मुजफ्फरपुर: बिहार के मुजफ्फरपुर में साइबर फ्रॉड की काली कमाई को सफेद करने का एक बड़ा रैकेट सामने आया है। दिल्ली में बैठे शातिरों ने मधुबनी के एक NGO (गैर सरकारी संगठन) के बैंक खाते का इस्तेमाल कर साइबर ठगी के ₹8.33 करोड़ को तीन दिन में निकाल लिया। इस मामले का खुलासा तब हुआ जब कमीशन को लेकर हुए विवाद के बाद पुलिस ने चार शातिरों को गिरफ्तार किया।
क्या है पूरा मामला
साइबर डीएसपी हिमांशु कुमार के अनुसार, दिल्ली में बैठे साइबर ठगों के सरगना प्रमोद कुमार ने इस पूरे रैकेट को अंजाम दिया। उसने मधुबनी के एक एनजीओ ‘राम प्यारी नंदलाल सेवा संस्थान’ के नाम पर एक सीसी खाता खुलवाया। इस खाते में साइबर ठगी से मिले ₹8.33 करोड़ की बड़ी रकम जमा की गई। यह रकम निकालने के लिए प्रमोद ने अपने एजेंट अभिषेक पांडेय (अमेठी निवासी) को मुजफ्फरपुर भेजा। अभिषेक यहां मधुबनी के निवासी कृष्ण कुमार सिंह और विक्रम सिंह से मिला। तीनों अहियापुर के एक होटल में रुके और तीन दिन के भीतर ₹8.33 करोड़ की पूरी रकम निकाल ली।
कमीशन पर विवाद और गिरफ्तारी
पैसा निकालने के बाद, कृष्ण और विक्रम ने अभिषेक से ₹3 करोड़ कमीशन की मांग की। जबकि दिल्ली के सरगना प्रमोद से 40% कमीशन की बात तय हुई थी। अभिषेक ने इतनी बड़ी रकम देने से इनकार कर दिया, जिसके बाद होटल में तीनों के बीच तीखी बहस और झगड़ा शुरू हो गया। होटल मैनेजर ने पुलिस को इसकी सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने तीनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की, तो इस बड़े साइबर फ्रॉड का खुलासा हुआ। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मुशहरी के एक साइबर कैफे संचालक गुड्डू कुमार को भी गिरफ्तार किया, जो इस रैकेट से जुड़ा था। उसका साथी सोनू फरार है।
साइबर फ्रॉड से जुड़े खुलासे
20 राज्यों में 400 खाते
साइबर डीएसपी ने बताया कि जब्त किए गए मोबाइल और लैपटॉप की जांच से पता चला है कि एनजीओ के बैंक खाते से निकाली गई रकम को 20 राज्यों के 400 से ज्यादा बैंक खातों में भेजा गया था।
दस्तावेजों की जालसाजी गिरफ्तार साइबर कैफे संचालक गुड्डू और सोनू, फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और ईपिक बनाकर साइबर ठगों को मुहैया कराते थे।
20 फ्रॉड के मामले
जांच में विभिन्न राज्यों से किए गए कम से कम 20 साइबर फ्रॉड के मामले सामने आए हैं, जिनकी ठगी की रकम इसी एनजीओ के खाते में जमा हुई थी। पुलिस ने गिरफ्तार किए गए शातिरों के पास से छह मोबाइल, छह डेबिट कार्ड, चेक बुक, पासबुक, लैपटॉप, फिंगरप्रिंट और रेटिना स्कैनर जैसे कई इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए हैं। पुलिस का मानना है कि सरगना प्रमोद की गिरफ्तारी के बाद इस नेटवर्क से जुड़े और भी लोगों का खुलासा हो सकता है।



