पटना। बौद्ध और हिंदू तीर्थ स्थल के रूप में विश्व प्रसिद्ध गयाजी की सूनी या वीरान पड़ी बंजर पहाड़ियों को अब इको-टूरिज्म सेंटर्स के रूप में विकसित करने की बड़ी पहल की जा रही है। पर्यटन विभाग ने इसका विस्तृत एक्शन प्लान तैयार कर लिया है, जिसके तहत इन पहाड़ियों पर हरियाली बढ़ाने और पर्यटन को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया है।
विभाग के अनुसार ढुंगेश्वरी, ब्रह्मयोनि, प्रेतशिला, रामशिला, गुरूपा और बराबर जैसी पहाड़ियों पर सिड ब्लॉक तकनीक का उपयोग करते हुए एक लाख से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है। यह पौधे वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से लगाई जाएगी। गया-बोधगया क्षेत्र धार्मिक पर्यटन का प्रमुख केंद्र है। महाबोधि मंदिर (यूनेस्को विश्व धरोहर) के अलावा ये पहाड़ियां ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व रखती हैं। इन स्थलों पर ट्रैकिंग, ध्यान और प्रकृति प्रेमियों का आगमन बढ़ रहा है। इसके अलावा कैमूर के माता मुंडेश्वरी धाम में इको टूरिजम विकसित करने की योजना है। साथ ही कई अन्य स्थानों का चयन किया जा रहा है।
राज्यभर के प्रमुख इको-टूरिज्म स्थल
राज्य सरकार इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए पूरे प्रदेश में 24 से अधिक स्थलों को विकसित कर रही है। इनमें वन्यजीव अभयारण्य, राष्ट्रीय उद्यान, झीलें, जलप्रपात और पहाड़ियां शामिल हैं।
• वाल्मीकि टाइगर रिजर्व: बिहार का एकमात्र टाइगर रिजर्व (पश्चिम चंपारण)। तराई वनों, बाघों, हाथियों और विविध वन्यजीवों का घर। नेपाल सीमा से सटा यह इको-टूरिज्म का सबसे बड़ा आकर्षण है।
• कैमूर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी: रोहतास-कैमूर क्षेत्र में स्थित। जंगलों, झरनों और ट्रेकिंग ट्रेल्स के लिए प्रसिद्ध। दूसरे टाइगर रिजर्व के रूप में विकसित हो रहा है।
• भीमबांध वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी: प्राकृतिक स्रोतों, जंगलों और वन्यजीवों से भरपूर।
• गौतम बुद्ध वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी: वन्यजीव संरक्षण और प्रकृति प्रेमियों के लिए आदर्श।
• विक्रमशीला गंगा डॉल्फिन सैंक्चुअरी: गंगा नदी में गंगा डॉल्फिन देखने के लिए प्रसिद्ध। नाव यात्रा का अनोखा अनुभव।
• कंवर झील पक्षी अभयारण्य: एशिया की सबसे बड़ी मीठे पानी की झीलों में से एक। सर्दियों में प्रवासी पक्षियों का स्वर्ग।
• राजगीर हिल्स और हॉट स्प्रिंग्स: ट्रेकिंग, नेचर सफारी, गर्म पानी के झरने और शांति का केंद्र। ग्लास ब्रिज जैसी आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं।
• काकोलत जलप्रपात: प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत नजारा।
• घोरा कटोरा: झील और आसपास के पहाड़ी इलाके।
• बराबर और गुरूपा पहाड़ियां: प्राचीन गुफाएं और प्राकृतिक सौंदर्य।
इनके अलावा सूरजपुर वेटलैंड्स, पटना जू और अन्य जलाशय-वन क्षेत्र भी इको-टूरिज्म सर्किट का हिस्सा हैं।



