पटना: बिहार विधानसभा चुनाव और उपचुनाव 2025 को लेकर निर्वाचन आयोग (ECI) ने मीडिया, राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने बताया कि मतदान से 48 घंटे पहले यानी मौन अवधि (Silence Period) में किसी भी तरह की चुनावी सामग्री, अपील या एग्जिट पोल का प्रसारण या प्रकाशन पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा।
बिहार में 6 और 11 नवंबर को होंगे मतदान
निर्वाचन आयोग ने पहले ही 6 अक्टूबर को बिहार विधानसभा चुनाव और उपचुनावों की तारीखों की घोषणा की थी। राज्य में पहले चरण का मतदान 6 नवंबर और दूसरे चरण का मतदान 11 नवंबर को होगा।
क्या है ‘मौन अवधि’ (Silence Period)?
आयोग के अनुसार, मतदान शुरू होने से 48 घंटे पहले तक की अवधि को ‘मौन अवधि’ कहा जाता है। इस दौरान किसी भी पार्टी, उम्मीदवार या मीडिया प्लेटफॉर्म को प्रचार अभियान चलाने, भाषण, विज्ञापन या अपील प्रसारित करने और टीवी, रेडियो, सोशल मीडिया या केबल नेटवर्क पर चुनावी बहस दिखाने की इजाजत नहीं होगी। इस नियम का उद्देश्य मतदाताओं को शांतिपूर्ण माहौल में निर्णय लेने का समय देना है, ताकि उन पर किसी तरह का राजनीतिक दबाव न पड़े।
टीवी और मीडिया पर भी रोक
निर्वाचन आयोग ने टीवी चैनलों, रेडियो, और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को साफ निर्देश दिया है कि वे मौन अवधि के दौरान ऐसी कोई सामग्री प्रसारित या प्रकाशित न करें, जो किसी पार्टी या उम्मीदवार के पक्ष या विरोध में माहौल बनाए। इसमें डिबेट शो, पैनल डिस्कशन और इंटरव्यू जैसी सामग्रियां भी शामिल हैं।
एग्जिट पोल पर सख्त प्रतिबंध
आयोग ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126ए के तहत आदेश जारी किया है कि 6 नवंबर सुबह 7 बजे से लेकर 11 नवंबर शाम 6:30 बजे तक किसी भी प्रकार के एग्जिट पोल या उसके नतीजे प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक या ऑनलाइन मीडिया में प्रसारित नहीं किए जा सकेंगे।
यह भी पढ़ेंः एनडीए को नई रफ्तार देंगे PM मोदी, 2 नवंबर को पटना में करेंगे रोड शो
उल्लंघन पर सजा
चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि मौन अवधि या एग्जिट पोल नियमों का उल्लंघन करने वालों को दो साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों सजा दी जा सकती है। निर्वाचन आयोग ने सभी मीडिया संस्थानों, राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों से अपील की है कि वे इन दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन करें और चुनाव प्रक्रिया की पवित्रता बनाए रखें।



