नई दिल्ली: केन्द्रीय पशुपालन एवं डेयरी विभाग ने सुषमा स्वराज भवन में राष्ट्रीय दुग्ध दिवस-2025 मनाया। दुग्ध क्रांति के जनक डॉ. वर्गीज कुरियन की जयंती पर आयोजित इस समारोह में केन्द्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल ने देश के सर्वश्रेष्ठ डेयरी किसानों, तकनीशियनों व सहकारी संस्थाओं को राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार देकर सम्मानित किया, वहीं नई पशु चिकित्सा दिशा-निर्देश, आंकड़ों की वार्षिक पुस्तक और 9 नस्ल सुधार फार्मों का उद्घाटन कर पशुपालन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया गया।
केंद्रीय मंत्री ने किया सम्मान और शुभारंभ
केंद्रीय पशुपालन, मत्स्यपालन एवं डेयरी राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल और जॉर्ज कुरियन कार्यक्रम में शामिल हुए। प्रो. बघेल ने राष्ट्रीय गोपाल रत्न पुरस्कार 2025 वितरित किए। यह पुरस्कार तीन श्रेणियों में दिया गया। पहला, देशी नस्लों के पालने वाले सर्वश्रेष्ठ डेयरी किसान, दूसरा, सर्वश्रेष्ठ कृत्रिम गर्भाधान तकनीशियन और सर्वश्रेष्ठ डेयरी सहकारी समिति/दुग्ध उत्पादक कंपनी।
मंत्री ने बताया कि भारत में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता अब 485 ग्राम प्रतिदिन हो गई है, जो विश्व औसत 329 ग्राम से कहीं अधिक है। उन्होंने गांवों को देश की ताकत बताया और किसानों से सेक्स सॉर्टेड सीमन, आईवीएफ जैसी नई तकनीक अपनाने का आग्रह किया।
नई पहलें और सुविधाएं शुरू
कार्यक्रम में दो महत्वपूर्ण दस्तावेज जारी किए गए। इसमें पशु चिकित्सा अवसंरचना के लिए न्यूनतम मानक दिशा-निर्देश, जिससे अब पूरे देश में चार स्तर की एकसमान पशु चिकित्सा व्यवस्था होगी। बेसिक एनिमल हस्बेंड्री स्टैटिस्टिक्स (BAHS) 2025, जिसमें नीति निर्माण के लिए नवीनतम आंकड़े उपलब्ध। इसके अलावा 9 नस्ल सुधार फार्म (Breed Multiplication Farms) का उद्घाटन किया गया और पंजाब के रोपड़ मिल्क यूनियन के लिए जापान सहायता प्राप्त परियोजना के तहत 20 आधुनिक इंसुलेटेड दूध टैंकर रवाना किए गए।
गांव-गांव तक पहुंचा संदेश
कार्यक्रम में देश भर के पशुपालक किसान, दुग्ध संघ, सहकारी समितियां और विशेषज्ञ शामिल हुए। सभी ने संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पाठ भी किया। दूसरे राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने कृत्रिम गर्भाधान और भ्रूण स्थानांतरण तकनीक की सराहना की और पशु चिकित्सा सेवाओं को और मजबूत करने पर जोर दिया।
किसानों ने साझा किए अनुभव
पशु उत्पादकता बढ़ाने के उपाय विषय पर पैनल चर्चा हुई। प्रगतिशील किसानों और विशेषज्ञों ने अपनी सफल कहानियां सुनाईं। नई तकनीकों से दूध उत्पादन और पशुओं की नस्ल सुधार में आए बदलाव को सबने सराहा।राष्ट्रीय दुग्ध दिवस का यह आयोजन भारत को दूध उत्पादन में विश्व नेता बनाए रखने और गांव के किसानों को सशक्त बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता का प्रतीक बना।



