चिराग के वोट बैंक पर ‘जन सुराज’ की सेंध, 6 ‘पासवान’ उम्मीदवारों को दिया टिकट

बिहार चुनाव 2025 से पहले प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी ने 6 पासवान उम्मीदवार उतारकर चिराग पासवान के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश की है। क्या पासवान समाज अब बंटेगा या चिराग पासवान फिर दिखाएंगे दम?

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पटना: बिहार की राजनीति में एक नई हलचल मच गई है। प्रशांत किशोर की पार्टी ‘जन सुराज’ ने सोमवार को अपने उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी की, जिसमें छह ऐसे नाम शामिल हैं जिनके नाम के साथ ‘पासवान’ सरनेम जुड़ा है। राजनीतिक गलियारों में इसे केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की LJP(R) के लिए एक सीधी चुनौती और उनके पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

जन सुराज की इस दूसरी सूची में 65 उम्मीदवार हैं, जिसमें सामान्य वर्ग की 46 सीटों के अलावा 18 अनुसूचित जाति (SC) और एक अनुसूचित जनजाति (ST) आरक्षित सीट पर उम्मीदवार घोषित किए गए हैं। लिस्ट की सबसे खास बात यह है कि इसमें छह पासवान सरनेम टाइटल वाले उम्मीदवारों को टिकट दिया गया है।

6 ‘पासवान’ सरनेम उम्मीदवारों को टिकट

  • कुशेश्वर स्थान से शत्रुध्न पासवान
  • रोसड़ा से रोहित पासवान
  • बखरी से डॉ. संजय कुमार पासवान
  • हरनौत से कमलेश पासवान
  • राजपुर से धनंजय पासवान
  • कुटुंबा से महाबली पासवान

चिराग पासवान की राजनीतिक ताकत

यह कदम चिराग पासवान के लिए ‘खतरे की घंटी’ क्यों माना जा रहा है, इसे समझने के लिए बिहार की जातिगत राजनीति को समझना जरूरी है। चिराग पासवान जिस पासवान जाति से आते हैं, वह बिहार में यादवों के बाद दूसरी सबसे बड़ी जाति है। बिहार जाति सर्वेक्षण के अनुसार, राज्य की कुल आबादी में पासवानों की हिस्सेदारी 5.31 प्रतिशत है। चिराग पासवान को इस जाति का सबसे बड़ा और निर्विवाद नेता माना जाता है।

हाल ही में हुए लोकसभा चुनाव में चिराग पासवान की पार्टी का स्ट्राइक रेट 100 फीसदी रहा था, जिससे एनडीए में उनकी महत्ता स्थापित हुई। इसी कारण, एनडीए के सीट बंटवारे में उन्हें 29 सीटें मिलीं, जिसके लिए उन्हें मनाने में बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं को भी प्रयास करना पड़ा था। यह घटना उनकी राजनीतिक जरूरत को दर्शाती है।

पासवान वोट बैंक में सेंध की कोशिश

हालांकि, जन सुराज द्वारा ‘पासवान’ उम्मीदवारों को उतारने से पासवान वोट बैंक में बंटवारे की आशंका बढ़ गई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि पासवान समाज का वोट बैंक अब तक हर परिस्थिति में चिराग पासवान के साथ मजबूती से बना रहा है।

लेकिन कुछ राजनीतिक जानकार यह भी कहते हैं कि पासवान समाज में चिराग के प्रति पूर्ण संतुष्टि नहीं है और वे विकल्प के अभाव में ही उन्हें वोट देते हैं। इस असंतोष की एक वजह यह भी बताई जाती है कि लोजपा (रामविलास) ने लोकसभा चुनाव में जो पांच सीटें जीतीं, उनमें से केवल दो ही पासवान समुदाय के थे (चिराग और उनके बहनोई अरुण कुमार)। आलोचकों का तर्क है कि चिराग को अपने परिवार से बाहर के पासवान नेता नजर नहीं आते हैं। अगर जन सुराज इस कथित नाराजगी को भुनाने में सफल होती है, तो यह चिराग पासवान के लिए बड़ा राजनीतिक नुकसान साबित हो सकता है।

कुटुंबा में रोचक मुकाबला

जन सुराज ने केवल पासवान वोट बैंक पर ही निशाना नहीं साधा है, बल्कि सामान्य सीटों पर दलित उम्मीदवार उतारकर अन्य वर्गों में भी सेंध लगाने की कोशिश की है।

  • हरनौत सीट: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पूर्व विधानसभा सीट (सामान्य सीट) हरनौत से जन सुराज ने कमलेश पासवान को उम्मीदवार बनाया है, जो एनडीए और महागठबंधन दोनों के लिए चुनौती पैदा करता है।
  • कुटुंबा सीट: औरंगाबाद की कुटुंबा (SC आरक्षित) सीट पर जन सुराज ने महाबली पासवान को टिकट दिया है। यह सीट वर्तमान में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम के पास है। राजेश राम रविदास (चमार) समुदाय से आते हैं, जिसकी आबादी (5.25%) पासवानों के लगभग बराबर है। इस कदम को कांग्रेस द्वारा रविदास नेतृत्व खड़ा करने की कोशिशों के बीच पासवान बनाम रविदास (चमार) की लड़ाई शुरू करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिससे कांग्रेस की राह मुश्किल हो सकती है।

Sandeep Kumar

sandeepx4a@gmail.com

संदीप कुमार एक अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें समाचार जगत में 14 साल से ज्यादा काम किया है। इन्हें गहन शोध, सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए जाना जाता है। उन्होंने ETV Bharat, Hyderabad में साढ़े पाँच वर्षों तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और राष्ट्रीय से लेकर क्षेत्रीय स्तर तक कई अहम खबरों को प्रभावशाली अंदाज में प्रस्तुत किया। इसके साथ ही उन्होंने Network 10, TOTAL News, MH1 समेत कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी अपनी पत्रकारिता का कौशल साबित किया। राजनीति, राष्ट्रीय सुरक्षा, समाज और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर पकड़ मजबूत है। इस समय newG india में कार्यरत हैं।

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