रायपुर: उत्तर बस्तर डीविजन का प्रभारी सचिव कमलेश दो माह पूर्व ही तेलंगाना में सरेंडर कर दिया था। कंपनी नंबर पांच का कमांडर और वर्तमान में उत्तर बस्तर डीविजन के लिए सिरदर्द बना राजू सलाम, केवटी क्षेत्र में आतंक का पर्याय बनी मीना ने कोयलीबेड़ा बीएसएफ के सामने अपने साथियों को साथ हथियार डाल दिये। रावघाट एरिया की सचिव मैनू पहले ही सरेंडर कर चुकी है। इसको दूसरे शब्दों में कह सकते हैं कि गढ़चिरौली और उत्तर बस्तर डीविजन में शांति कायम हो चुकी है।
आज माड डीविजन के लगभग दो सौ माओवादी सरेंडर करने जा रहे हैं। इसके बाद माओवादियों के तीन डीविजन अर्थात उनके द्वारा बनाये गये तीन जिले एलो जोन में आ जाएंगे। अब यहां माओवादियों की गतिविधियां शांत हैं और निकट भविष्य में भी शांति दिखेगी। Newgindia ने 20 मई को ही इस खबर को “गढ़चिरौली: अबूझमाड़ को जवानों ने लिया बूझ” हेडलाइन से दिया था। जिसमें यह स्पष्ट कर दिया था कि प्रशासन के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द अबूझमाड़ को प्रशासन ने समझ लिया है। इसके बाद इस क्षेत्र से माओवादियों का सफाया करने में परेशानी नहीं होगी। इस खबर पर अब मुहर लग गयी है।
सबसे बड़ा आत्मसमर्पण सोनू दादा का
पोलित ब्यूरो सदस्य वेणुगोपाल उर्फ भूपति उर्फ सोनू दादा ने गढ़चिरौली में 15 अक्टूबर को जब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को अपना एके-47 सौंपा। इस घटना से माओवादियों की रीढ़ की हड्डी चकनाचूर हो गयी, क्योंकि सोनू दादा ही मुख्य रणनीतिकार था। यह माओवादी आंदोलन के इतिहास में सबसे बड़े सरेंडर की घटनाओं में से एक बन गया। इन सबके छिपने का प्रमुख स्थल सीतरम इलाके में पड़ने वाला अबूझमाड़ ही था, जहां 2024 तक पुलिस प्रशासन को जाने में तमाम कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। वहां माओवादी हावी रहते थे। इसके बाद पूरे क्षेत्र में प्रशासन हावी होता चला गया और आज सबसे बड़ा सिरदर्द उत्तर बस्तर और महाराष्ट्र का गढ़चिरौली नक्सल मुक्त होने जा रहा है।
सोनू दादा के बाद आत्मसमर्पण की लग गयी लाइन
छह राज्यों में आतंक पर्याय बना एक करोड़, अस्सी लाख का ईनामी केंद्रीय कमेटी का सदस्य सोनू दादा ऊर्फ भूपति ने अभी 14 अक्टूबर को अपने 61 साथियों के आत्मसर्पण किया था। इसके बाद से नक्सलियों के आत्मसर्मण करने की झड़ी सी लग गयी। जिधर देखिए आत्मसमर्पण के लिए जैसे लाइन लगाकर खड़े हो गये हैं। कहीं गोली उनके सीने को आर-पार न कर दे। इस डर का नतीजा है कि दो दिनों में 308 नक्सली आत्म समर्पण कर चुके हैं। इनमें कई नक्सली उच्च पदाधिकारी हैं।
मीना व राजू सलाम के बाद कांकेर का दहशत खत्म
इसके डर उनके सिर चढ़कर बोलने लगा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 15 अक्टूबर को सुकमा में 27 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया था। इसके बाद कांकेर जिले के कोयलीबेडा के बीएसफ कैंप में रावघाट एरिया कमेटी के टॉप नक्सली लीडर राजू सलाम,मीना, प्रसाद,भास्कर समेत 100 से ज्यादा नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया था। राजू सलाम एक माह से आत्म समर्पण के फिराक में था। गुरुवार को 120 नक्सलियों ने जगदलपुर में आत्मसमर्पण किया है। वहीं कांकेर बार्डर पर सोनू दादा समेत 61 ने समर्पण किया है। इस तरह कुल 308 नक्सली आत्मसर्मण कर चुके हैं।
200 माओवादी करेंगे आत्मसमर्पण
वहीं शुक्रवार को नक्सली प्रवक्ता और डीकेएसजेडसी सदस्य रूपेश ऊर्फ सतीश ऊर्फ आसन्ना अपने 200 साथियों के साथ आत्मसमर्पण करने जा रहा है अर्थात तीन में 508 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके होंगे। ये सभी माओवादियों के हिसाब से बनी दंडकारण्य समिति क्षेत्र में हो रहा है। इससे एक तरफ पुलिस जवानों के हौसले बुलंद हैं, वहीं दूसरी तरफ माओवादियों में हलचल मची हुई है।
आमजन का पुलिस को मिल रहा सहयोग
अब सिर्फ अपना सेफ्टी प्वाइंट की तलाश कर रहे हैं। जैसे ही सेफ्टी प्वाइंट दिखता है, माओवादी अपने हथियार लेकर बाहर आ जाते हैं और आत्मसमर्पण कर देते हैं। इसका एक मात्र कारण है, उनमें फैली दहशत। अब आमजन भी सहयोग नहीं करते। आमजन में माओवादियों के प्रति बहुत भय भी नहीं रह गया है। इससे पुलिस को सूचनाएं मिल जाती हैं और माओवादियों के स्थल पर अटैक करने में पुलिस को काफी सहुलियत हो गयी है।
भयभीत हैं नक्सली
सुरक्षा बलों के नक्सल ऑपरेशन से नक्सली भयभीत और घबराये हुए हैं। लगातार सरेंडर कर रहे हैं। इसी क्रम में 17 अक्टूबर को जगदलपुर में देश का सबसे बड़ा माओवादी आत्मसमर्पण होगा। नक्सली प्रवक्ता और डीकेएसजेडसी सदस्य रूपेश उर्फ सतीश उर्फ आसन्ना अपने 120 साथियों के साथ सरेंडर करेगा। यहां पर कुल 200 नक्सली आत्मसमर्पण करेंगे। बड़ी और खास बात ये है कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।
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आत्मसमर्पण के लिए पुलिस जगदलपुर लेकर आई
इस संबंध में एक वीडियो भी सामने आया है। इसमें नक्सली इंद्रावती नदी पार उसपरी घाट पर दिख रहे हैं। नक्सली कमांडर रूपेश के नेतृत्व में सभी ने सरेंडर करने का फैसला लिया है। स्थानीय पुलिस नक्सलियों को हथियारों के साथ आत्मसमर्पण के लिए जगदलपुर लेकर आ चुकी है। प्रदेश के अंतागढ़, सुकमा के बाद अब बीजापुर से भी लाल आतंक का सफाया शुरू हो गया है।



