ मजबूत करने के साथ ही भाजपा विकास बनाम जातीय समीकरण की एक नई बहस छेड़ने की कोशिश करेगी, जिससे लोगों को आकर्षित किया जा सके। पीएम मोदी की इस चुनावी जनसभा के बहाने मिथिलांचल (समस्तीपुर, दरभंगा और मधुबनी) की 30 सीटों पर निशाना साधा जाएगा।
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पिछली बार मिथिलांचल की 22 सीटों पर एनडीए को मिली थी विजय
इन 30 सीटों पर 2020 के चुनाव में 22 सीट एनडीए के पास रहीं जबकि 8 सीट महागठबंधन के पास थीं। दरभंगा में 9, मधुबनी में 8 और समस्तीपुर में 5 सीट मतदाताओं ने एनडीए की झोली में डाली थी। समस्तीपुर की स्थिति सबसे खराब रही थी, जहां की दस विधानसभा सीटों में आधी-आधी की हिस्सेदारी रही थी। भाजपा पिछली बार की उस बढ़त को बनाए रखने पर जोर देगी, वहीं विपक्ष की कोशिश है कि वहां से अपनी सीटों की संख्या बढ़ाई जाए।
एक धुरी रहे हैं कर्पूरी ठाकुर
जननायक कर्पूरी ठाकुर की मृत्यु 17 फरवरी 1988 को हुई थी। वे बिहार की राजनीति के केंद्र बिंदु बन गए हैं। लोकसभा का चुनाव हो या फिर विधानसभा का, हर समय नेता उनका नाम लेकर खुद को पिछड़े और अति पिछड़े वर्ग का मसीहा बताने की कोशिश करते हैं। यहां तक कि ताउम्र कांग्रेस विरोध का झंडाबरदार बने रहे कर्पूरी ठाकुर के विचारों को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी अपने भाषणों में शामिल किया है।



