नई दिल्ली। दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने बुधवार को गोल मार्केट स्थित भाई वीर सिंह साहित्य सदन में आधुनिक पंजाबी साहित्य के प्रमुख स्तंभ भाई साहिब वीर सिंह की 69वीं पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने भाई वीर सिंह को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए साहित्य, आध्यात्मिकता और सामाजिक सुधारों के क्षेत्र में उनके योगदान को याद किया।
भाई वीर सिंह को किया याद
उपराज्यपाल ने कहा कि भाई वीर सिंह को आधुनिक पंजाबी साहित्य का जनक माना जाता है। उन्होंने पंजाबी साहित्य के पुनर्जागरण, सिख चिंतन के प्रसार और सामाजिक सुधारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 1899 में शुरू किए गए साप्ताहिक समाचार पत्र खालसा समाचार के माध्यम से उन्होंने धार्मिक और सामाजिक जागरूकता फैलाने का कार्य किया।
पीएम मोदी के काम का किया उल्लेख
कार्यक्रम के दौरान टी.एस. संधु ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकास भी, विरासत भी’ के विजन का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक विकास के साथ-साथ देश की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों का संरक्षण भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते तकनीकी दौर में साहित्य और संस्कृति से जुड़े संस्थान हमारी विरासत को जीवंत बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उपराज्यपाल ने भाई वीर सिंह साहित्य सदन को दिल्ली में पंजाबी भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक संवाद का महत्वपूर्ण केंद्र बताया। उन्होंने कहा कि यह संस्थान वर्षों से साहित्यिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने का कार्य कर रहा है।
समाज के लिए प्रेरणा
अपने संबोधन में उन्होंने भाई वीर सिंह और अकाली नेता सरदार तेजा सिंह समुंदरी के ऐतिहासिक संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1926 में लाहौर जेल में तेजा सिंह समुंदरी के निधन के बाद भाई वीर सिंह ने उनके बलिदान को श्रद्धांजलि देते हुए लेख और कविताओं के माध्यम से उनके साहस, आस्था और सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाया। टी.एस. संधु ने कहा कि भाई वीर सिंह का साहित्य और विचार आज भी समाज को प्रेरित करते हैं तथा उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनी हुई है। उन्होंने युवाओं से साहित्य, संस्कृति और इतिहास से जुड़ने का आह्वान किया। कार्यक्रम में साहित्य, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।



