मुजफ्फरपुर: डंकी रूट, जिसे पंजाबी भाषा में एक स्थान से दूसरे स्थान पर कूदने के अर्थ में जाना जाता है, गैर कानूनी रूप से अमेरिका, कनाडा, या अन्य विकसित देशों में प्रवेश करने का एक खतरनाक तरीका है। हाल के वर्षों में, नेपाल इस रास्ते का एक प्रमुख प्रवेश द्वार बन गया है। भारत-नेपाल की खुली सीमा और वीजा-मुक्त यात्रा की सुविधा के कारण तस्कर इस क्षेत्र का दुरुपयोग कर रहे हैं। नेपाल से शुरू होने वाले इस रूट में लोगों को पहले लैटिन अमेरिकी देशों जैसे इक्वाडोर, बोलीविया या गुयाना भेजा जाता है, जहां भारतीय नागरिकों के लिए वीजा ऑन अराइवल या आसान पर्यटक वीजा उपलब्ध हैं। इसके बाद, जंगल, नदियों और जोखिम भरे रास्तों से होते हुए उन्हें अमेरिका या अन्य पश्चिमी देशों की सीमा तक पहुंचाने की कोशिश की जाती है।
डंकी रूट पर गोल्डी बरार और लॉरेंस गैंग सक्रिय
लॉरेंस विश्नोई गैंग सबसे अधिक उत्तर बिहार से युवाओं को विदेश भेज रहा है। एनआईए की जांच में डंकी रूट का खुलासा हुआ है। नेपाल से यात्रा शुरू करने के बाद कई देशों के रास्ते युवाओं को अमेरिका तक पहुंचा दिया जाता है। नौकरी का झांसा देने के बाद युवाओं को विदेश पहुंचाकर साइबर ठगी करवाते हैं। मानव तस्कर मोटी रकम भी वसूलते हैं। युवाओं को नेपाल से स्पेन, अल-साल्वाडोर, ग्वाटेमाला और मेक्सिको सहित कई देशों के रास्ते अवैध रूप से डंकी रूट पर भेजता था। विदेश में वैध तरीके से नहीं जाने के कारण युवा फंस जा रहे हैं। एनआईए ने बीते मई में खालसा आतंकी बलबीर सिंह को दबोचा था। वह भी नेपाल के रास्ते भारत में प्रवेश किया था। उसे मोतिहारी में दबोचने के बाद एनआईए की पूछताछ में खुलासा हुआ था कि इस रूट से खालसा आतंकी भी देश से बाहर जाते हैं और विदेश से इसी रूट से लौटते हैं। वांटेड आतंकियों का भी नेपाल गेटवे की तरह पहला पड़ाव बन गया है।
हाल के एक मामले में, दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 47 नेपाली युवतियों को पकड़ा गया, जिन्हें सोनौली सीमा के रास्ते भारत लाया गया था। जांच में पता चला कि मानव तस्करों ने नेपाल से विदेश यात्रा के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) के नियम को बायपास करने के लिए भारत को अपना नया रूट बनाया है। इसके अलावा, उत्तराखंड के काशीपुर में 32 नेपाली युवाओं को एक घर में बंधक बनाकर जबरन काम करवाने का मामला सामने आया, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है।
डंकी रूट के जोखिम और चुनौतियां
डंकी रूट से यात्रा करने वालों को न केवल भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है, बल्कि उनकी जान को भी खतरा रहता है। तस्कर प्रति व्यक्ति 30 से 50 लाख रुपये तक वसूलते हैं, लेकिन गंतव्य तक पहुंचने की कोई गारंटी नहीं होती। इस यात्रा में प्रवासियों को भूख, बीमारी, हिंसा, और यहां तक कि मौत का सामना करना पड़ सकता है। विशेष रूप से डेरियन गैप जैसे खतरनाक जंगलों से गुजरना पड़ता है, जहां डकैती और शारीरिक शोषण आम है।
सरकारी कार्रवाई और जागरूकता
भारत और नेपाल की सरकारें इस समस्या से निपटने के लिए कदम उठा रही हैं। भारत में एनआईए ने हाल ही में डंकी रूट से जुड़े कई तस्करों को गिरफ्तार किया है। हरियाणा सरकार ने अवैध ट्रैवल एजेंटों पर नकेल कसने के लिए नया विधेयक पारित किया है, जिसके तहत बिना रजिस्ट्रेशन के एजेंसी चलाना दंडनीय अपराध होगा। नेपाल में भी मानव तस्करी पर अंकुश लगाने के लिए संयुक्त राष्ट्र के प्रोटोकॉल को लागू किया गया है, ताकि पीडि़तों को सहायता और तस्करों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सके।



