नई दिल्ली। उत्तराखंड कैडर के 2002 बैच के आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी ने सार्वजनिक सेवा और ईमानदारी की मिसाल पेश करते हुए लगभग नौ वर्षों में अर्जित अपने सभी टूर भत्तों को उत्तराखंड मुख्यमंत्री राहत कोष में दान कर दिया है। यह राशि 17 दिसंबर 2016 से अगस्त 2025 के बीच किए गए 447 दिनों के फील्ड कार्य के दौरान मिलने वाले भत्तों की है, जो ₹3 लाख से अधिक बताई गई है।
भत्तों का त्याग कर दिया जनहित को प्राथमिकता
4 अप्रैल को लिखे पत्र में चतुर्वेदी ने बताया कि उन्होंने अपने आधिकारिक दौरों के लिए कोई भत्ता नहीं लिया और पूरी राशि को सीधे राहत कोष में जमा करने का अनुरोध किया। सामान्यतः अधिकारियों को मुख्यालय से बाहर ड्यूटी के दौरान दैनिक भत्ता और अन्य खर्च दिए जाते हैं, लेकिन उन्होंने इन्हें त्याग दिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की सेवा और प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण से मिलने वाला संतोष ही उनके लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है।
दुर्गम क्षेत्रों में किया व्यापक कार्य
अपने कार्यकाल के दौरान चतुर्वेदी ने उत्तराखंड के कई दुर्गम और दूरस्थ क्षेत्रों में भ्रमण और निरीक्षण किए। इनमें मिलम ग्लेशियर, हर की दून, माना पास, नेलांग वैली, पंचाचूली बेस कैंप, हेमकुंड साहिब, वैली ऑफ फ्लावर्स और लिपुलेख पास जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इन दौरों में उन्होंने जमीनी स्तर पर संरक्षण कार्यों को भी आगे बढ़ाया।
जैव विविधता संरक्षण में अहम योगदान
चतुर्वेदी ने राज्य में 25 प्लांट कंजरवेशन सेंटर स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके साथ ही हिमालयी जेंटियन, हिमालयी व्हाइट लिली, गोल्डन हिमालयन स्पाइक, ताकिल पाम, इंडियन स्पाइकेनार्ड, दून चीज़वुड और हिमालयन अर्नेबिया जैसी संकटग्रस्त वनस्पतियों के पुनर्स्थापन में योगदान दिया।
सीएम ने की सराहना
उन्होंने हिमालयी मार्मोट, माउंटेन वीज़ल, फ्लाइंग स्क्विरल, किंग कोबरा और फिन्स वीवर जैसे दुर्लभ जीवों के संरक्षण में भी भूमिका निभाई। साथ ही 28 में से 7 वन प्रभागों के वर्किंग प्लान तैयार कर सतत वन प्रबंधन को मजबूत किया। उनके कार्यों की सराहना उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, पूर्व केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और वरिष्ठ वन अधिकारियों द्वारा की जा चुकी है।
पहली बार नहीं किया दान
यह पहली बार नहीं है जब चतुर्वेदी ने इस तरह का योगदान दिया हो। इससे पहले भी वे अपने रेमन मैगसेसे पुरस्कार की राशि प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में दान कर चुके हैं। इसके अलावा पुलवामा हमले में शहीद सीआरपीएफ जवानों के परिवारों के लिए 2.5 लाख रुपये, उत्तराखंड हाईकोर्ट से मिली क्षतिपूर्ति और भ्रष्टाचार विरोधी पुरस्कार की राशि भी जरूरतमंदों को दान कर चुके हैं। उनके वार्षिक अचल संपत्ति विवरण में उनके या उनके परिवार के नाम कोई संपत्ति दर्ज नहीं है, जो उनके सादगीपूर्ण जीवन को दर्शाता है।



