पटना: आजादी के बाद बिहार विधानसभा में पहली बार ऐसी स्थिति आई है जब सदन में कोई निर्दलीय विधायक नहीं होगा। स्वतंत्रता के बाद बिहार में 18 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं, लेकिन बीते 17 विधानसभा में निर्दलीय जीतते रहे हैं और उनका किसी न किसी रूप में प्रतिनिधित्व होता रहा है। सबसे कम संख्या 17 वीं विधानसभा में ही थी, जब केवल दो निर्दलीय जीते। पिछली बार जीते दोनों निर्दलीय विधायक इस बार हार गए। इनमें से एक तो जदयू में शामिल होने के बाद जबकि, दूसरे निर्दलीय लड़ते हुए पराजित हुए।
यह पहला अवसर है जब सदन निर्दलीयों के बिना है
बिहार के 73 वर्षों के संसदीय सफर में यह पहला अवसर है जब सदन निर्दलीयों के बिना है। ऐसी स्थिति तब है जबकि बिहार विधानसभा में कभी 30 से 33 विधायक हुआ करते थे। लेकिन, निर्दलीय की पकड़ बिहार में लगातार कम होती गयी। बीते दो-ढाई दशक में वे पूरी तरह हाशिये पर आ गए हैं। खासकर सूबे में नीतीश कुमार की सत्ता आने के बाद दलीय राजनीति मजबूत हुई है। इसके कारण निर्दलीयों की संख्या लगातार कम होती गयी।
पहली बार विधानसभा का चुनाव 1952 में 14 निर्दलीय जीतकर सदन पहुंचे थे
बिहार में पहली बार विधानसभा का चुनाव 1952 में हुई, तब 14 निर्दलीय विधायक जीतकर सदन पहुंचे। दूसरे विधानसभा के चुनाव में इसकी संख्या बढ़कर 16 हो गयी। इसके बाद निर्दलीयों की संख्या बढ़ती-घटती रही। लेकिन, वे सदन के अंदर मजबूत ताकत के रूप में हमेशा बने रहे।



