नई दिल्ली: दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने भाजपा और चुनाव आयोग पर “वोट चोरी” का गंभीर आरोप लगाते हुए राजधानी में एक बड़ा जनसंपर्क अभियान शुरू किया है। बाबरपुर जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित हस्ताक्षर अभियान के तहत यादव ने कार्यकर्ताओं के साथ घर-घर जाकर लोगों से मुलाकात की और भाजपा की कथित साजिशों के खिलाफ समर्थन जुटाया। देवेन्द्र यादव के साथ सैंकड़ों की संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता हस्ताक्षर अभियान में शामिल हुए।
मिल रहा जनसमर्थन
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि दिल्ली में इस अभियान को जबरदस्त जनसमर्थन मिल रहा है। 1 से 4 अक्टूबर तक ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों की मासिक बैठकों में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई है। युवा कांग्रेस, महिला कांग्रेस, एनएसयूआई और सेवादल जैसे अग्रिम संगठन भी इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं।
ये लोग शामिल हुए
इस कार्यक्रम की अगुवाई बाबरपुर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष राजकुमार जैन ने की। इस कार्यक्रम में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के दिल्ली प्रभारी काजी निजामुद्दीन, पूर्व विधायक भीष्म शर्मा, निगम पार्षद हाजी जरीफ, हाजी भूरे खान, यूनूस, अशोक बसौया, मोहम्मद उस्मान और अन्य वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे।

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वोट चोरी पर चुनाव आयोग चुप
देवेन्द्र यादव ने कहा कि भाजपा ने चुनाव आयोग के साथ मिलकर देश की जनता के संवैधानिक वोट देने के अधिकार पर प्रहार किया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा उजागर की गई दो विधानसभाओं की जानकारी और चुनाव आयोग की चुप्पी से यह स्पष्ट हो गया है कि देश में संगठित रूप से वोट चोरी की जा रही है। उन्होंने कहा, “देश के युवा, छात्र और Gen Z अब संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट हो चुके हैं।” देश में संगठित तरीके से वोट चोरी हो रही है, देश और दिल्ली के युवाओं को इसके खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई लड़नी होगी।
काजी निजामुद्दीन ने बोला हमला
कार्यक्रम में काजी निजामुद्दीन ने कहा कि देश का युवा अब समझ चुका है कि सिर्फ नौकरी नहीं, बल्कि वोट की रक्षा भी सबसे बड़ी लड़ाई है। उन्होंने वोट चोरी को बेरोजगारी और भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए कहा कि जब तक चुनाव निष्पक्ष नहीं होंगे, तब तक देश में विकास की बात बेमानी है। देश को वोट चोरी से मुक्त करना ही हमारी प्राथमिकता और सबसे बड़ी देशभक्ति होगी। उन्होंने कहा कि भारत में युवाओं की सबसे बड़ी समस्या बेरोज़गारी है, जिसका सीधा रिश्ता वोट चोरी से है, जिसके कारण बेरोज़गारी 45 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी है।



