महर्षि अरविंद ने किया था वंदे मातरम का प्रथम उद्घोष: प्रो. अरुण

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के 150 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में एक साल तक मनाए जाने वाले स्मरणोत्सव की शुरुआत की थी। यह कार्यक्रम 7 नवंबर, 2025 से 7 नवंबर, 2026 तक मनाए जाने वाले एक साल के राष्ट्रव्यापी स्मरणोत्सव है।

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दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय से संबद्ध अरबिंदो कॉलेज ने वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर कॉलेज की नैतिकायन, एनएसएस और आक्राया सामाजिक व शैक्षिक संस्था के संयुक्त तत्वावधान में समारोह का आयोजन किया गया। समारोह के मुख्य अतिथि वीरेंद्र सचदेवा ने 76 वें संविधान दिवस के अवसर पर अपनी शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि देश के नागरिक जब अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करते हैं तभी राष्ट्र सशक्त बनता है। हमारा यह संविधान सभी को समान अवसर प्रदान करता है । उन्होंने कहा कि यह संविधान की ताकत ही है कि देश के प्रत्येक व्यक्ति को समता , न्याय , बंधुत्व व सामाजिक समरसता देता है । श्री सचदेवा ने आगे कहा कि भारत का संविधान भारत की आत्मा है , देश कैसे चलेगा यह सब इसमें निहित है । हमें इसे गलियारों , कस्बों व झुग्गी बस्तियों तक ले जाना है तभी संविधान व बाबा साहेब डॉ.अंबेडकर का सपना पूरा होगा । श्री सचदेवा अरबिंदो कॉलेज के पूर्व छात्र रहे हैं इसलिए भावुकता में उन्होंने अपने कॉलेज के दिनों को याद करते हुए कई रोचक प्रसंग सुनाएं । साथ ही उन्होंने अरबिंदो व वंदे मातरम के इतिहास का भी वर्णन किया ।

विशिष्ट अतिथि प्रो. अभिषेक टंडन ने कहा कि वंदे मातरम भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन की भावना और आज के भारत की आकांक्षाओं को एक सूत्र में पिरोता है। उन्होंने छात्रों से अपील की कि वह आजादी के समय में जिस तरह से वंदे मातरम की गूंज सुनाई देती थीं ठीक उसी तरह श्री महर्षि अरविंद ने आजादी के आंदोलन में अपना महत्त्वपूर्ण योगदान दिया है । उन्होंने संविधान दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत की मूल संवैधानिक भावना और इसकी समावेशी सोच को सशक्त बनाया जाए और इसमें दिए गए अधिकार व कर्तव्यों का सही से पालन वर्तमान की केंद्र सरकार कर रही है ।

कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अरुण चौधरी ने अपने संबोधन में वंदे मातरम की ऐतिहासिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि महर्षि अरविंद द्वारा इसका प्रथम सार्वजनिक उदघोष राष्ट्रजागरण का महत्वपूर्ण क्षण था। कॉलेज महर्षि अरविंद के विचारों को छात्रों तक पहुंचाने के लिए समय- समय पर वाद – विवाद , निबंध लेखन , कहानी व नुक्कड़ नाटकों के माध्यम से अनेक प्रतियोगिताएं कर जानकारी दी जाती है ताकि महर्षि अरविंद के विचारों को वह अपने जीवन में उतारें । प्रो. चौधरी ने छात्रों को यह संकल्प दिलाया कि वे अरबिंदो के द्वारा बताए हुए मार्ग पर चलकर उनसे प्रेरणा ले और अपने जीवन में उतारें । प्राचार्य प्रो. अरुण चौधरी ने इस अवसर पर अपने संबोधन में 76 वें संविधान दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि संविधान एक पुस्तक नहीं बल्कि राष्ट्रीय ग्रंथ है ।

उन्होंने बताया कि देश को चलाने के लिए संविधान की आवश्यकता पड़ी जिसे बाबा साहेब डॉ.भीमराव अंबेडकर ने दो साल ग्यारह महीने अठारह दिन में तैयार कर 26 नवम्बर सन 1949 को सौंपा और 26 जनवरी 1950 से लागू किया गया । इस संविधान ने सभी धर्मों की पूजा पद्धति को मौका दिया है । डॉ.अम्बेडकर एक दूर द्रष्टा थे , भारत के विधाता , नारी के उद्धारक , सामाजिक न्याय के समर्थक, विधिवत व पत्रकार भी थे जिन्होंने सन 1920 में मुकनायक समाचार पत्र निकाला । इस पत्र में बहुजन समाज की समस्याओं व स्वतंत्रता संग्राम में लड़ने वाली युवा पीढ़ी के द्वारा किए गए कार्यों का वर्णन होता था । उन्होंने आजादी के समय लड़ने वाले जन नायकों को भी याद किया ।

कार्यक्रम के अंत में संयोजक डॉ. महेश कौशिक ने सभी अतिथियों, संकाय सदस्यों और छात्रों का धन्यवाद ज्ञापित किया। समारोह में सैकड़ों विद्यार्थियों की उपस्थिति ने कार्यक्रम को विशेष रूप से सफल बनाया। इसके अलावा कॉलेज की सभी सामाजिक संस्थाओं के अलावा प्रो.हंसराज सुमन , डॉ.विनय भारद्वाज , प्रो.मीता माथुर , प्रो.संगीता कौल , डॉ.महेश कौशिक व सैंकड़ों छात्र व कर्मचारी उपस्थित रहे ।

Sanjay Rai

sanjayrai.dj@gmail.com

संजय राय ने बीते 25 साल के प्रोफेशनल कैरियर में स्वास्थ्य, अपराध, शिक्षा, विकास समेत सभी बीट की कवरेज की है। दिल्ली सरकार, विधानसभा की कार्यवाही, भाजपा, कांग्रेस, आप सरीखे राजनीतिक दलों के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक व आंदोलनात्मक गतिविधियों को भी कवर किया है। कई सत्रों में संसद की कार्यवाही पर भी कलम चलाई है। फिलवक्त NewG India में बतौर सीनियर स्पेशल काॅरेस्पोंडेंट अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

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