हैदराबाद मेट्रो को मिली बड़ी वित्तीय राहत, IRFC देगा 13,527 करोड़ रुपये का टर्म लोन

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डीएचएस ब्यूरो, दिल्ली। भारतीय रेलवे वित्त निगम (IRFC) ने देश के शहरी परिवहन क्षेत्र में एक बड़ी वित्तीय पहल करते हुए हैदराबाद मेट्रो रेल परियोजना के लिए 13,527 करोड़ रुपये के टर्म लोन समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस राशि का उपयोग परियोजना की मौजूदा देनदारियों के पुनर्वित्त (रीफाइनेंसिंग) के लिए किया जाएगा। इसे देश के शहरी ट्रांजिट सेक्टर के सबसे महत्वपूर्ण रीफाइनेंसिंग समझौतों में से एक माना जा रहा है।

रेल मंत्रालय के तहत कार्यरत नवरत्न सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी IRFC और एलएंडटी मेट्रो रेल (हैदराबाद) लिमिटेड L&TMRHL के बीच यह समझौता हुआ। इस अवसर पर IRFC के चेयरमैन एवं सीएमडी मनोज कुमार दुबे और तेलंगाना के मुख्य सचिव के. रामकृष्ण राव मौजूद रहे।

मेट्रो विस्तार को मिलेगी नई रफ्तार

इस समझौते के तहत हैदराबाद मेट्रो परियोजना की मौजूदा देनदारियों, जिनमें नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर NCD, कमर्शियल पेपर और टर्म लोन शामिल हैं, को पुनर्वित्त किया जाएगा। इससे पुराने ऋणदाताओं को व्यवस्थित रूप से बाहर निकलने का अवसर मिलेगा और परियोजना की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी।

यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब एलएंडटी मेट्रो रेल हैदराबाद लिमिटेड का 100 प्रतिशत स्वामित्व तेलंगाना सरकार के अधीन स्थानांतरित हो चुका है। इसके बाद हैदराबाद मेट्रो अब राज्य सरकार के नियंत्रण वाली एक रणनीतिक सार्वजनिक परिवहन परिसंपत्ति बन गई है।

रोजाना 5 लाख से अधिक यात्रियों का सहारा

हैदराबाद मेट्रो फेज-1 करीब 69.2 किलोमीटर लंबाई में फैला है, जिसमें तीन कॉरिडोर और 57 स्टेशन शामिल हैं। इसे दुनिया की सबसे बड़ी सार्वजनिक-निजी भागीदारी आधारित मेट्रो परियोजनाओं में गिना जाता है।

वर्तमान में यह नेटवर्क प्रतिदिन 5 लाख से अधिक यात्रियों को सेवा प्रदान कर रहा है और शहर की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी बन चुका है। प्रस्तावित विस्तार के बाद उभरते क्षेत्रों तक बेहतर कनेक्टिविटी और अंतिम छोर तक पहुंच यानी लास्ट माइल कनेक्टिविटी को मजबूत किया जा सकेगा।

20 साल की अवधि, आसान वित्तीय शर्तें

यह वित्तीय व्यवस्था 20 वर्षों की अवधि के लिए की गई है, जिसमें तिमाही भुगतान की व्यवस्था होगी। इसके तहत ऊंची ब्याज दर वाले पुराने कर्ज की जगह कम लागत वाले दीर्घकालिक वित्तपोषण की सुविधा मिलेगी।

विशेष बात यह है कि इस वित्तीय पैकेज में प्रोसेसिंग फीस, कमिटमेंट चार्ज या प्री-पेमेंट पेनाल्टी नहीं रखी गई है, जिससे यह उधारकर्ता के लिए अधिक सुविधाजनक और प्रभावी मॉडल बनता है।

देशभर में बन सकता है नया मॉडल

IRFC के सीएमडी मनोज कुमार दुबे ने कहा कि यह समझौता राष्ट्रीय महत्व की बड़ी परियोजनाओं के लिए लंबी अवधि के वित्तीय समाधान उपलब्ध कराने की कंपनी की क्षमता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि इससे भारत में शहरी आधारभूत ढांचे के लिए घरेलू वित्तपोषण का नया मॉडल विकसित हो सकता है।

यह समझौता न केवल हैदराबाद मेट्रो विस्तार को गति देगा, बल्कि देशभर में शहरी परिवहन परियोजनाओं के लिए एक नए वित्तीय ढांचे की मिसाल भी बन सकता

Shivangi Shukla

Shivangi.shukla95512@gmail.com

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